विराट कोहली ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वेलिंगटन टेस्ट में मिली शर्मनाक हार की बताई ये वजह

भारतीय बल्लेबाजों को कप्तान कोहली ने साफ शब्दों में वेलिंगटन की हार का कसूरवार माना है. हार के बाद भारतीय टीम के सामने अपनी साख बचाने का आखिरी मौका अब क्राइस्टचर्च टेस्ट होगा.

टीम इंडिया को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में 10 विकेट से हार झेलनी पड़ी. इस हार को लेकर भारतीय टीम सवालों के घेरे में है. सवाल इसलिए ज्यादा उठ रहे हैं कयोंकि ICC World Test Championship जब से शुरु हुई है तब से ये पहला मौका है जब भारतीय टीम मजबूत विरोधी के सामने विदेशी दौरे पर है. टीम इंडिया ने ICC World Test Championship में वेस्टइंडीज, साउथ अफ्रीका और बांग्लादेश के खिलाफ खेले सारे मुकाबले जीते थे लेकिन उसकी अग्निपरीक्षा न्यूजीलैंड दौरा ही कहा जा रहा था. जहां पहले ही टेस्ट मैच में टीम इंडिया बैकफुट पर आ गई. जिसके बाद टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान सवालों के जवाब देते हुए माना कि गलती भारतीय टीम के बल्लेबाजों से हुई.

विराट कोहली ने मानी गलती

विराट ने कहा कि, पहली पारी में हमने बल्लेबाजी के दौरान खुद पर न्यूजीलैंड को हावी होने दिया. आप कह सकते हैं कि टॉस इस टेस्ट मैच में अहम रोल में था लेकिन टॉस पर हम नियंत्रण नहीं कर सकते. तो आप टॉस पर ज्यादा फोकस नहीं कर सकते और न ही इसे हार की बड़ी वजह मान सकते हैं. पहली पारी में हमारी बल्लेबाजी ने हमें बैकफुट पर धकेल दिया. हम जानते थे कि वक्त से साथ-साथ बल्लेबाजी के लिए कंडिशन्स बेहतर होंगी. अगर हम पहली पारी मे 230-240 रन बनाते तो हम अपने गेंदबाजों को मौका दे सकते थे और इससे दूसरी पारी में भी हमारे ऊपर दबाव कम होता. वेलिंगटन टेस्ट मैच में हम अपना बेस्ट नहीं कर पाए. ये बात मानने में मुझे कोई शर्म नहीं है. अपनी गलती को स्वीकार करके ही हम अगले मैच में सही माइंडसेट के साथ मैदान पर उतर सकते हैं.

विराट कोहली के इस बयान का सीधा मतलब यही है कि जो उम्मीद भारतीय बल्लेबाजों से की जा रही थी वो उसमें नाकाम रहे. भारतीय टीम दोनों पारियों में 200 रन के आंकड़े को भी छू नहीं पाई. हाल के दिनों में ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय बल्लेबाजों ने इस कदर निराश किया हो. कप्तान विराट कोहली तो अपनी फॉर्म से संघर्ष कर ही रहे हैं लेकिन बाकि बल्लेबाजों के पांव विकेट पर क्यों नहीं जम पांए ये चिंता का विषय है. खास तौर पर बात ओपनर्स की करें तो पृथ्वी साव और मयंक अग्रवाल दोनों ही तकनीक और टेमप्रामेंट के बेहतरीन उदाहरण हैं.

टीम को खली रोहित शर्मा की कमी

वेलिंगटन टेस्ट की पहली पारी में भारतीय टीम के ओपनर्स के बीच पहले विकेट के लिए 16 रन की साझेदारी हुई. दूसरी पारी में भी मयंक और पृथ्वी के बीच ये तालमेल ज्यादा देर तक नहीं रहा और 27 रन के स्कोर पर भारत का पहला विकेट गिर गया. इससे पहले वनडे सीरीज में भी टीम इंडिया के ये दोनों ओपनर्स फेल साबित हुए थे और टीम इंडिया 0-3 से वनडे सीरीज में क्लीन स्वीप हुई थी. जिसके बाद रोहित शर्मा की कमी वनडे के बाद टेस्ट में भी साफ तौर पर टीम इंडिया को खल रही है. इस युवा जोड़ी के अलावा टीम में दो बल्लेबाज ऐसे हैं जिनके पास तकनीक, टेमप्रामेंट के अलावा सबसे अहम चीज अनुभव भी मौजूद है. इसमें 76 टेस्ट मैच खेल चुके चेतेश्वर पुजारा और 64 टेस्ट मैच में भारतीय टीम के हिस्सा रहे उपकप्तान अजिंक्य रहाणे शामिल हैं. इन दोनों से उम्मीद थी कि ये टीम को मुश्किल से निकालेंगे और भारतीय टीम को उसके इस इम्तिहान में पास कराएंगे लेकिन परिणाम सबके सामने हैं.

पुजारा अब पहेली बनते जा रहे हैं. पुजारा के साथ परेशानी ये है कि वो क्रीज पर वक्त बिताने के बाद भी रन बनाने में नाकाम हो रहे हैं. अब समझ ये नहीं आ रहा है कि क्या वो अपनी फॉर्म से संघर्ष कर रहे हैं या फिर वो रनिंग बिटवीन द विकेट के लिए पूरी तरह फिट नहीं हैं क्योंकि पुजारा स्ट्राइक रोटेट बहुत कम करते हैं. दोनों ही पारियों में पुजारा का स्कोर 11 रन और 11 रन ही रहा. रहाणे ने पहली पारी में जरुर स्थित को काबू करने की कोशिश की और 46 रन जोड़े लेकिन दूसरी पारी में वो भी 29 रन पर सरेंडर कर गए. इनके अलावा हनुमा विहारी भी उम्मीद पर खरे नहीं उतर पाए और ऋषभ पंत से तो वैसे भी ज्यादा कोई उम्मीद ही नहीं थी. एक बार फिर पंत का फ्लॉप शो जारी रहा.

भारतीय बल्लेबाजों को कप्तान कोहली ने साफ शब्दों में वेलिंगटन की हार का कसूरवार माना है. अब टेस्ट में हार के बाद भारतीय टीम के सामने अपनी साख बचाने का आखिरी मौका होगा. 29 फरवरी से क्राइस्टचर्च टेस्ट का आगाज होगा. इस बार टीम इंडिया के बल्लेबाजों को अपनी साख के अनुसार जिम्मेदारी लेकर प्रदर्शन करना होगा.