Inside Story:धोनी का उत्तराधिकारी माने जाने वाले ऋषभ पंत को शास्‍त्री ने क्‍यों दिया अल्‍टीमेटम?

ये बात खुद टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने साफ साफ कही. शास्त्री ने पंत को कहा कि या तो वो टीम के हित में प्रदर्शन करें, या फिर अपने ‘टैलेंट’ का बस्ता लेकर चलते बनें.

कभी ऋषभ पंत को धोनी का उत्तराधिकारी कहा जाता है, कभी भारतीय क्रिकेट का भविष्य. लेकिन फिलहाल ऋषभ पंत के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने उन्हें एक तरह का ‘अल्टीमेटम’ दे दिया है. दरअसल, इस ‘अल्टीमेटम’ की कहानी ये है कि ऋषभ पंत को जरूरत से ज्यादा मौके मिल चुके हैं, बावजूद इसके वह अब तक खुद को साबित नहीं कर पाए हैं.

ये बात खुद टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने साफ साफ कही. शास्त्री ने पंत को कहा कि या तो वह टीम के हित में प्रदर्शन करें, या फिर अपने ‘टैलेंट’ का बस्ता लेकर चलते बनें. टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री की ऋषभ पंत से नाराजगी उनके शॉट सेलेक्शन पर है. खास तौर से वो शॉट जो उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में खेला था. आपको याद दिला दें कि तीसरे वनडे में पंत क्रीज पर आए ही थे. पहली ही गेंद पर ऋषभ पंत ने आगे बढ़कर शॉट लगाने की कोशिश की और अपना विकेट दे बैठे. इस वक्त विकेट के दूसरे छोर पर खुद कप्तान विराट कोहली मौजूद थे. पंत की इस लापरवाही पर कप्तान और कोच दोनों ही बेहद नाराज हुए.

इसी नाराजगी को जाहिर करते हुए हेड कोच रवि शास्त्री ने कहा – जब आप किसी बल्लेबाज को ऐसे शॉट्स खेलते हुए देखते हैं तो आपको निराशा होती है. पंत ने कई बार ऐसी गलती दोहराई है. शास्त्री ने कहा है कि अबकी बार ऐसी गलती माफी के लायक नहीं होगी. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि- “आपमें काबिलियत हो या ना हो. आपको खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए. खुद को निराश करने की बात छोड़िए आप टीम को भी निराश कर रहे हैं. जब क्रीज पर आपके साथ कप्तान मौजूद हो और आप लक्ष्य का पीछा कर रहे हों तो आपको समझदारी से क्रिकेट खेलना होता है. उनकी काबिलियत पर कोई सवाल नहीं उठा रहा, लेकिन अब उन्हें साबित करना होगा कि वो कितने विस्फोटक बल्लेबाज हैं”

रवि शास्त्री की नाराजगी जायज भी है. क्योंकि ऋषभ पंत की ये कहानी सिर्फ एक मैच की नहीं है. पंत ने इससे पहले भी कई बार लापरवाही से अपना विकेट गंवाया है. वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी-20 में भी पंत पहली ही गेंद पर छक्का लगाने के चक्कर में आउट हुए थे. दूसरे टी-20 में भी वो सिर्फ 4 रन बनाकर पवेलियन लौट गए.

आप वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल याद कीजिए. उस मुकाबले में भी पंत ने अच्छी शुरुआत के बाद खराब शॉट खेलकर अपना विकेट गंवाया था. और वो 32 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे. उनके आउट होने के बाद ही भारत की हार तय हो गई थी. जिस वक्त उन्होंने ये शॉट खेला था उस वक्त क्रीज पर टिककर बल्लेबाजी करने की जरूरत थी.

इस लापरवाही के बाद भी कप्तान विराट कोहली ने पंत पर भरोसा बनाए रखा और पंत को मौके मिलते रहे. पंत ने सिर्फ 2 साल में ही टीम इंडिया के लिए कुल 41 मैच खेल लिए हैं. इसमें 11 टेस्ट, 12, वनडे और 18 टी-20 मैच शामिल हैं. 12 वनडे में पंत की एक भी अर्धशतकीय पारी नहीं है. वहीं 18 टी-20 में भी पंत सिर्फ 2 अर्धशतकीय पारी खेल पाए हैं. टेस्ट को छोड़ कर वनडे और टी-20 में उनका औसत 23 से ऊपर का नहीं है. ऐसे आंकड़ों के बाद अब लगता है कि कप्तान और कोच के सब्र का बांध भी टूट रहा है.

पंत को समझना होगा कि फिलहाल धोनी भले ही टीम का हिस्सा नहीं हों लेकिन वो विराट की नजर में टीम से बाहर नहीं है. यानी कि धोनी टी-20 वर्ल्ड कप की रेस में बने हुए हैं. उनके अगले आईपीएल में खेलने की पुष्टि भी हो चुकी है. इसके अलावा ऋद्धिमान साहा जैसे अनुभवी विकेटकीपर में भी अभी इतनी क्रिकेट बची है कि 2-3 साल खेल सकते हैं. टीम में कुछ युवा खिलाड़ी भी लगातार दस्तक दे रहे हैं. जिसमें संजू सैमसन, ईशान किशन जैसे खिलाड़ी हैं. ऐसे में पंत को शास्त्री के अल्टीमेटम को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए. वरना जिस तरह केएल राहुल की टेस्ट टीम से छुट्टी हुई है वैसा ही कुछ ऋषभ पंत के साथ भी हो सकता है.