वो कमजोर नब्ज जिसके चलते 70 फीसदी टी-20 मैच हारती है टीम इंडिया

वेस्टइंडीज के विकेटकीपर बल्लेबाज निकोलस पूरन ने 18वें ओवर की तीसरे गेंद पर चौका जड़ते हुए अपनी टीम की जीत पर मुहर लगाई थी. वेस्टइंडीज ने 9 गेंद पहले ही खेल खत्म कर अपनी जीत का डंका बजा दिया था.

वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया तिरुवनंतपुरम में खेला गया टी-20 मुकाबला हार गई। लेकिन इस हार के पीछे भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के अलावा एक ऐसी कमी सामने आई है. जो अगर वक्त रहते नहीं दूर हुई तो इसका खामियाजा मिशन 2020 में टीम इंडिया को उठाना पड़ सकता है.

वेस्टइंडीज के विकेटकीपर बल्लेबाज निकोलस पूरन ने 18वें ओवर की तीसरे गेंद पर चौका जड़ते हुए अपनी टीम की जीत पर मुहर लगाई थी. वेस्टइंडीज ने 9 गेंद पहले ही खेल खत्म कर अपनी जीत का डंका बजा दिया था. लेकिन ये जीत मैच की पहली गेंद डाले बिना ही तय दिख रही थी, कैसे थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा, तिरुवनंतपुरम टी-20 मैच में टॉस भारत हार गया. यहां भारत सिर्फ टॉस ही नहीं हारा बल्कि आधी बाजी भी हार गया था.

वेस्टइंडीज के कप्तान कीरॉन पोलार्ड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया. ये वही फैसला था जो कप्तान विराट कोहली टॉस जीतकर लेना चाहते थे. विराट कोहली से जब टॉस के बाद मुरली कार्तिक ने सवाल किया कि अगर आप टॉस जीतते तो क्या करते? इसका जवाब देते हुए विराट कहोली ने कहा कि अगर हम टॉस जीतते तो हम भी पहले गेंदबाजी करते. मुझे लगता है की बाद में ओस एक फैक्टर हो सकती है. टॉस का कोई कुछ नहीं कर सकता। हम अच्छी फॉर्म में है. पिछले मैच की गेंदबाजी और फील्डिंग में सुधार करना चाहेंगे.

डिफेंड करने में फेल टीम इंडिया
भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली भी जानते हैं कि उनकी टीम डिफेंड करने से बेहतर चेज करने में है और ये बात आंकड़ों से भी साफ जाहिर होती है. इस साल अब तक टीम इंडिया ने 8 मैच में पहले गेंदबाजी की। जिसमें 6 मुकाबलों में भारत ने जीत का परचम फहराया और दो मैच में हार मिली और इसी साल भारत ने कुल सात टी-20 मैच में पहले बल्लेबाजी की.

जिसमें से सिर्फ 2 मौके ऐसे आए जहां टीम इंडिया अपना टोटल डिफेंड करने में सफल रही यानी 5 मैचों में उसे शिकस्त झेलनी पड़ी. इसमें दो मैच भारत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हारा और एक मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ. बांग्लादेश के खिलाफ भी दिल्ली टी-20 में भारतीय टीम को हार झेलनी पड़ी थी. अब वेस्टइंडीज के खिलाफ भी वहीं कमजोर कड़ी टीम इंडिया को ले डूबी. ये टीम इंडिया की ऐसी कमजोर नब्ज है जो विरोधी भी बखूबी जानते हैं.

वहीं विश्व की दूसरी टीमें अपना स्कोर डिफेंड करने में कितनी मजबूत या कमजोर हैं ये भी जानना जरुरी है. पहले बल्लेबाजी करते हुए इस साल ऑस्ट्रेलिया ने दो मैच खेले और दोनों मैच जीते. उधर दक्षिण अफ्रीका ने 5 मैच में से 4 मैच जीते. इसके अलावा न्यूजीलैंड ने इस साल पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 मैच खेले जिसमें उसे 5 मैच में जीत मिली 2 मैच में हार और 1 मैच बेनतीजा रहा.

टीम इंडिया के लिए ये कमजोरी अब घातक बीमारी का रूप ले चुकी है. वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया के बल्लेबाज स्लॉग ओवर्स में संघर्ष करते हुए दिखे. आखिरी 4 ओवर में भारतीय खिलाड़ी 24 गेंद पर सिर्फ 26 रन ही जोड़ पाए. क्रिकेट के फटाफट फॉर्मेट में जहां हर गेंद पर बल्लेबाज ज्यादा से ज्यादा रन जुटाने की कोशिश करता है उसमें आखिरी 4 ओवर सिर्फ 26 रन टीम इंडिया से बने. ये कप्तान विराट कोहली के लिए चिंता की बात है. इन पहलूओं पर ना सिर्फ कप्तान कोहली को ध्यान देना होगा बल्कि बाकि खिलाड़ियों से लेकर कोच और मैनेजमैंट को भी चर्चा करनी होगी.

अगले साल ऑस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप होने जा रहा है और ऐसे में हर बार टॉस टीम इंडिया जीते ये मुमकिन नहीं. टीम इंडिया को अपना टोटल डीफेंड करने के लिए रणनीति में बदलाव की जरुरत है. खिलाड़ियों को इस चैलेंज को स्वीकार करना होगा.