टीम इंडिया को लगी हार की आदत!

ऑस्ट्रेलिया ने इसी साल मार्च में टीम इंडिया को शिकस्त दी थी, 2019 का साल खत्म होने को है लेकिन टीम इंडिया की हार का सिलसिला खत्म नहीं हुआ.

टीम इंडिया पहले वनडे में वेस्टइंडीज के सामने संघर्ष करती नजर आई और ये कोई नई बात नहीं है. ऐसा लग रहा है जैसे अपने ही घर पर जीतना भूल गई है टीम इंडिया. हैदराबाद वनडे में वेस्टइंडीज ने टीम इंडिया को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी. ये टीम इंडिया की अपने घर पर लगातार चौथी हार है. इस साल ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को लगातार तीन मैच हराए और 5 मैच की वनडे सीरीज पर 3-2 से कब्जा किया.

ऑस्ट्रेलिया ने इसी साल मार्च में टीम इंडिया को शिकस्त दी थी, 2019 का साल खत्म होने को है लेकिन टीम इंडिया की हार का सिलसिला खत्म नहीं हुआ. अब वेस्टइंडीज के हाथों भी टीम इंडिया को हार मिली. ऐसा भी नहीं है कि टीम इंडिया ये सभी मैच पहले बल्लेबाजी करके हारी हो. पिछले 4 में से 2 मैच टीम इंडिया लक्ष्य का पीछा करते हुए हारी. वहीं 2 मैच पहले बल्लेबाजी करके गंवाए.

इन सभी मैच में कहीं ना कहीं गेंदबाजों की वजह से मैच हाथ निकले हैं. पिछले 4 मैच में भारतीय गेंदबाज एक बार भी विरोधी टीम को ऑलआउट नहीं कर पाई. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली वनडे में टीम इंडिया 359 रन के बड़े लक्ष्य को भी डिफेंड नहीं कर पाई. रांची वनडे में भी ऑस्ट्रेलिया ने 313 रन बनाए और अब चेन्नई वनडे में वेस्टइंडीज के खिलाफ भी हमारे गेंदबाज 288 रन के लक्ष्य को डिफेंड नहीं कर पाए. वेस्टइंडीज के सिर्फ 2 विकेट ही गिरे और 13 गेंद रहते ही विंडीज के बल्लेबाजों ने धाकड़ जीत हासिल की.

चेन्नई वनडे में क्या थी कमी ?

पहली वजह –
चेन्नई वनडे में विराट कोहली और रोहित शर्मा जल्द पवेलियन लौट गए और यहीं से टीम इंडिया मैच बचाने के मोड में चली गई. श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत ने टीम के स्कोर को 200 के पार पहुंचाया. श्रेयस ने 88 गेंद पर 77 रन बनाए. पंत ने 69 गेंद पर 71 रन बनाए. लेकिन नीचे के बल्लेबाज तेजी से रन नहीं बना पाए. जडेजा ने 21 गेंद पर 21 रन जोड़े केदार ने भी 35 गेंद पर 40 रन बनाए. आखिरी 5 ओवर में सिर्फ 37 रन बने जो की हार की एक वजह रही. कप्तान विराट कोहली ने भी कहा कि ये टीम 15 रन पीछ रह गई.

दूसरी वजह –

चेन्नई वनडे में बड़ी कमी विकेट टेकिंग गेंदबाजों की भी लगी. जसप्रीत बुमराह और भुवनेश्वर कुमार की गैरमौजूदगी साफ महसूस हुई. इसके अलावा तीसरा गेंदबाज जो दबाव बना सके, वो कोई दिखा ही नहीं. कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा भी ओस की वजह से कुछ खास असरदार साबित नहीं हुए. भारतीय स्पिनर्स ने 126 गेंद किए लेकिन एक विकेट भी हासिल नहीं कर पाए.

विराट कोहली से पूछा गया कि क्या टीम में एक गेंदबाज की कमी महसूस हुई तो इस पर विराट कोहली ने कहा-आप जितने विकल्प हों, उनके साथ कोशिश करते हैं. हमें लगा कि गेंदबाजी में 6 विकल्प काफी होंगे. खास तौर से धीमी पिच पर जहां केदार जाधव भी विकल्प थे. रात में पिच का मिजाज बदला हुआ लगा. गेंद उतनी रुक कर नहीं आ रही थी, जितनी पहली पारी में रुक कर आई. हमें लगा कि 6 गेंदबाज काफी होंगे.

अगर बल्लेबाजी में टीम सिर्फ विराट और रोहित के भरोसे है और गेंदबाजी में 6 विकल्प भी कम पड़ जाए तो उस टीम को हार से कौन बचा सकता है. टीम इंडिया को जल्द ही इस मुश्किल का हल ढूंढना होगा क्योंकि हारना अलग बात है लेकिन हार की आदत पड़ जाए तो छुटकारा पाना आसान नहीं होगा.

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