Corona Outbreak के बीच हॉकी टीम के कैंप को हिम्मत का नाम दें या मजबूरी कहें

खिलाड़ियों को कोरोना (corona) से बचने के लिए जरूरी दिशानिर्देश दे दिए गए हैं. सभी खिलाड़ी अपने हाथों की लगातार सफाई के अलावा भी हर तरह की सतर्कता बरत रहे हैं.
coronavirus outbreak in India, Corona Outbreak के बीच हॉकी टीम के कैंप को हिम्मत का नाम दें या मजबूरी कहें

कोरोना के विश्वव्यापी खतरे के बीच अगर कोई आपको बताए कि हमारी हॉकी टीम अब भी बेंगलुरू में अभ्यास कैंप में हिस्सा ले रही है तो आप क्यों कहेंगे? एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद जनता कर्फ्यू (Janata Curfew) की अपील की है. एक के बाद एक देश के अलग-अलग शहरों में धारा 144 लगाई जा रही है. कई राज्यों में कंपलीट लॉकडाउन (Complete Lock down) की खबर आ चुकी है. रेल सेवाएं रोक दी गई हैं. कोरोना से पीड़ित भारतीयों की संख्या करीब साढ़े तीन सौ तक पहुंच गई है. मृतकों की संख्या भी सात हो गई है.

पिछले दो-तीन दिनों में संक्रमित लोगों की तादाद में तेजी से इजाफा हो रहा है. भारत के अलावा दुनिया के और भी कई देशों में हालात पहले से खराब ही हुए है. ऐसे वक्त में हॉकी (Hockey) कैंप में भारतीय खिलाड़ियों का होना काफी हद तक डराने वाला है. लेकिन जैसा हमने आपसे पहले ही पूछा कि आप इसे हिम्मत का नाम देंगे या मजबूरी का, इस सवाल के पीछे की वजह आपको बताते हैं.

जानिए किन परिस्थियों में किया कैंप जारी रखने का फैसला

दरअसल कोरोना को लेकर पिछले कुछ दिनों में जिस तरह तेजी से सब कुछ बंद हो रहा है, उससे पहले ही भारतीय टीम बेंगलुरू पहुंच चुकी थी. बेंगलुरू के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया सेंटर पर टीम का कैंप था. ये बात हर कोई जानता है कि टीम में भारत के अलग-अलग हिस्से के खिलाड़ी शामिल हैं. कैंप सुचारू रूप से चलता इससे पहले ही पूरे देश में लॉकडाउन जैसे हालात बन गए. भारतीय टीम के कोच घर वापस जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें भी ऐसा करने से रोका गया. क्योंकि कोरोना का पहला और सबसे बड़ा खतरा उन लोगों को ही है जो यात्राएं कर रहे हैं.

 

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अब तक के संक्रमित लोगों की पड़ताल में ज्यादातर लोग या तो हाल फिलहाल में विदेश यात्रा से लौटे थे या फिर किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए जो विदेश यात्रा से लौटा था. ऐसे में इन खिलाड़ियों ने भी SAI के अधिकारियों के साथ सलाह मश्विरा कर बेंगलुरू में ही रहने का फैसला किया. चूंकि इस कैंप में किसी बाहरी व्यक्ति को आने की इजाजत नहीं है. इसके अलावा सभी खिलाड़ियों के तापमान (Temperature) पर लगातार नजर रखी जा रही है.

खिलाड़ियों को कोरोना से बचने के लिए जरूरी दिशानिर्देश दे दिए गए हैं. सभी खिलाड़ी अपने हाथों की लगातार सफाई के अलावा भी हर तरह की सतर्कता बरत रहे हैं. ऐसी परिस्थितियों के मद्देनजर इन खिलाड़ियों के कैंप को जारी रखने का फैसला किया गया है. महिला टीम की कप्तान रानी रामपाल तो इससे खासी खुश हैं. उनका कहना है कि जिस तरह के हालात पूरी दुनिया भर में है उसमें उनकी टीम प्रैक्टिस कर पा रही है ये बड़ी बात है.

अभी टूर्नामेंट्स की स्थिति साफ नहीं है

मौजूदा स्थितियां ऐसी हैं कि अगले तीन-चार महीने में खेलों की तमाम स्पर्धाओं का भविष्य किसी को नहीं पता. फिलहाल तो जुलाई में होने वाले टोक्यो ओलंपिक के आयोजन पर भी संकट के बड़े बादल मंडरा रहे हैं. टोक्यो ओलंपिक का आयोजन 24 जुलाई से 9 अगस्त के बीच होना था. इसमें 200 से ज्यादा देशों के 11,000 से ज्यादा एथलीटों को हिस्सा लेना था. लेकिन पूरी दुनिया में जिस तरह कोरोना का खतरा बढ़ा है उसे देखते हुए टोक्यो ओलंपिक का समय से होना अब लगभग असंभव लग रहा है.

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कई देशों ने टोक्यो ओलंपिक को टालने की मांग भी रखी है. ऐसे में भारतीय पुरूषों और महिलाओं की टीम की इस मेहनत का फौरन कोई इम्तिहान नहीं होने वाला. आपको बताते चलें कि टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympic) के लिए भारत की पुरूष और महिलाओं की टीम क्वालीफाई कर चुकी है.

सौ की सीधी बात ये है कि टीम की मौजूदा तैयारियों को ओलंपिक की तैयारी मानने की बजाए कुछ यूं मानना चाहिए जैसे आप अपने घर के भीतर बंद कमरे में कोई खेल खेल रहे हों. बशर्ते उस खेल में कोई बाहरी व्यक्ति ना आए. क्योंकि इस वक्त किसी बाहरी व्यक्ति से बिना जांच के मिलना खतरे से खाली नहीं है. उम्मीद है कि हमारी हॉकी टीम के सभी खिलाड़ी इस सतर्कता को सौ फीसदी से भी कुछ ज्यादा ही समझ रहे होंगे.

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