बदलेगा क्रिकेट का 142 साल पुराना इतिहास, टेस्ट क्रिकेट में होगा ये बड़ा बदलाव

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अब तक खिलाड़ी सादी सफेद जर्सी पहनकर ही खेलते रहे हैं, सिर्फ वनडे और टी20 में ही खिलाड़ियों की किट पर नाम और जर्सी नंबर लिखा रहता है.

नई दिल्ली : ‘इंग्लिश क्रिकेट की मौत हो गई थी और शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा और राख को ऑस्ट्रेलिया ले जाया जाएगा’ (English cricket had died, and “the body will be cremated and the ashes taken to Australia”) ये फेमस लाइनें तत्कालीन ब्रिटिश अखबार The Sporting Times  में 1882 में हेडलाइन बनी थीं और इसका कारण था टेस्ट मैचों में अपनी ही धरती पर इंग्लैण्ड को मिली पहली हार.

कहानी जुड़ी है जर्सी के कलर से

टेस्ट क्रिकेट की शुरूआत के साथ ही यह खेल सफेद रंग की जर्सी के साथ खेला जाता रहा है जिसपर न खिलाड़ियों के नाम और न ही जर्सी नंबर प्रिंट होता है. अब इसी परंपरा को तोड़ते हुए इस साल 1 अगस्त से शुरू होने जा रही एशेज सीरीज में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैण्ड के खिलाड़ियों ने अपनी जर्सी पर नाम और नंबर लिखने की शुरूआत करने जा रहे हैं. हालांकि ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में पहले से ही घरेलू क्रिकेट में जर्सी पर नंबर का इस्तेमाल किया जाता है.

इस साल शुरू होगी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप

इसे इस साल शुरू होने जा रही टेस्ट चैम्पियनशिप से भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें ऐसी उम्मीद है कि खिलाड़ी अपनी टेस्ट जर्सी पर नाम और नंबर का इस्तेमाल करेंगे. क्रिकेट का सबसे लंबा फार्मेट होन के कारण आईसीसी ने अब तक टेस्ट क्रिकेट के लिए कोई विश्व कप नहीं आयोजित किया है. हालांकि आईसीसी ने इस साल विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (2019-2021) से अपनी पहली चैम्पियनशिप शुरू करने की योजना बनाई है. टेस्ट खेलने वाली टॉप 9 टीमें टेस्ट चैम्पियनशिप में हिस्सा लेंगी. 2 साल के दौरान टीमें घर और विदेश दोनों जगहों पर 3-3 सीरीज खेलेंगी. टॉप पर रहने वाली 2 टीमों के बीच फाइनल होगा. फाइनल जुलाई 2021 में खेला जाएगा.

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ICC की ताजा जारी रैंकिंग में भारत टेस्ट टीम रैंकिंग में पहले स्थान पर पहुंच गया है.

कब हुई थी टेस्ट मैच की शुरूआत

पहला आधिकारिक टेस्ट मैच 142 साल पहले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैण्ड के बीच मेलबर्न में 15-19 मार्च तक 1877 में खेला गया था और ऑस्ट्रेलिया ने यह मैच 45 रनों से जीत लिया था. मजेदार बात तो यह है जब 100 साल बाद 1977 में पहले टेस्ट मैच की याद ताजा करने के लिए मेलबर्न में मैच खेला गया तो इस बार भी ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैण्ड को 45 रनों से ही हराया था.

कब हुई थी ऐशज की शुरुआत

1877 में खेले गए पहले टेस्ट मैच के 5 साल बाद 1882 में एशेज की शुरुआत हुई थी. ओवल टेस्ट में मिली हार का बदला लेने के तत्कालीन इंग्लिश कैप्टन Ivo Bligh ने वादा किया कि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर वे 1882 में मिली हार का बदला लेकर आएंगे. इंग्लैण्ड ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर दमदार प्रदर्शन किया और तीन मैचों की सीरीज़ में 2 मैच अपने नाम किए. इंग्लिश मीडिया ने इसे खोई हुई राख(the quest to regain the Ashes) हासिल करने वाला दौरा कहा.

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1 अगस्त से इंग्लैंड अपने घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया से एशेज सीरीज खेलेगी

क्या है ‘urn’ का इतिहास

इंग्लैण्ड वापसी पर कुछ महिलाओं ने टीम के कैप्टन Bligh को राख रखने वाला कलश (urn) देकर सम्मानित किया. 15 सेंटीमीटर के आकार वाली यह urn बाद में एशेज की ट्राफी बनी. ऐसा माना जाता है कि इस urn में महिलाओं ने क्रिकेट बेल्स (गिल्ली) को जलाकर उसकी राख उसमें भर दी थी. हालांकि यह urn कभी एशेज की आफीसियल ट्राफी नहीं बनी बल्कि इसकी रेप्लिका ही हमेशा से दी जाती रही है. 1998-99 से एशेज में अब एक क्रिस्टल ट्राफी दी जाने लगी है जो पुरानी ट्राफी की रेप्लिका है.

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ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में पहले से ही घरेलू क्रिकेट में जर्सी पर नंबर का इस्तेमाल किया जाता है.

क्या हैं एशेज के रिकार्ड्स

रिकॅार्ड्स की बात करें तो अब तक कुल 70 एशेज सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया ने 33 और इंग्लैण्ड ने 32 सीरीज़ जीती हैं, 5 सीरीज़ ड्रा रही थी. सबसे ज्यादा रनों की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया की तरफ से सर डॅान ब्रैडमैन ने एशेज में सर्वाधिक 37 मैचों में 5028 रन बनाए हैं और शेन वार्न ने 36 मैचों में 195 विकेट अपने नाम किये हैं.