आज 2011 World Cup में भारत ने पाकिस्तान को हराया था और भारतीय मीडिया ने ICC को

मोहाली में खेले गए इस मैच के पहले ही एक अप्रीय घटना घटी, जिसमें मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और ICC को भी सबक सिखाया कि कई बार सही बात को लागू करने का तरीका भी सही होना चाहिए. जानिए चश्मदीद से पूरी कहानी...

2011 विश्व कप में ओपनिंग मैच के बाद क्वार्टर फाइनल से लेकर फाइनल तक के सारे मैच मुझे कवर करने थे. दरअसल, ICC को बताना पड़ता था कि विश्व कप का कौन सा मैच कौन कवर करेगा. क्योंकि एक संस्थान से एक ही पत्रकार को प्रेस बॉक्स में जगह दी जा सकती थी. अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टरफाइनल मैच कवर करने के बाद मुझे मोहाली जाना था. मोहाली में मुकाबला पाकिस्तान से था. वो सेमीफाइनल मैच आज ही के दिन यानी 30 मार्च 2011 को खेला गया था. बहुत हाई प्रोफाइल मैच था.

भारत पाकिस्तान के तमाम बड़े कद्दावर लोग उस मैच को देखने के लिए जमा हुए थे. इसमें पाकिस्तान और भारत के प्रधानमंत्री भी शामिल थे. क्योंकि 2011 से पहले विश्व कप में भारतीय टीम ने हमेशा पाकिस्तान को हराया था, इसलिए भी मैच पर हर किसी की नजर थी. पाकिस्तान की टीम इस रिकार्ड को तोड़ने के इरादे से साथ मोहाली पहुंची थी.

जबकि भारतीय टीम को अपना रिकॉर्ड कायम रखना था. जाहिर है कमाल का रोमांच था मैच से पहले. मैच डे-नाइट था लेकिन मैच से जुड़ी खबरें सुबह से ही सभी चैनलों पर चल रही थीं. मैं भी लाइव माहौल बताने के लिए तय समय से काफी पहले ही मोहाली स्टेडियम पहुंच गया था. अभी मैं कार से उतरा ही था कि मैंने एक अप्रिय घटना देखी.

ICC वकील ने की थी तिरंगे से बदसलूकी

जैसे ही मैं अपनी कार से उतरा मैंने देखा की एक महिला रेहड़ीवालों पर जोर-जोर से चिल्ला रही है. वो रेहड़ीवाले प्लास्टिक पर छपा तिरंगा बेच रहे थे. इसके अलावा भी उनके पास छोटे-मोटे मर्चेन्डाइज थे जो स्टेडियम में जाने वाले फैंस खरीदा करते हैं. पास में ही कुछ बच्चे हाथों में कलर लेकर घूम रहे थे और फैंस के चेहरे पर उन रंगों से तिरंगा बना रहे थे. ICC की मोहतरमा का कहना था कि ये गैरकानूनी है. क्योंकि जो भी मर्चेन्डाइज हैं उन्हें बेचने का अधिकार सिर्फ ICC के पास है.

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उसका कहना था कि रेहड़ीवालों को तुरंत वहां से हटना होगा वरना वो कड़ी कार्रवाई करेंगी. गरीब रेहड़ीवालों को ये नियम कानून समझ नहीं आ रहे थे. वो तो चार पैसे कमाने के लिए बैठे थे. गुस्से में तिलमिलाई ICC वकील ने उन रेहड़ीवालों का सामान उठाकर अस्त-व्यस्त करने से लेकर फेंकना शुरू कर दिया. उन्होंने भारतीय तिरंगे के साथ भी बदसलूकी की. इस वक्त तक मैं अपने कैमरामैन को इस पूरे मामले को कैमरे में कैद करने का इशारा कर चुका था.

मैंने उन वकील मोहतरमा से बातचीत कर मामले को शांत करने की कोशिश की. असल में तो तब तक मुझे उनका परिचय भी नहीं पता था. लेकिन जब मैंने उनसे पूछताछ की तो वो बड़ी धौंस के साथ अपना विज़िटिंग कार्ड देकर वहां से चली गईं. उन्होंने दरअसल ये भी देख लिया था कि मेरा कैमरामैन पूरे घटनाक्रम को शूट कर रहा है. विज़िटिंग कार्ड से पता चला कि वो मोहतरमा ICC की वकील हैं. मैंने सबसे पहले उनके बर्ताव पर आपत्ति जताने वाली खबर ऑन-एयर की.

जल्दी ही बढ़ गया मामला और ICC को मांगनी पड़ी माफी

जैसे ही ये खबर चली और चैनल से मोहाली गए मेरे साथी पत्रकारों ने भी खबर के बारे में मुझसे पूछा. दरअसल उस महिला वकील के वो विजुअल्स सिर्फ मेरे पास थे. मैंने खबर की गंभीरता को देखते हुए बाकि सहयोगियों को भी वो विजुअल्स दिए. जल्दी ही ये खबर पूरे टेलीविजन मीडिया पर प्रमुखता से चलने लगी. जाहिर है बात ICC तक भी पहुंची. ICC का मीडिया उन दिनों पाकिस्तान के एक पूर्व पत्रकार देखा करते थे.

उन्हें भी समझ आ गया कि ये मामला अगर जल्दी नहीं संभला तो बात बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. मामला भारतीय तिरंगे का था. उन्होंने तुरंत संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर मामले की न सिर्फ जानकारी दी बल्कि उनसे सलाह मशविरा करके ICC का माफीनामा भी जारी किया. चूंकि मैच बहुत बड़ा था और ICC की तरफ से उन वकील मोहतरमा के खिलाफ जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिल गया था, इसलिए इस खबर को रोका गया.

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मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी निभाई. ICC को भी सबक मिल चुका था कि कई बार सही बात को लागू करने का तरीका भी सही होना चाहिए. खैर अंत भला तो सब भला, भारत ने पाकिस्तान को हराकर फाइनल में जगह बना ली. मेरी अगली मंजिल अब मुंबई थी…

(इस घटना के चश्मदीद शिवेंद्र कुमार सिंह टीवी9 भारतवर्ष के खेल संपादक हैं)

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