जब PAK के गेंदबाजों को सहवाग और द्रविड़ ने रुला दिया था, अफरीदी ने आज क्यों याद किया वही मैच

इस मैच में थोड़ा सा मसाला शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi) ने भी डाला था, अपने शतक के सफर में 63 रनों से 90 रनों तक का सफर उन्होंने सिर्फ एक ओवर में पूरा कर लिया. अफरीदी का शिकार बने थे हरभजन सिंह.
Pakistan bowlers cry, जब PAK के गेंदबाजों को सहवाग और द्रविड़ ने रुला दिया था, अफरीदी ने आज क्यों याद किया वही मैच

दरअसल, उस टेस्ट मैच में रोए तो दोनों टीमों के गेंदबाज थे. लेकिन पाकिस्तानी गेंदबाज़ों (Pakistani bowlers) की हालत कुछ ज़्यादा ही ख़राब थी. पाकिस्तानी टीम ने तो बिना किसी दबाव के पहले बल्लेबाज़ी करके रन बनाए थे. लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ों (Indian Batsmans) ने तो 600 से ज़्यादा रनों के पहाड़ का भी मुंहतोड़ जवाब दिया था. अपने चौथे पाकिस्तानी दौरे में मैं वो टेस्ट मैच कवर कर रहा था. आज क़रीब 14 साल बाद उस टेस्ट मैच की कहानी इसलिए सुना रहा हूँ क्योंकि पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफ़रीदी ने उस टेस्ट मैच को याद किया है.

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हुआ यूँ कि पाकिस्तान क्रिकेट ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर एक तस्वीर पोस्ट की. उस तस्वीर में अफ़रीदी शोएब अख़्तर के साथ कुछ मज़ाक़ कर रहे हैं. पीसीबी ने पूछा कि ये किस साल की तस्वीर है. इस सवाल के जवाब में अफ़रीदी ने लिखा- “ये तस्वीर 2006 की है. जो भारत के ख़िलाफ़ मेरी यादगार पारियों में से एक है. शोएब अख़्तर हमेशा बल्लेबाज़ों के लिए ख़तरा थे. लेकिन ये विकेट कुछ ज़्यादा ही फ़्लैट था. लिहाज़ा गेंदबाज़ों के दर्द को कम करने के लिए जोक शेयर करने के अलावा कोई चारा नहीं था”. चलिए तो आपको उस टेस्ट मैच की आँखों देखी कहानी सुनाता हूँ.

कप्तान इंजमाम उल हक ने टॉस जीता

तारीख़ थी 13 जनवरी 2006. भारत पाकिस्तान का पहला टेस्ट मैच शुरू हुआ. इस टेस्ट मैच से पहले पीसीबी के चीफ क्यूरेटर आगा जाहिद का इंटरव्यू हर चैनल ने किया था. पाकिस्तान के कप्तान इंजमाम उल हक ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. एशियाई देशों में वैसे भी टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करना फायदे का सौदा रहा है. पाकिस्तान की शुरूआत खराब रही. सलमान बट्ट रन आउट हो गए, लेकिन इसके बाद पाकिस्तान के बल्लेबाज जम गए. दूसरा विकेट सवा सौ रनों के बाद गिरा और तीसरा साढ़े चार सौ रनों के बाद.

उन दिनों भारतीय टीम हमेशा 4 स्पेशलिस्ट गेंदबाजों के साथ खेलती थी, पार्ट टाइम गेंदबाज के तौर पर सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंडुलकर सबने गेंदबाजी कर ली, पाकिस्तानी बल्लेबाज क्रीज से हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे. पाकिस्तान ने पहली पारी 7 विकेट पर 679 रनों के स्कोर पर पारी समाप्ति का ऐलान किया. पाकिस्तान की तरफ से यूनिस खान, मोहम्मद यूसुफ, शाहिद अफरीदी और कामरान अकमल ने शतक जड़े थे. यूनिस खान तो सिर्फ एक रन से दोहरे शतक से चूक गए थे.

इस मैच में थोड़ा सा मसाला शाहिद अफरीदी ने भी डाला था, अपने शतक के सफर में 63 रनों से 90 रनों तक का सफर उन्होंने सिर्फ एक ओवर में पूरा कर लिया. अफरीदी का शिकार बने थे हरभजन सिंह. भज्जी के ओवर की पहली 4 गेंदों पर जबरदस्त छक्का मारने के बाद अफरीदी का इरादा तो 6 गेंद पर 6 छक्के लगाकर रिकॉर्ड कायम करने का था, लेकिन पांचवी और छठी गेंद पर अफरीदी चूक गए. हालांकि उन्होंने इस ओवर में 27 रन वसूले, उस वक्त तक टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ये दूसरा सबसे मंहगा ओवर साबित हुआ था.

भारतीय टीम के लिए मुश्किल थी राह 

खैर, 679 रनों के खिलाफ भारतीय टीम की राह मुश्किल होती दिख रही थी. अभी टेस्ट मैच में 3 दिन से ज्यादा का वक्त बचा था. ऐसा लगने लगा था दौरे की शुरूआत हार के साथ होने वाली है. पिच पर रन बनाना मुश्किल नहीं था, लेकिन 679 रनों के पहाड़ के नीचे बड़े बड़े बल्लेबाज का पसीना छूट जाता है. फिर पिच चाहे कैसी भी हो रन बनाना और विकेट बचाना दोनों दुनिया के सबसे कठिन काम लगते हैं, उस पर सामने शोएब अख्तर जैसा गेंदबाज और उसके साथ स्टेडियम में बैठे हजारों लोगों का शोर. भारत के पक्ष में कुछ भी नहीं दिख रहा था. पाकिस्तान की टीम की रणनीति तो यही थी कि भारत को पारी की हार का स्वाद चखाया जाए.

राहुल द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग बल्लेबाजी करने उतरे- पाकिस्तान की गेंदबाजी शुरू. पहली गेंद फेंकने को शोएब अख्तर तैयार सामने वीरेंद्र सहवाग. अख्तर ने पहली ही गेंद पर बाउंसर डालने की कोशिश की, लेकिन वो बाउंसर विकेट के पीछे बाउंड्री पार गई और अंपायर ने लेग बाई 4 रनों का इशारा किया. ओवर की आखिरी गेंद पर सहवाग ने शानदार चौका जड़ा. 1 ओवर के बाद भारत का स्कोर बिना कोई विकेट खोए 10 रन.

मंजिल अभी बहुत दूर थी, ऐसे जाने कितने चौके मारने थे…रन बनाने का सिलसिला चलता रहा. पारी के 17वें ओवर तक पहुंचते पहुंचते सहवाग ने अर्धशतक पूरा कर लिया था. भारत का स्कोर भी करीब 100 रनों तक पहुंच गया था. सहवाग का बल्ला और द्रविड़ का भरोसा अब भारतीय फैंस को राहत की सांस भरने का मौका दे रहा था. देखते देखते सहवाग सहवाग का शतक स्कोर बोर्ड पर चमक रहा था. सहवाग चढ़ कर खेल रहे थे. द्रविड़ शीट एंकर के रोल में थे.

आउट होने को तैयार ही नहीं थे वीरू-द्रविड़

धीरे-धीरे पहले 100, फिर 200, फिर 300 और फिर 400 रनों तक की साझेदारी हो गई. सहवाग के 250 रन पूरे हो गए, राहुल द्रविड़ ने शतक पूरा कर लिया. इंजमाम उल हक के सारे हथियार नाकाम. शोएब अख्तर, राना नावेद उल हसन, मोहम्मद समी, शोएब मलिक…जाने किसने किसने गेंदबाजी कर ली लेकिन वीरू और द्रविड़ आउट होने को तैयार ही नहीं थे. पाकिस्तान के गेंदबाज हताश हो चुके थे.

पाकिस्तान की टीम बैकफुट पर आ चुकी थी. टेस्ट मैच का ड्रॉ होना 200 फीसदी तय था. इसकी एक बड़ी वजह मौसम भी था. लाहौर में रूक रूक कर बारिश हो रही थी और हर रोज मैच करीब आधा-एक घंटा पहले ही खराब रोशनी की वजह से खत्म हो जाता था. इसके लिए खेल के दौरान बारिश जो रूकावट पैदा कर रही थी वो अलग.

Pakistan bowlers cry, जब PAK के गेंदबाजों को सहवाग और द्रविड़ ने रुला दिया था, अफरीदी ने आज क्यों याद किया वही मैच

अब ऐसे में दिलचस्पी थी तो इसी बात में वीरू और द्रविड़ के बीच अगर पहले विकेट के लिए 414 रनों की साझेदारी हो गई तो टेस्ट क्रिकेट में पहले विकेट के लिए साझेदारी का नया विश्व रिकॉर्ड बन जाएगा. खुशी और इंतजार इसलिए भी ज्यादा था क्योंकि इससे पहले भी ये रिकॉर्ड भारतीय क्रिकेटर वीनू मांकड और पंकज रॉय ने कायम किया था. जनवरी 1956 में बैंगलोर में खेले गए उस टेस्ट मैच में भारत को बड़ी जीत मिली थी.

टूटने वाला था आधी सदी का रिकॉर्ड

खैर, तो पूरे प्रेस बॉक्स में पत्रकारों को इस बात का इंतजार था कि बोरिंग टेस्ट मैच में तो कुछ लिखने बोलने को है नहीं अगर वीरू और द्रविड़ 414 रन बना लें तो रिपोर्ट में कुछ तो रोमांच आएगा ही. साझेदारी 410 रनों की हो चुकी थी, आधी सदी का रिकॉर्ड टूटने वाला था, पर अफसोस तभी वीरू का ध्यान टूट गया. राना नावेद उल हसन की एक उपर उठती गेंद को उन्होंने छेड़ दिया और गेंद कामरान अकमल के दस्ताने में थी. एक साहसिक, ऐतिहासिक पारी खत्म हुई और रिकॉर्ड टूटने से रह गया. ये रिकॉर्ड बाद में दक्षिण अफ्रीका के ग्राहम स्मिथ और नील मैकेंजी ने तोड़ा.

वीरू जब इस शानदार पारी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए आए तो उनसे किसी पत्रकार ने सवाल पूछा कि क्या उन्हें पता था कि वीनू मांकड और पंकज रॉय ने 413 रनों की साझेदारी का रिकॉर्ड कायम किया था. ना जाने वीरेंद्र सहवाग किस मूड में थे- उन्होंने जवाब दिया कि मुझे उन दोनों के बारे में कुछ नहीं मालूम, मैंने कभी उनके बारे में सुना नहीं. पूरा मीडिया अवाक रह गया. अगले दिन तमाम अखबारों ने वीरेंद्र सहवाग के इस बयान की आलोचना भी की.

आज कई साल बाद मुझे लगता है कि शायद वीरेंद्र सहवाग को सवाल पूछने का वो अंदाज पसंद नहीं आया रहा होगा, वीनू मांकड और पंकज रॉय का नाम वीरेंद्र सहवाग ने जरूर सुना होगा, ये बिल्कुल संभव है कि उन्हें 413 रनों के रिकॉर्ड का पता ना रहा हो. कोई भी बल्लेबाज मैदान में जाने से पहले ये देखकर नहीं जाता कि वो कौन से रिकॉर्ड को तोड़ सकता है, वीरेंद्र सहवाग जैसा बल्लेबाज तो बिल्कुल ही नहीं.

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