शाहिद अफ़रीदी और गौतम गंभीर की जंग में क्यों कूदे वकार यूनुस

हाल ही में शाहिद अफ़रीदी (Shahid Afridi) ने कश्मीर को लेकर एक बेहद विवादास्पद बयान दिया था. इसके अलावा उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री पर विवादित टिप्पणी भी की थी.
Waqar Younis advise, शाहिद अफ़रीदी और गौतम गंभीर की जंग में क्यों कूदे वकार यूनुस

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और दिग्गज गेंदबाज़ वकार यूनुस (Waqar Younis) ने अपने हमवतन शाहिद अफ़रीदी  (Shahid Afridi) और भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) से अपने रिश्तों को सुधारने की बात कही है. वकार यूनुस ने कहा कि ये दोनों ही समझदार खिलाड़ी हैं. इन्हें कहीं बैठकर आपस में बातचीत करनी चाहिए. अगर इन दोनों खिलाड़ियों की तू-तू,मैं-मैं सोशल मीडिया (Social Media) में चलती रही तो लोग इसका मज़ा उठाते रहेंगे. वकार यूनुस ने खुद भी अपने आपको सोशल मीडिया से दूर कर लिया था. पिछले दिनों उनका ट्विटर अकाउंट हैक हो गया था. हैकर ने उनके अकाउंट से एक आपत्तिजनक वीडियो को लाइक कर दिया था. इससे नाराज़ वकार यूनुस ने सोशल मीडिया से दूर रहने का फ़ैसला कर लिया था.

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अफ़रीदी की ज़ुबान पर लगाम लगे तो बात बने

दरअसल, अक्सर होने वाले विवाद की जड़ में है शाहिद अफ़रीदी की ज़ुबान. हाल ही में शाहिद अफ़रीदी ने कश्मीर को लेकर एक बेहद विवादास्पद बयान दिया था. इसके अलावा उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री पर विवादित टिप्पणी भी की थी. अपनी बेतुकी बातों का सिलसिला वो यहां तक ले आए थे कि उन्होंने पाकिस्तान सुपर लीग में कश्मीर की टीम बनाने का प्रस्ताव रख दिया था. वो उसकी कप्तानी करने की बात भी कर रहे थे. ऐसी ही बातों से नाराज़ गौतम गंभीर ने शाहिद अफ़रीदी पर जवाबी हमला बोला था. गौतम गंभीर के अलावा युवराज सिंह, हरभजन सिंह, सुरेश रैना और शिखर धवन जैसे खिलाड़ियों ने भी शाहिद अफ़रीदी के बयानों की जमकर आलोचना की थी. भारतीय खिलाड़ियों ने साफ़ कह दिया था कि वो भविष्य में अफ़रीदी के साथ कोई रिश्ता नहीं रखेंगे.

चालाक अफ़रीदी ने चल दिया था दूसरा दांव

शाहिद अफ़रीदी ने जब भारतीय खिलाड़ियों का ग़ुस्सा देखा तो दूसरी चाल चल दी. वो युवराज सिंह और हरभजन सिंह को मजबूर बताने लगे. अफरीदी से पूछा गया कि आपकी संस्था के लिए मदद करने वाले युवराज सिंह और हरभजन ने आपके बयान पर नाराजगी जताई है. अफरीदी कहने लगे कि वो युवराज सिंह और हरभजन सिंह के हमेशा शुक्रगुजार रहेंगे क्योंकि उन्होंने उनकी संस्था को समर्थन दिया. लेकिन दरअसल वो दोनों भी मजबूर हैं. वो रहते ही उधर हैं. उन्हें भी पता है कि जुल्म हो रहा है. हालाँकि अफ़रीदी के इस बयान में भी कोई सच नहीं था. पाकिस्तान में आए दिन इस बात की चर्चा होती रहती है कि शाहिद अफ़रीदी राजनीति में आना चाहते हैं. हालाँकि इस बात से अफ़रीदी इंकार करते रहते हैं. शाहिद अफ़रीदी और गौतम गंभीर के बीच मैदान में भी रिश्ते अच्छे नहीं रहे थे. रिश्तों में बेहतरी के किसी भी प्रयास के लिए पहले शाहिद अफ़रीदी को अपने बेतुके बयानों पर लगाम लगानी होगी.

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