मिशन शक्ति को अंजाम देने वाले वैज्ञानिकों को पीएम ने क्यों बोला ‘गब्बर’

भारत ने एक सैटेलाइट को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित सैटेलाइट के बूते आउटर स्पेस में मार गिराने की तकनीक हासिल कर ली है. भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया है.

नई दिल्ली. मिशन शक्ति की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ‘डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन'(डीआरडीओ) को लगातार बधाइयां मिल रही हैं. इसी फेहरिस्त में भारतीय क्रिकेट टीम के ‘गब्बर’ यानी की शिखर धवन ने भी ट्वीट कर पीएम को बधाई दी. धवन के ट्वीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जवाब देने में देरी नहीं की. इस दौरान प्रधानमंत्री ने मिशन को धवन की बल्लेबाजी से जोड़ दिया.

धवन का ट्वीट 
पीएम मोदी के मिशन शक्ति की जानकारी साझा करने के कुछ समय बाद ही शिखर धवन ने बधाई देते हुए ट्वीट किया, “हमारे देश के लिए ये बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि हम एंटी-सैटेलाइट मिसाइल सिस्टम की क्षमता हासिल करने वाले दुनिया के चौथे राष्ट्र बन गए हैं. #MissionShakti के लिए @isro और @narendramodi को बधाई. गर्व का पल!”

प्रधानमंत्री ने दिया जवाब
प्रधानमंत्री मोदी ने इसके जवाब में धवन की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए एक ट्वीट किया. पीएम ने धवन के ट्वीट को क्वोट करते हुए लिखा, “वास्तव में, पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है. जैसे आप ख़राब गेंदों को मैदान के बाहर भेजते हैं, वैसे ही हमारे वैज्ञानिकों ने भारत को उन ताकतों को नष्ट करने की क्षमता दी है, जो हमारी शांति और सद्भाव के लिए खतरा हैं.”

इनकी बधाई का भी पीएम ने दिया जवाब
शिखर धवन के साथ पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, अभिनेता अक्षय कुमार, पैरालम्पिक सिल्वर मेडलिस्ट व अर्जुन अवार्ड विजेता दीपा मलिक, पांडिचेरी की गवर्नर किरण बेदी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर की बधाई का पीएम मोदी ने जवाब दिया.

क्या था मिशन?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश को संबोधित किया था. इस दौरान उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धता से देश को अवगत कराया. भारत ने पृथ्वी की निचली कक्षा में 300 किलोमीटर दूर एक सैटलाइट को ऐंटी-सैटलाइट मिसाइल से मार गिराया है.
27 मार्च, 2019 को भारत ने डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम द्वीप पर स्थित एक लॉन्च कॉम्पलेक्स एक एंटी सैटेलाइट मिसाइल ‘मिशन शक्ति’ का परीक्षण किया. यह डीआरडीओ द्वारा किया गया एक तकनीकी मिशन था. मिशन में उपयोग किया जाने वाला उपग्रह भारत के मौजूदा उपग्रहों में से एक था जो निचली कक्षा में काम कर रहा था. परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा और प्लान के मुताबिक सभी मापदंडों पर सही उतरा. बता दें कि इस परीक्षण के लिए बेहद सटीक और तकनीकी क्षमता की आवश्यकता होती है. इस परीक्षण के साथ ही भारत ने एक सैटेलाइट को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित सैटेलाइट के बूते आउटर स्पेस में मार गिराने की तकनीक हासिल कर ली है. भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया है.