डिप्रेशन के चलते खुद को मारने के लिए तैयार थे प्रवीण कुमार…बच्चों की तस्वीर ने बदल दी जिंदगी

प्रवीण कुमार का कहना है कि अब वह फिर से इस खेल से जुड़ना चाहते हैं और उत्तर प्रदेश टीम के बॉलिंग कोच बनना चाहते हैं.
Praveen Kumar was ready to kill himself due to depression, डिप्रेशन के चलते खुद को मारने के लिए तैयार थे प्रवीण कुमार…बच्चों की तस्वीर ने बदल दी जिंदगी

एक इंटरव्यू में पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार ने कहा कि वह डिप्रेशन से पीड़ित होने के बाद कुछ महीने पहले आत्महत्या करना चाहते थे. लंबे समय तक चयनकर्ताओं द्वारा अनदेखी किए जाने के बाद 2018 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर होने के बाद, प्रवीण कुमार एक बुरे दौर से गुजरे. इस दौरान उन्हें मानसिक समस्याओं और अकेलेपन से संघर्ष करना पड़ा. हालांकि प्रवीण कुमार अब उस दौर से उबर चुके हैं और अपने निजी जीवन को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटे हैं.

प्रवीण कुमार आखिरी बार लगभग 8 साल पहले भारत के लिए खेले थे. उन्होंने आखिरी टी-20 मुकाबला जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था. उस समय प्रवीण कुमार का आईपीएल कॉन्ट्रेक्ट भी खत्म हो गया था. खेल से लगभग पूरी तरह दूर होने के बाद प्रवीण के जीवन में एक ऐसा मौका भी आया जब उन्होंने अपनी जान लेने तक का मन बना लिया था. नवंबर 2019 में एक दिन आधी रात को घर में अकेले थे और उनके हाथ में एक रिवाल्वर थी.

बच्चों की तस्वीर ने बदला ख्याल

प्रवीण ने बताया कि उन्होंने उस समय खुद से कहा, “क्या है ये सब? बस खत्म करते हैं.” प्रवीण ने हरिद्वार जाते वक्त भी रिवॉल्वर से खुद को मारने का मन बनाया था, लेकिन गाड़ी में उन्हें अपने बच्चों की तस्वीर दिख गई और उनके दिमाग से ये ख्याल चला गया. उन्होंने बताया, “मुझे महसूस हुआ कि मैं अपने फूल जैसे बच्चों के साथ ऐसा नहीं कर सकता.”

इस घटना ने प्रवीण कुमार को अपनी मानसिक स्थिति से उबरने में मदद के लिए प्रेरित किया. इसके बाद वह मानसिक चिकित्सा के लिए गए. जल्द ही उन्हें डिप्रेशन का पता चला. प्रवीण कुमार ने कहा कि इस बीमारी को भारत में बड़े पैमाने पर बीमारी ही नहीं माना जाता है. उन्होने कहा, “इंडिया में डिप्रेशन का कन्सेप्ट ही कहां है…मेरठ में तो कोई यह जानता ही नहीं है.”

प्रवीण ने कहा, “मेरे पास कोई बात करने के लिए नहीं था, मैं हमेशा चिड-चिडापान महसूस करता था. मैंने काउंसलर से कहा कि मैं अपने विचारों पर रोक नहीं लगा पा रहा हूं.” उन्होंने कहा, “मेरे पास करने के लिए कुछ नहीं था, मैं कुछ करना चाहता था, लेकिन कर नहीं सकता था. मैं अच्छी बॉलिंग करता था. इंग्लैंड में सब ने मेरी सराहना की थी. मैं टेस्ट करियर के बारे में सोच रहा था. तभी अचानक सब कुछ चला गया.”

बनना चाहता हूं यूपी का बॉलिंग कोच

हालांकि अब प्रवीण अपने उस बुरे दौर से उबर रहे हैं. अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं कि क्रिकेट कोचिंग एक ऐसी चीज है जिसे वह सबसे आगे देख रहे हैं. वह आर्थिक लाभों की तलाश नहीं कर रहे हैं, लेकिन खेल के साथ जुड़े रहने का एक तरीका वह तलाश रहे हैं.

उन्होंने कहा, “यूपी क्रिकेट ने मुझे सब कुछ दिया है. यह मेरा घर है. अपना मारेगा, फिर भी छांव में डालेगा. दूसरा मारेगा तो पता नहीं कहां फेंक देगा. मैंने अपने दोस्तों से कहा कि मैंने अपना पूरा जीवन यूपी में खेला है और मैं यूपी का गेंदबाजी कोच बनना चाहता हूं. मेरे पास युवाओं को सिखाने का कौशल और जुनून है.”

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