राहुल द्रविड़ : टेस्‍ट में खेलीं सबसे ज्‍यादा गेंदें, वनडे में सिर्फ ‘जैमी’ के नाम है ये रिकॉर्ड

राहुल द्रविड़ का क्रिकेट के प्रति डेड‍िकेशन ऐसा है कि रिटायर होने के बाद अब वे क्रिकेटर्स की नई पौध तैयार कर रहे हैं.
Rahul Dravid 47th Birthday, राहुल द्रविड़ : टेस्‍ट में खेलीं सबसे ज्‍यादा गेंदें, वनडे में सिर्फ ‘जैमी’ के नाम है ये रिकॉर्ड

राहुल द्रविड़. एक नाम जिसे क्रिकेट की दुनिया में ‘दीवार’ कहा जाता है. जब हम छोटे थे तो अखबारों में एक शब्‍द छपता था – खूंटागाड़. अधिकतर इसे राहुल द्रविड़ की ख़बरों में ही पढ़ा. द्रविड़ के बारे में एक बार हर्षा भोगले ने कहा था कि ये वो खिलाड़ी है जिससे कप्‍तान अगर अंगारों पर भी चलने को कहेगा तो वो पूछेंगे- कितने किलोमीटर? द्रविड़ का निकनेम ‘जैमी’ है. क्रिकेट के प्रति द्रविड़ का डेड‍िकेशन ऐसा है कि रिटायर होने के बाद अब वे क्रिकेटर्स की नई पौध तैयार कर रहे हैं.

द्रविड़ की बैटिंग तकनीक ऐसी थी कि गेंदबाज परेशान हो जाते थे और वे आउट नहीं होते थे. पूर्व ऑस्‍ट्रेलियाई कप्‍तान स्‍टीव वॉ ने एक बार कहा था कि अगर आप शुरू के 10-15 मिनट में द्रविड़ को आउट नहीं करते तो फिर बाकी के विकेट लेने की कोशिश कीजिए, द्रविड़ अपना विकेट नहीं देंगे.

टेस्‍ट टीम में नंबर 3 पर बैटिंग करने वाले द्रविड़ ने 219 पारियों में 52.88 के औसत से 10,524 रन बनाए. इसमें 28 शतक और 50 अर्द्धशतक शामिल हैं.

Rahul Dravid 47th Birthday, राहुल द्रविड़ : टेस्‍ट में खेलीं सबसे ज्‍यादा गेंदें, वनडे में सिर्फ ‘जैमी’ के नाम है ये रिकॉर्ड

टेस्‍ट क्रिकेट में द्रविड़ के नाम एक अनूठा रिकॉर्ड है जो उनकी शानदार तकनीक की बदौलत ही बन सका. उन्‍होंने टेस्‍ट में दुनिया के किसी और बल्‍लेबाज से ज्‍यादा गेंदें खेली हैं. वह इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्‍होंने वनडे में दो बार 300 से ज्‍यादा रनों की साझेदारियां कीं.

नए बैट से नहीं खेले द्रविड़

पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ थोड़े से अंधविश्‍वासी रहे. वह सचिन तेंदुलकर से उलट दाएं पैर में थाईपैड पहनना पसंद करते थे. साथ ही अंधविश्वास के कारण राहुल कभी भी मैच में नए बल्ले से नहीं खेलते थे.

क्‍लब क्रिकेट से करियर को हुआ फायदा

करीब सालभर पहले एक इवेंट में द्रविड़ ने बताया था कि क्‍लब क्रिकेट से कैसे उन्‍हें फायदा हुआ. तब उन्‍होंने कहा था, “10वीं क्लास का लड़का होकर मैं ड्रेसिंग रूम में गया था. उस समय रोजर बिन्नी मेरे कप्तान थे. जब बिन्नी और सैयद किरमानी सर ने 1983 में विश्व कप जीता था, तब में सिर्फ 10 साल का था. तीन-चार साल बाद 1989-90 में मैं इन लोगों के साथ क्लब क्रिकेट खेल रहा था. यह मेरे लिए काफी प्ररेणा वाली बात थी. इससे मेरे क्रिकेट करियर को काफी फायदा हुआ.”

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