भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना चाहती हैं ये कश्मीरी लड़कियां

कश्‍मीर के अलग-अलग गांव से निकली इन महिला क्रिकेटर्स के इरादे एकदम पक्‍के हैं.
Kashmiri Women Cricketers, भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना चाहती हैं ये कश्मीरी लड़कियां

कश्मीर में कुछ युवा लड़कियां भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का सपना देख रही हैं. श्रीनगर के जम्‍मू-कश्‍मीर क्रिकेट असोसिएशन की ये लड़कियां अंडर-19, अंडर-23 और महिला सीनियर क्रिकेट टीम में शामिल होने का सपना लिए सलेक्‍शन ट्रायल के लिए गुरुवार को जम्‍मू पहुंचीं. सिलेक्शन ट्रायल के लिए होने वाले मैच 14 अक्‍टूबर से शुरू होंगे.

कश्‍मीर के अलग-अलग गांव से निकली इन महिला क्रिकेटर्स के इरादे एकदम पक्‍के हैं. इन लड़कियों में बिस्‍माह हसन, इकरा रसूल जैसी कई लड़कियां शामिल हैं जो कि साधारण परिवारों से आईं हैं. ये सभी भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनना चाहती हैं और देश के लिए खेलना चाहती हैं.

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद घाटी में कानून-व्‍यवस्‍था में टाइट कर दी गई थी. घाटी में लगी बंदिशें के बावजूद इन लड़कियों का हौंसला नहीं टूटा और इन्होंने अपनी क्रिकेट प्रैक्टिस जारी रखी.

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रायल में शामिल होने आईं बिस्‍माह हसन ने बताया की उन्होंने घाटी में धारा 144 लागू होने के बाद भी अपनी ट्रेनिंग जारी रखी. वे अपने घर के पुरुष सदस्‍यों के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस करती थीं. बिस्माह अपने ट्रायल्स के लिए बहुत उत्साहित हैं. सौरा इलाके से आने वाली बिस्माह के पिता पेसे से एक मिस्त्री हैं.

बिस्माह की ही तरह इकरा रसूल भी साधारण परिवार से आती हैं. रसूल अपने पिता के साथ उनकी दुकान में उनका हाथ बंटाती हैं. उन्होंने हाल ही में कोलकाता में हुए मैचों में अपने प्रदर्शन से जम्‍मू-कश्‍मीर की अंडर-19 और अंडर-23 टीम में अपनी जगह पक्‍की की थी. रसूल ने बताया कि उन्हें कोलकाता में ट्रेनिंग के लिए ऑस्‍ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्‍लार्क ने चुना था.

जम्‍मू से आने वाली इन लड़कियों से जम्‍मू-कश्‍मीर क्रिकेट की हेड कोच रुपाली को बेहद उम्मीदे हैं. रुपाली 2006 में टीम इंडिया के लिए खेल चुकी हैं.

 

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