क्या थे वो तीन शब्द जिनकी बदौलत आज ही के दिन 1983 में विश्व चैंपियन बनी थी Team India

1983 वर्ल्ड कप (1983 World Cup) जीत की तस्वीरें हम सभी के जेहन में अब भी ताजा हैं. मैच खत्म होने के बाद भारतीय टीम जब वेस्टइंडीज (West Indies) के खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम में पहुंची तो कई खिलाड़ी वाकई रो रहे थे.
three words who made India 1983 world cup champion, क्या थे वो तीन शब्द जिनकी बदौलत आज ही के दिन 1983 में विश्व चैंपियन बनी थी Team India

ये उन दिनों की बात है जब वनडे मैच 60 ओवरों का हुआ करता था और टी-टाइम (चायकाल) भी हुआ करता था. टी टाइम पर जब मोहिंदर अमरनाथ और यशपाल शर्मा ड्रेसिंग रूम पहुंचे तो पूरी टीम का मुंह बना हुआ था. अमरनाथ समझ गए कि खिलाड़ी उनकी सुस्त बल्लेबाजी से नाराज हैं.

अमरनाथ (Mohinder Amarnath) ने तुरंत कप्तान कपिल देव (Kapil Dev) को जाकर बताया कि वो बिल्कुल फिक्र ना करें उन्हें पता है कि वो क्या कर रहे हैं. अमरनाथ का कहना था कि वो सिर्फ इतना चाहते थे कि टी-टाइम तक टीम का कोई और विकेट ना गिरे. टी-टाइम के बाद जब मोहिंदर अमरनाथ और यशपाल शर्मा दोबारा क्रीज पर आए तो मैच बदला बदला सा दिखने लगा. मोहिंदर अमरनाथ ने इयान बॉथम की गेंद को सीधा बाउंड्री पार भेजा और यशपाल शर्मा ने बॉब विलिस को पसीने छुड़ा दिए.

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अमरनाथ जब आउट हुए तो भारत को जीत के लिए 75 रनों की और जरूरत थी और अच्छे खासे ओवर बचे हुए थे. जब वो ड्रेसिंग रूम में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि खिलाड़ियों के चेहरे पर मुस्कान थी. अमरनाथ के आउट होने के बाद संदीप पाटिल मैदान में आए थे, उन्होंने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की और सिर्फ 32 गेंदों पर 51 रन जड़ दिए. भारत की जीत अब पक्की थी, विनिंग शॉट भी पाटिल के बल्ले से ही निकला. मोहिंदर अमरनाथ को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच दिया गया. उन्होंने 46 रन बनाने के साथ साथ 2 विकेट भी लिए थे.

अमरनाथ से हो गई एक गलती, टीम हुई नाराज

सेमीफाइनल जीतने के बाद मोहिंदर अमरनाथ से फिर एक गलती हो गई जिससे बाकी टीम नाराज थी. दरअसल, विश्व कप (World Cup) के फाइनल मैच से पहले ये तय हुआ था कि भारतीय टीम सुबह के समय ही नेट्स कर लेगी जिससे शाम का वक्त ‘फ्री’ रहे और खिलाड़ी आराम कर सकें. कप्तान और उप कप्तान को ‘सिंगल रूम’ मिला था. सिंगल रूम होने के बाद भी मोहिंदर अमरनाथ को जमीन पर सोना पड़ता था क्योंकि उनकी पत्नी और बेटी भी साथ ही रहते थे. जिमी बताते हैं कि उन्हें इंग्लैंड के होटल्स के मुलायम गद्दों से ज्यादा अच्छी नींद जमीन पर आती है. खैर, हुआ यूं कि प्रैक्टिस वाली सुबह मोहिंदर अमरनाथ की नींद नहीं खुली. जब आंख खुली तो देखा कि सभी खिलाड़ी प्रैक्टिस के लिए मैदान जा चुके हैं.

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एक और खिलाड़ी ने दोहराई गलती

अमरनाथ जल्दी जल्दी तैयार हुए, आपको जानकर ताज्जुब होगा कि देर से जागने वालों में टीम का एक और खिलाड़ी था, वो खिलाड़ी थे खुद कप्तान कपिल देव. कपिल और जिमी दोनों जल्दी जल्दी स्टेडियम पहुंचे, वहां साथी खिलाडियों के चेहरे बता रहे थे कि वो नाराज हैं. कपिल और जिमी दोनों के लिए भी ये शर्मनाक था कि जिंदगी के सबसे बड़े मैच से पहले वो देर तक सोते रहे. खैर, इस मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई, बस इतना तय हुआ कि सेमीफाइनल वाली टीम ही फाइनल में मैदान पर उतरेगी. उसी दिन की बात है जब नेट्स से पहले पवेलियन की तरफ जाते वक्त विवियन रिचर्ड्स ने मोहिंदर अमरनाथ से कहा था कि उनकी टीम भारत के फाइनल में पहुंचने पर बहुत खुश है.

183 रन पर ऑलआउट हो गई टीम इंडिया

खैर, फाइनल का दिन भी आ गया, जोएल गार्नर श्रीकांत (Srikkanth) को लगातार बाउंसर फेंक रहे थे. श्रीकांत ने इससे बचने का तरीका निकाला, उन्होंने मोहिंदर अमरनाथ से कहा कि कि जोएल गार्नर की ज्यादा से ज्यादा गेंदों का सामना वो करें. जिमी ने ऐसा ही किया, दोनों के बीच ठीक ठाक साझेदारी हुई. श्रीकांत ने मुश्किल विकेट पर खतरनाक गेंदबाजों के सामने 38 रनों की अहम पारी खेली, जो भारत की तरफ से सबसे ज्यादा स्कोर था. उनको वेस्टइंडीज के खिलाड़ी वैसे भी ‘मैड मैन’ कहते थे, लेकिन भारतीय टीम सिर्फ 183 रन पर ऑल आउट हो गई थी. दिलचस्प बात ये है कि उस मैच में जोएल गार्नर ने मैल्कम मार्शल, माइकल होल्डिंग और एंडी रॉबर्ट्स से भी ज्यादा किफायती गेंदबाजी की थी.

वो तीन शब्द, जिससे जीता भारत

गेंदबाजी की बारी अब भारत की थी, लंच पर भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने एक साथ सिर्फ एक लाइन कही- लेट्स डू इट. सुनील गावस्कर ने टीम के सीनियर खिलाड़ी होने के नाते ये जरूर कहा कि चलो जवानों, लड़ेगे. इन दो वाक्यों ने 11 ऐसे जवानों को मैदान में उतारा जिन्होंने इतिहास रच दिया. वर्ल्ड कप जीत (1983 World Cup Champion) की तस्वीरें हम सभी के जेहन में अब भी ताजा हैं. मैच खत्म होने के बाद भारतीय टीम जब वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम में पहुंची तो कई खिलाड़ी वाकई रो रहे थे. वहीं भारतीय टीम ने शैपेंन की ढेरों बोतलें भी देखीं जो इस उम्मीद के साथ ड्रेसिंग रूम में रखी गई थीं कि जीत के बाद जश्न मनाने के काम आएंगी. फाइनल में भी मोहिंदर अमरनाथ को मैन ऑफ द मैच दिया गया, उन्होंने 26 रन बनाने के साथ साथ 3 विकेट भी लिए थे. जाहिर है कपिल और जिमी की नींद ना खुलने पर खिलाड़ियों की नाराजगी दूर हो चुकी थी. भारत इतिहास रच चुका था.

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