9 साल बाद विराट कोहली ने किया खुलासा- विश्व कप जीतने के बाद सचिन को कंधे पर क्यों बिठाया गया था

विराट कोहली (Virat Kohli) ने मयंक अग्रवाल (Mayank Agrawal) के साथ बातचीत में बताया, “सबसे पहले तो खुशी इस बात की थी कि विश्व कप हमने जीत लिया है. लेकिन हर किसी की सोच के केंद्र में सचिन पाजी ही थे.
sachin tendulkar world cup 2011, 9 साल बाद विराट कोहली ने किया खुलासा- विश्व कप जीतने के बाद सचिन को कंधे पर क्यों बिठाया गया था

तारीख थी- 2 अप्रैल 2011. भारत ने श्रीलंका को हराकर विश्व कप का खिताब जीता था. 1983 के बाद ये पहला मौका था जब भारत को विश्व कप का खिताब मिला था. यानी भारतीय क्रिकेट फैंस ने इस कामयाबी के लिए करीब 28 साल का इंतजार किया था.

ये इंतजार एक खिलाड़ी ने भी किया था. वो खिलाड़ी थे- सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar). जिनके खाते में विश्व क्रिकेट के तमाम रिकॉर्ड्स, तमाम कामयाबियां थी लेकिन नहीं था तो बस विश्व कप. 2011 का विश्व कप (2011 World Cup) पूरी टीम ने सचिन तेंदुलकर के लिए खेला था.

आप उस दौरान किसी भी भारतीय खिलाड़ी का इंटरव्यू निकाल कर देख लीजिए वो यही कहता पाया जाएगा कि विश्व कप सचिन के लिए जीतना है. ऐसा इसलिए था क्योंकि व्यवहारिक तौर पर उसी वक्त ये दिख रहा था कि सचिन तेंदुलकर का ये आखिरी विश्व कप है.

हर किसी के लिए विश्व कप जीतने के बाद का लम्हा भावुक था. सचिन के लिए खास तौर पर. इसी दौरान टीम के खिलाड़ियों ने उन्हें कंधे पर बिठा लिया था. अब 9 साल बाद विराट कोहली (Virat Kohli) ने बताया कि टीम के खिलाड़ियों ने ऐसा क्यों किया?

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 सचिन के लिए था वो विश्व कप

विराट कोहली ने मयंक अग्रवाल (Mayank Agarwal) के साथ बातचीत में बताया, “सबसे पहले तो खुशी इस बात की थी कि विश्व कप हमने जीत लिया है. लेकिन हर किसी की सोच के केंद्र में सचिन पाजी ही थे. हम जानते थे कि ये उनका आखिरी विश्व कप है. उन्होंने देश के लिए इतना कुछ किया है.

भारत की जीत में उन्होंने कई बार योगदान दिया था. वो हमारे लिए प्रेरणा रहे हैं. ये हम सभी की तरफ से उनके लिए तोहफा था. क्योंकि उन्होंने तो हमेशा देश को दिया है. फिर उस पर से ये जीत हमें उनके होम ग्राउंड पर मिली थी. लिहाजा हमने ये तय किया कि ‘विक्ट्री लैप’ लेंगे और उस दौरान हमने सचिन पाजी को कंधे पर बिठा लिया”.

फाइनल में नहीं चला था सचिन का बल्ला

ये भी एक संयोग ही था कि पूरे टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले सचिन का बल्ला फाइनल में नहीं चला था. सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ भी सचिन ने सबसे ज्यादा रन बनाए थे. फाइनल में 275 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए वो सिर्फ 18 रन बनाकर आउट हो गए थे.

मलिंगा ने उनका विकेट लिया था. 31 रन के स्कोर पर सहवाग और सचिन के आउट होने के बाद टीम की भारतीय जीत की उम्मीदें कमजोर हुई थीं. लेकिन पहले गौतम गंभीर और फिर धोनी ने शानदार पारियां खेलकर टीम को जीत दिलाई थी. सचिन का सपना भी उसी रोज पूरा हुआ था.

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