टीम इंडिया की भगवा जर्सी पर ओछी राजनीति क्यों?

भारतीय टीम भी इंग्लैंड के खिलाफ नारंगी रंग की जर्सी पहनकर मैदान में उतर सकती है. जाहिर है इससे टीम की परफॉर्मेंश पर कोई असर नहीं पड़ेगा. न ही उन्हें चाहने वाले करोड़ों दर्शकों के समर्थन में कोई कमी आएगी.

नई दिल्ली: भारतीय टीम वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले में भगवा रंग की जर्सी में नजर आ सकती है. इस खबर के सामने आते ही भगवा रंग को लेकर देशभर में ओछी राजनीति शुरू हो गई है. कई लोग इसे मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार से जोड़ कर भगवा राजनीति का एंगल दे रहे हैं. जबकि जर्सी का रंग बदलने से न ही रोहित शर्मा के बल्लों से रन निकलना कम होंगे न ही जसप्रीत बुमराह की धारदार गेंदबाजी की धार कम होगी.

राजनीति पर आने से पहले नियमों की बात करते हैं. दरअसल क्लॉथिंग एंड इक्विपमेंट के नियम E के मुताबिक आईसीसी के वनडे मैचों में मैदान पर मौजूद टीमों की जर्सी के रंग अलग-अलग होने चाहिए. ऐसे में टीम को होम और अवे मैचों के लिए दो रंगों का ऐलान टूर्नामेंट के पहले ही करना होगा. अगर दोनों टीमों की जर्सी का रंग एक जैसा ही है, तो जो मेहमान टीम को अपनी दूसरे रंग की जर्सी पहननी होगी.

कौन कर रहा है जर्सी पर शियासत?

नियम के मुताबिक होम या मेजबान टीम को अपनी नियमित जर्सी पहनने में वरीयता दी जाएगी. जैसा कि 30 जून को होने वाला है. इंग्लैंड और भारत की जर्सी का रंग (नीला) एक जैसा ही है. चूंकी भारत मेहमान देश है इसलिए भारत को अपनी दूसरे रंग की जर्सी पहननी होगी. जिसका रंग नारंगी है. अब आते हैं इस रंग पर छिड़े विवाद पर.

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने रंग चुनने का दोष मोदी सरकार पर मढ़ा है. महाराष्ट्र विधानसभा में मुस्लिम विधायकों ने नारंगी जर्सी का विरोध किया है. क्रिकेट में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जबकि इसको लेकर राजनेताओं ने अपने निजी हित साधने का प्रयास किया है.

क्या जर्सी का रंग बदलने से खराब हो जाएगा खिलाड़ियों का प्रदर्शन?

भारतीय क्रिकेट टीम पर प्रतिक्रिया देने वाले खेल के नियमों से भले ही अवगत न हों लेकिन रंग को देखकर खेल पर प्रतिक्रिया देने में पहली लाइन में नजर आते हैं. भारतीय जर्सी को डिजाइन करने वाले अमेरिकी डिजाइनर के मुताबिक जर्सी में पहले से ही नारंगी रंग का उपयोग होता रहा है इसलिए नारंगी रंग का प्रयोग किया जा रहा है ताकि दर्शकों को देखने में ये पहले से अलग न लगे.

2011 में भी भारतीय जर्सी पर नीले के अलावा जो रंग थे उनमें ज्यादातर हिस्सा नारंगी ही था, लेकिन तब ये मुद्दा सवालों के घेरे में नहीं आया. इससे पहले 1996 और 1999 में तो जर्सी पर नीले के अलावा पीला रंग हुआ करता था. यह मुद्दा तब भी राजनीति का मुद्दा नहीं बना. अब ये भी बता दें कि भारत पहली टीम नहीं है जो इस नारंगी रंग को पहनेगी. नीदरलैंड की टीम भी इस जर्सी का उपयोग करती रही है, लेकिन वो कभी विवाद का मुद्दा नहीं बना.

वर्ल्ड कप में ये टीमें भी बदल चुकी हैं जर्सी के रंग

अब नियमों के आधार पर अन्य देशों की जर्सी देखें तो जर्सी के रंगों की अदला-बदली पाकिस्तान और बांग्लादेश के मैच में भी दिखेगी. जिसमें बांग्लादेश भी हरे की जगह लाल रंग की जर्सी पहनकर मैदान में पाकिस्तान के खिलाफ खेलती दिख सकती है. साउथ अफ्रीका और अफगानिस्तान भी इस टूर्नामेंट में अपनी जर्सी का रंग बदलकर खेल चुके हैं. इससे उनके खेल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.

जाहिर है भारतीय टीम का भी नारंगी रंग की जर्सी पहनने से परफॉर्मेंश पर कोई असर नहीं पड़ेगा. न ही उन्हें चाहने वाले करोड़ों दर्शकों के समर्थन में कोई कमी आएगी. हां, इसपर राजनीति चमकाने की कोशिश में जुटे नेतागण शायद अपनी टीवी बंद कर विरोध की कोशिश जरूर करेंगे. शायद इस विरोध प्रदर्शन में वो भी एक दूसरे से छिपते-छिपाते मैच का स्कोर पूंछते हुए जरूर दिख सकते हैं.

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