भारतीय टीम जब जीतेगी तब समझ आएगा आखिर क्यों विराट को नहीं तिहरे शतक का लालच?

विराट 253 रन बनाकर नाबाद थे. दूसरे छोर पर जडेजा अपने शतक के करीब पहुंच चुके थे. जडेजा जैसे ही 91 रन बनाकर आउट हुए विराट ने 601 के स्कोर पर भारत की पारी घोषित कर दी.

विराट कोहली एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं, इसमें कोई शक नहीं. लेकिन विराट ने जिस तरह पुणे टेस्ट में अपने तिहरे शतक बनाने के मौके का त्याग किया. उसके बाद एक कप्तान के तौर पर पूरा विश्व उनका मुरीद हो गया.

कप्तान कोहली का विराट त्याग, जीत के आगे तिहरा शतक कुर्बान

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने पुणे में अपने टेस्ट करियर का पहला तिहरा शतक लगाने का मौका भारत की जीत के लिए कुरबान कर दिया. ये पहला मौका था जब विराट ट्रिपल सेंचुरी लगा सकते थे. विराट फॉर्म में थे.. उनके बल्ले से रनों की बारिश थम नहीं रही थी, लेकिन कोहली ने अपने नाबाद दोहरे शतक को तिहरे शतक में तबदील करने की बजाए पारी घोषित करना ज्यादा मुनासिब समझा.

विराट 253 रन बनाकर नाबाद थे. दूसरे छोर पर जडेजा अपने शतक के करीब पहुंच चुके थे. जडेजा जैसे ही 91 रन बनाकर आउट हुए विराट ने 601 के स्कोर पर भारत की पारी घोषित कर दी. तमाम क्रिकेट पंडित अनुमान लगा रहे थे कि दस महीने बाद टेस्ट में शतक का सूखा खत्म करने वाले विराट पुणे में तिहरा शतक जड़ेंगे. लेकिन कोहली के दिमाग में सिर्फ एक लक्ष्य था.. भारत की जीत.

पहले भी ऐसा कर चुके हैं विराट

साल 2016 में भी विराट कोहली ऐसा कर चुके हैं. तब भारतीय टीम ने मुंबई में इंग्लैंड को पारी और 36 रनों के बड़े अंतर से हराया था. विराट कोहली ने उस टेस्ट मैच में भी शानदार दोहरा शतक जड़ा था. उस जीत के बाद विराट कोहली ने कहा था कि टेस्ट टीम की कप्तानी संभालने के बाद उन्होंने साथी खिलाड़ियों के साथ ‘कम्यूनिकेशन’ पर काफी ध्यान दिया.

तीन साल पहले विराट की टीम इंडिया को सीख

विराट ने खिलाड़ियों को समझाया कि टेस्ट क्रिकेट में कई बार मैदान में कुछ समय ऐसा मिलता है जब आप अपनी काबिलियत से मैच का रूख अपनी टीम की तरफ मोड़ सकते हैं, लेकिन आप ऐसा इसलिए नहीं करते क्योंकि आपको अपना कोई व्यक्तिगत रिकॉर्ड दिख रहा होता है. अगर उस वक्त उस व्यक्तिगत उपलब्धि की फिक्र किए बिना टीम के लिए खेला जाए तो कामयाबी निश्चित तौर पर मिलेगी. विराट ने ये भी कहाकि वो इस सोच को खिलाड़ियों के दिमाग से निकालने में कामयाब हुए हैं.

आज 3 साल बाद विराट ने फिर यही बात साबित की. उन्होंने अपने गेंदबाजों को इतना वक्त दिया है कि वो एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका के बीस विकेट लेकर टीम को दूसरे टेस्ट में भी जीत दिलाएं. विराट कोहली ने पुणे टेस्ट में अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि पर टीम हित को रखा. उससे बाद विश्व क्रिकेट में उनका कद और भी बढ़ गया है. भारत के पास विराट के तौर पर ऐसा कप्तान है जिसका सिर्फ एक ही टागरेट है जीत.. और जीत से कम कुछ भी विराट को मंजूर नहीं. चाहे उसके लिए विराट को कोई भी कुर्बानी देनी पड़े विराट उसके लिए तैयार हैं.

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