क्या पाकिस्तान जाने की हिम्मत कर पाएगी श्रीलंका की टीम?

श्रीलंका अपनी टीम की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता. पाकिस्तान का जो हाल है, उसमें कोई भी विदेशी टीम या खिलाड़ी वहां खेलना नहीं चाहता.

श्रीलंका के पाकिस्तान दौरे पर संकट के बादल अब भी बरकरार हैं. श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने साफ-साफ कहा कि उन्हें आतंकी हमले को लेकर इनपुट मिले हैं और वो टीम की सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं उठा सकते. श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने सरकार से सुरक्षा का आंकलन करने के बाद ही दौरे पर लेकर अंतिम फैसला लेने को कहा है. इस बीच श्रीलंका बोर्ड ने पाकिस्तान के प्रस्तावित दौरे को लेकर टीम का एलान भी कर दिया है. श्रीलंका के 10 खिलाड़ियों के पाकिस्तान दौरे पर जाने से इनकार के बाद नई टीम का एलान किया गया है.

ये पूरा घटनाक्रम और गंभीर तब हो गया जब श्रीलंका सरकार ने खुलासा किया कि उन्हें अपनी टीम पर संभावित आतंकी हमले की खबर मिली है. टीम को दो हफ्ते से भी कम से समय में पाकिस्तान के दौरे पर जाना था. लेकिन आतंकियों को पनाह देने वाले देश पाकिस्तान में कोई खिलाड़ी नहीं जाना चाहता.

पाकिस्तान के भरोसा देने के बाद भी श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड पाकिस्तान में क्रिकेट सीरीज खेलने को लेकर अभी अंतिम फैसला करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने सरकार से पाकिस्तान में खिलाड़ियों के सुरक्षा हालात को दोबारा आंकने में मदद मांगी है.

कमजोर हो गई है श्रीलंका की टीम

श्रीलंका , पाकिस्तान जाने के फैसले से पहले फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहता है. अपनी टीम की सुरक्षा को लेकर बोर्ड कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता. पाकिस्तान का जो हाल है, उसमें कोई भी विदेशी टीम या खिलाड़ी वहां खेलना नहीं चाहता. श्रीलंका की वन डे टीम के कप्तान दिमुथ करुणारत्ने और टी-20 टीम के कप्तान लसिथ मलिंगा सहित टीम के 10 खिलाड़ी पहले ही पाकिस्तान दौरे पर जाने से इनकार कर चुके हैं. 10 खिलाड़ियों के इनकार के बाद श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने एक नई और सेकंड लाइन अप टीम चुनी है. नई वन टीम की कमान लाहिरू थिरुमाने को सौंपी गई है, जबकि टी-20 टीम का कप्तान दासुन शनाका को बनाया गया है.

पाकिस्तान के दौरे में श्रीलंका को कराची में 3 वन डे मैचों की सीरीज खेलनी है. इसके अलावा लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में तीन टी-20 मैचों की सीरीज भी होनी है. 27 सितंबर से कराची में 3 वन डे मैचों की सीरीज खेली जानी है. जबकि 5 अक्टूबर से 3 टी-20 मैचों की सीरीज होनी है.

इससे पहले पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी ने आरोप लगाया था कि श्रीलंकाई खिलाड़ियों के पाकिस्तान ना जाने के पीछे भारत का हाथ है. लेकिन उनके इस बेवजह आरोप का जवाब भी जल्दी ही आ गया था. श्रीलंका के खेल मंत्री ने पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए कहा था कि उन पर भारत का कोई दबाव नहीं है बल्कि उनकी टीम को आतंकियों का डर है .

दरअसल , श्रीलंका के खिलाड़ी साल 2009 में पाकिस्तान दौरे को अब भी नहीं भूले हैं, उन्हें आतंकियों के हमले का खौफ है. साल 2009 में पाकिस्तान दौरे में लाहौर टेस्ट के तीसरे दिन 3 मार्च को आतंकियों ने श्रीलंका की क्रिकेट टीम की बस पर हमला कर दिया था, जिसमें 6 खिलाड़ी बुरी तरह घायल हो गए थे. श्रीलंका की टीम लाहौर में होटल से स्टेडियम के लिए निकली थी, उसी दौरान आतंकियों ने हमला कर दिया था, श्रीलंका की टीम को किसी तरह स्टेडियम से हेलिकॉप्टर के जरिए बाहर निकाला गया था, इस हमले के तुरंत बाद श्रीलंका बोर्ड ने पाकिस्तान का दौरा रद्द कर दिया था.

पिछले 10 सालों में सिर्फ जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज की टीम ही पाकिस्तान जाने के लिए तैयार हुई. साल 2017 में श्रीलंका की टीम ने भी एक मैच लाहौर में खेला था. पिछले 10 साल में सिर्फ 12 मैच पाकिस्तान में खेले गए. पाकिस्तान को अब समझना होगा कि अगर वो अपने मुल्क में क्रिकेट सीरीज कराना चाहता है तो उसे आतंक के खिलाफ पहले खुद को खड़ा करना होगा. वरना पाकिस्तान के कोरे भरोसे पर कोई भी देश उस मुल्क में खेलने का जोखिम नहीं उठा सकता.

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