IPL की स्पॉन्सरशिप से चीनी कंपनी का हटना तय, लोगों की नाराजगी मोल लेने का खतरा नहीं उठाएगा BCCI

‘वीवो’ ने 2199 करोड़ रुपए में ये स्पॉन्सरशिप ख़रीदी थी. 2017 में शुरू हुए इस करार की मियाद पांच साल के लिए थी. ऐसे में दो साल पहले ही स्पॉन्सरशिप का करार खत्म किया जाना तय है.
withdrawal of Chinese company from IPL, IPL की स्पॉन्सरशिप से चीनी कंपनी का हटना तय, लोगों की नाराजगी मोल लेने का खतरा नहीं उठाएगा BCCI

चीन को लेकर देश भर में चल रहे विरोध का असर अब IPL पर भी पड़ेगा. IPL की स्पॉन्सरशिप से चीनी कंपनी का हटना तय है. IPL की टाइटिल स्पॉन्सर मोबाइल बनाने वाली एक कंपनी ‘वीवो’ है. इससे पहले 2 अगस्त को IPL की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के बाद ये खबर आई थी कि चीन की कंपनी ‘वीवो’ ही IPL की स्पॉन्सर होगी. बल्कि BCCI की तरफ से जो ईमेल आया था उसमें भी IPL के टाइटिल स्पॉन्सर के तौर पर ‘वीवो’ का ही नाम था.

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इस खबर के आते ही BCCI के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया था. कई ऐसे संगठन हैं जो खुलकर इस मुद्दे पर BCCI का विरोध कर रहे थे. इसी बीच मंगलवार को दोपहर बाद ये खबर आई कि IPL कि टाइटिल स्पॉन्सरशिप अब चीनी कंपनी के पास नहीं रहेगी. ‘वीवो’ ने 2199 करोड़ रुपए में ये स्पॉन्सरशिप ख़रीदी थी. 2017 में शुरू हुए इस करार की मियाद पांच साल के लिए थी. ऐसे में दो साल पहले ही स्पॉन्सरशिप का करार खत्म किया जाना तय है.

जोर शोर से चल रहा है चीन का विरोध

पूरे देश में इन दिनों चीन के बायकॉट की मांग जोर शोर पर है. सरकार की तरफ से कई चाइनीज मोबाइल एप को बैन किया गया है. इसके अलावा और भी कई तरीके से चीन को अलग थलग करने की कोशिशे हुई हैं. देश के आम लोगों में भी चीन को लेकर जबरदस्त नाराजगी है. लोग चीन के बनाए तमाम उत्पादों के इस्तेमाल से बच रहे हैं.

ऐसे वक्त में IPL के साथ चीन की कंपनी के जुड़े रहने पर निश्चित ही बवाल होता. लिहाजा ये मामला IPL की गवर्निंग काउंसिल या BCCI से आगे निकलकर सरकार के पाले में जाना तय था. इन्हीं बातों के मद्देनजर वीवो से रिश्ता तोड़ने का फैसला लिया गया है.

फ्रेंचाइजी मालिकों में बढ़ी चिंता

IPL के फ्रेंचाइजी मालिकों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है. उन्हें पहले ही टिकटों की बिक्री से होने वाली कमाई का नुकसान होना तय था. अगले कुछ घंटे में IPL की स्पॉन्सरशिप को लेकर घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है. IPL गवर्निंग काउंसिल और वीवो के बीच भी अभी सहमति बनानी होगी. 2199 करोड़ की स्पॉन्सरशिप का सीधा मतलब है कि हर साल के करीब 440 करोड़. इस रकम को कैसे ‘एडजस्ट’ करना है ये देखना होगा.

साथ ही नए स्पॉन्सर की तलाश करनी होगी. इतनी बड़ी रकम के एक स्पॉन्सर को ढूंढना आसान नहीं होगा. क्योंकि कोरोना की वजह से मंदी का दौर हर किसी के सामने है. वीवो के अलावा भी अलग-अलग क्षमताओं में कई कंपनियां इंडियन प्रीमियर लीग के साथ जुड़ी हुई हैं. जो IPL की ऑफिशियल पार्टनर भी है. इसमें स्विगी, पेटीएम और ड्रीम इलेवन जैसी चीन से संबंधित कंपनियां शामिल हैं.

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