दुनिया के सबसे कामयाब टेस्ट गेंदबाज ने बताया महेंद्र सिंह धोनी क्यों हैं शानदार कप्तान

श्रीलंका के पूर्व खिलाड़ी मुथैया मुरलीधरन भी धोनी की कप्तानी के दीवाने हैं. मुरलीधरन का कहना है कि धोनी अपने गेंदबाजों की हर अच्छी गेंद की तारीफ करते हैं फिर चाहे उसपर विकेट मिले या छक्का लगे.
muttiah muralitharan on MS Dhoni, दुनिया के सबसे कामयाब टेस्ट गेंदबाज ने बताया महेंद्र सिंह धोनी क्यों हैं शानदार कप्तान

IPL के ऐलान के साथ ही सबसे ज्यादा चर्चा धोनी को लेकर है. करीब एक साल तक मैदान से गायब धोनी भी अब दिखने लगे हैं. रांची में उनके इनडोर प्रैक्टिस की खबर कुछ दिन पहले ही आई थी. इस IPL में धोनी पर करोड़ों क्रिकेट फैंस की नजर रहेगी. धोनी की नजर भी इसी बात पर होगी कि वो धमाकेदार वापसी करें. वो एक बार फिर चेन्नई सुपर किंग्स को खिताब जीताना चाहेंगे.

धोनी की कप्तानी ऐसी है जिसने बहुत से खिलाड़ियों के दिल भी जीते हैं. उनमें एक नाम श्रीलंका के पूर्व खिलाड़ी मुथैया मुरलीधरन का भी है, जो धोनी की कप्तानी के दीवाने हैं. मुरलीधरन का कहना है कि धोनी अपने गेंदबाजों की हर अच्छी गेंद की तारीफ करते हैं फिर चाहे उसपर विकेट मिले या छक्का लगे.

कप्तान धोनी अकेले में बताते हैं खिलाड़ियों को उनकी कमियां

महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी की चर्चा कोई नई बात नहीं है. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 2007 टी-20 विश्व कप जीता, 2011 विश्व कप अपने नाम किया और भी कई बड़ी उपलब्धियां कैप्टन कूल के नाम रहीं. वैसे ही IPL में भी धोनी की कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स तीन बार खिताब अपने नाम कर चुका है.

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मुरलीधरन ने बताया है धोनी एक सफल कप्तान क्यों हैं? मुथैया मुरलीधरन ने कहा कि – ‘धोनी एक अच्छी गेंद पर छक्का पड़ने पर भी ताली बजाते हैं. वो गेंदबाज को बताते हैं कि ये अच्छी गेंद थी चाहे उसपर छक्का ही क्यों ना लगा हो. बल्लेबाज के पास भी कौशल होता है. इस तरह की हौसला अफजाई के साथ-साथ, जब कोई खिलाड़ी गलती करता है वो अकेले में उसे बताते हैं कि क्या करने की जरूरत है, ना कि लोगों के बीच में किसी पर गुस्सा करते हैं. इन्हीं वजहों से धोनी एक सफल कप्तान हैं’.

‘धोनी गेंदबाज को फील्ड सेट करने का मौका देते हैं’

आज धोनी की उम्र 39 साल हो चुकी है. लेकिन जिस वक्त उन्होंने टीम इंडिया की कमान संभाली थी उस वक्त वो करीब 26 साल के थे. लेकिन कम अनुभव के बावजूद धोनी जीत हासिल करने की कला जानते थे.

मुरलीधरन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि निश्चित तौर पर धोनी उस वक्त एक युवा कप्तान थे. उन्होंने 2007 टी-20 विश्व कप में कप्तानी की और खिताब जीता था. लेकिन उनकी सिद्धांतों को गौर से देखें तो वो बहुत अच्छे लगते हैं. क्योंकि वो गेंदबाज को गेंद देते हैं और कहते हैं आप खुद फील्ड सेट करके गेंदबाजी करो. अगर ये तरीका नहीं चलता, तब वो गेंदबाज से पूछते हैं कि क्या वो फील्ड सेट करें’. धोनी की कप्तानी का ये तरीका उनके खिलाड़ियों को काफी सहज रखता है.

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