Bihar Assembly Election 2020: क्या मोकामा से पांचवीं बार विधायक बनेंगे बाहुबलि नेता अनंत सिंह

बेउर जेल में एके 47 रखने की सजा काट रहे अनंत सिंह ( anant singh) कभी नीतीश कुमार ( nitish kumar) के बेहद खास रहे और जेडीयू से चुनाव लड़कर मोकामा ( mokama assembly seat ) में जीतते रहे हैं. 2015 में अनंत सिंह के खिलाफ लालू ने मोर्चा खोल रखा था पर अब राजद के टिकट पर ही अनंत सिंह चुनाव लड़ रहे हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 5:21 pm, Fri, 9 October 20

पटना जिले में पड़ने वाली मोकामा सीट का नाम सुनते ही बाहुबली अनंत सिंह का नाम याद आ जाता है. एक बार फिर अनंत सिंह इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. पिछला चुनाव उन्होंने जेडी यू के टिकट पर लड़ा था. इस बार राष्टीय जनता दल के टिकट पर अनंत सिंह ने अपना नामांकन भी कर दिया है. जनता दल यू ने इस सीट से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी राजीव लोचन को प्रत्य़ाशी बनाया है. मतलब साफ है कि इस बार मुकाबला टफ होने वाला है. पटना जिले में आने वाली यह विधानसभा सीट मुंगेर लोकसभा का हिस्सा है. बड़े पैमाने पर दलहन पैदा होने के चलते इस एरिया को दाल का कटोरा भी कहा जाता है. बाहुबलियों के चुनाव लड़ने के चलते लंबे समय से यह राज्य की चर्चित सीट रही है. भौगोलिक बनावट कहें या जनता का मूड यहां बाहुबली ही चुनाव जीतते आए हैं.

डेढ़ दशक तक रहा जेडीयू का कब्जा
बेउर जेल में एके 47 रखने की सजा काट रहे अनंत सिंह कभी नीतीश कुमार के बेहद खास रहे. अनंत सिंह को इस एरिया में छोटे सरकार के नाम से भी जाना जाता रहा है. समर्थकों और विरोधियों के लिए इनकी अलग-अलग छवि है. समर्थक उनमें रॉबिनहुड की छवि देखते हैं. चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामे के अनुसार उनके ऊपर 38 अपराधिक मामले चल रहे हैं. साल 2005 से लेकर 2010 तक अनंत सिंह ने जेडीयू के टिकट पर तीन चुनाव जीते. साल 2015 में नीतीश कुमार से अनबन हो गई . इसके बाद अनंत सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते. उन्होंने तब जेडीयू के नीरज सिंह को 18,000 वोटों के अंतर से हराया. हालांकि जेडीयू के नीरज सिंह को राजद का भी समर्थन हासिल था फिर भी वो अनंत सिंह के सामने टिक नहीं सके. 2015 में अनंत सिंह के खिलाफ लालू ने मोर्चा खोल रखा था पर 2020 में अब राजद के टिकट पर ही अनंत सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. एलजेपी ने भी मोकामा से सुरेश सिंह निषाद को अपना प्रत्याशी बनाया है. मैदान में एलजेपी के आने से मुकाबला अब कांटे का हो गया है.

भूमिहार बहुल है मोकामा सीट
मोकामा विधान सभा इलाका भूमिहार बहुल क्षेत्र है. अनंत सिंह खुद भूमिहार होने के साथ-साथ अपने समुदाय में अच्छी पैठ रखते हैं. दूसरे नंबर पर यादव लोगों की आबादी है. अति पिछड़ी जातियों ,कुर्मी और मुस्लिम वोटरों की भी अच्छी तादाद है. अनंत सिंह को इस बार आरजेडी से टिकट मिलने के कारण भूमिहार और यादव वोट मिलने की उम्मीद के चलते वे मजबूत स्थित में हैं. जेडीयू के लिए एलजेपी से खतरा है पर बीजेपी के कोर वोटर का वोट उन्हें मिलेगा.  इसलिए मुकाबला आसान नहीं होगा.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1951 से यह सामान्य सीट है. पहली और दूसरी बार यहां से कांग्रेस के जगदीश नारायण सिंह जीते थे. तीसरे चुनाव 1962 में निर्दलीय सूर्यनंदन सिंह जीतने में कामयाब रहे. 1967 में यहां रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के बी लाल जीते. 1969 में कांग्रेस के कामेश्वर सिंह विधायक बने. 1972 और 1977 में कांग्रेस से ही कृष्णा शाही यहां की विधायक बनीं. 1980 और 1985 में कांग्रेस के श्याम सुंदर सिंह धीरज के हाथों में कमान आ गई. 1990 से यहां की राजनीति बदल गई. करीब 3 दशकों से यहां बाहुबली ही विधायक चुने जाते रहे हैं. साल 1990 में अनंत सिंह के भाई दिलीप कुमार सिंह जनता दल के टिकट पर चुने गए थे. 1995 में भी दिलीप सिंह दुबारा जीते पर 2000 में एक और बाहुबली सूरजभान सिंह यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर भाग्य आजमाने पहुंचे और विधायक बन गए.