जोकीहट : नामांकन के चौथे दिन तक कोई प्रत्याशी नहींं, क्योंकि यहां 50 वर्षों से है एक ही परिवार का ‘राज’

bihar election 2020 : यहां ( Jokihat Vidhan Sabha constituency) तस्लीमुद्दीन ( Mohammed Taslimuddin) के परिवार का सिक्का चलता है. 1969 से अब तक 14 बार चुनाव हो चुके हैं .लेकिन, विरोधी खेमा बस 4 बार जीत सका है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:33 am, Sat, 17 October 20

अररिया जिले के जोकीहट मे 7 नवंबर को मतदान है.  16 अक्टूबर तक नामांकन करने के चार दिन बीत गए हैं पर कोई नामांकन करने नहीं पहुंचा है. क्योंकि इस विधानसभा में आकर राजनीति के सारे समीकरण दम तोड़ देते हैं. पार्टियों का तिलिस्म भी टूट जाता है. क्योंकि यहां राज बस एक परिवार का चलता है. यह परिवार 10-20 नहीं, पूरे 51 साल से गद्दी पर काबिज है. जनता दिल खोलकर उसे अपना समर्थन देती है. हम बात कर रहे हैं अररिया जिले की जोकीहाट विधानसभा सीट की.
यहां तस्लीमुद्दीन के परिवार का सिक्का चलता है. 1969 से अब तक 14 बार चुनाव हो चुके हैं. लेकिन, विरोधी खेमा बस 4 बार जीत सका है। बाकी हर बार तस्लीमुद्दीन या उनके बेटों ने ही जीत दर्ज की है. 2017 में पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री तस्लीमुद्दीन का निधन हुआ तब भी उपचुनाव में उनके बेटे सरफराज ही चुने गए. विधानसभा उपचुनाव में आरजेडी के टिकट पर छोटे बेटे शाहनवाज विधायक बने थे.
कांग्रेस से मोहम्मद इदुर रहमान ने 1980 और 1990 में तस्लीमुद्दीन की सल्तनत को मात देते हुए जीत दर्ज की थी. साल 2005 में 2 बार हुए उपचुनाव में जदयू के मंजल आलम ने सरफराज को शिकस्त दी थी. लेकिन, 2010 के चुनाव में सरफराज ने फिर अपना किला हथिया लिया था.
मंडल और यादव का दबदबा
जातीय समीकरण से जोकीहाट सीट मंडल और यादव जाति की दबदबा वाली है. परिसीमन के बाद 27 पंचायतों के साथ पलासी प्रखंड की 12 पंचायतों को भी शामिल किया गया था. इससे क्षेत्र की जातीय समीकरण और भौगोलिक स्थिति में भी काफी बदलाव आया. इतना कुछ बदलने के बाद भी तस्लीमुद्दीन का कब्जा मजबूत बना रहा. मुस्लिम बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र में मंडल और यादव जाति के मतदाताओं की भी बड़ी संख्या है. किसी भी चुनाव में ये बड़ा उलटफेर करने के लिए काफी है.

जोकीहाट के लिए बाढ़ अभिशाप

साहित्यकारों की धरती जोकीहाट के लिए बाढ़ अभिशाप है। यहां की प्रमुख 3 नदियां बकरा, कनकई और परमान कहर ढाती हैं. कृषि योग्य जमीन ही नहीं, घर, सड़क, चकरोड सब बहा ले जाती हैं. जोकीहाट को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले हाइवे 327 पर टूटे हुए 2 पुल साढ़े 3 साल में भी नहीं बन सके. सामरिक और यातायात की दृष्टि से ये पुल यहां की लाइफलाइन थे. बाढ़ से फसलों और घरों की बर्बादी यहां की गरीबी की प्रमुख वजह है. बड़े स्तर पर होने वाले पलायक का भी यह एक बड़ा कारण है.

साहित्यकारों ने दिलाई है पहचान

उर्दू और फारसी के बेहतरीन शायरों का जिक्र हो और साकिब नौमानी का नाम न आए, ऐसा संभव ही नहीं है .साकिब नौमानी जोकीहाट के ही थे. साहित्य की दुनिया में अलग मुकाम बनाने वाले हक्कानी अल कासमी भी इसी जोकीहाट के थे. हिंदी कथाकार राहबान अली राकेश, शायर व पेंटर दीन रजा अख्तर, नौमान केसर, मोहम्मद ईद जोकीहाट के ही हैं. विद्याधर के लेकर शाह किफायतुल्लाह ने अपनी किताब के अधिकतर अंश जोकीहाट प्रवास के दौरान ही लिखे थे.

अब तक के निर्वाचित विधायक

1967- नजमुद्दीन- पीएसपी
1969- मोहम्मद तस्लीमुद्दीन- कांग्रेस
1972- मोहम्मद तस्लीमुद्दीन- निर्दलीय
1977- मोहम्मद तस्लीमुद्दीन- जनता पार्टी
1980- मोहम्मद ईदुर रहमान- कांग्रेस
1985- मोहम्मद तस्लीमुद्दीन
1990- मोहम्मद ईदुर रहमान
1995- मोहम्मद तस्लीमुद्दीन- समाजवादी पार्टी
2000- सरफराज आलम- राजद
2005- मंजर आलम- जदयू
2005- मंजर आलम- जदयू
2010- सरफराज आलम- जदयू
2015- सरफराज आलम- जदयू
2018- मोहम्मद शाहनवाज-राजद