Bihar election 2020: इमामगंज क्या एक मौका फिर देगा जीतन राम मांझी को

इमामगंज में माना जाता रहा है कि नक्सलियों को बढ़ावा देने के पीछे कहीं न कहीं उदयराम चौधरी (uday narayan chaudhary) का हाथ रहा है. इसी कारण पिछले चुनाव में मुसलमानों ने भी खुलकर जीतनराम मांझी (jitan ram manjhi) का साथ दिया था.

इमामगंज से एक बार फिर दलित दिग्गज नेता जीतनराम मांझी अपनी पार्टी हिंदुस्तान अवामी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं. पिछली बार उन्होंने इसी सीट से आरजेडी के दिग्गज दलित नेता उदय नारायण चौधरी को करीब 30 हजार वोटों से हराया था. पर क्या जीतन राम मांझी वही सफलता इस बार दोहरा पाएंगे. इस बार भी उनकी लड़ाई पुराने प्रतिद्वंद्वी से ही है. आरजेडी के उदय नारायण चौधरी इस क्षेत्र से 5 बार विधायक रह चुके हैं. चौधरी को पिछली बार जनता की नाराजगी झेलनी पड़ी थी, पर शायद इस बार उनके साथ ऐसा न हो.

पिछला चुनाव (2015) जीतने के कारण
दरअसल इमामगंज का इलाका नक्सलियों का इलाका है. तहबाजारी और वसूली यहां आम बात हो चुकी है. बड़े व्यापारी ही नहीं छोटे व्यापारी भी वसूली और रंगदारी से परेशान हैं. माना जाता रहा है कि नक्सलियों को बढ़ावा देने के पीछे कहीं न कहीं उदयराम चौधरी का हाथ रहा है. इसी कारण पिछले चुनाव में मुसलमानों ने भी खुलकर जीतनराम मांझी का साथ दिया था. यह जानते हुए भी कि जीतन राम मांझी एनडीए के साथ हैं और जीतने पर बीजेपी की सरकार बनाने मे मदद करेगे. इस तरह पिछला चुनाव तो उदयवीर को हराने के लिए स्थानीय जनता ने वोट दिया. पर क्या इस बार ऐसा होगा ?

कोइरी बहुल इमामगंज
क्षेत्र में 144 ऐसे गांव व टोले हैं, जहां कोईरी जाति के लोग रहते हैं. इस तरह स्थानीय राजनीति में कोइरी जाति की निर्णायक भूमिका में होती है। दूसरे नम्बर पर दलितों खासकर भुइयां (मांझी) जाति की आबादी है. यादव व मुसलमानों की भी अच्छी खासी संख्या में वोटर है. मांझी के साथ अति पिछड़ों और दलितों का वोट जा रहा है पर इस बार पिछली बार की तरह मुसलमानों का वोट मिलने की संभावना नहीं है,

स्थानीय मुद्दे
घने जंगलों और पहाड़ों की अधिकता वाले इस क्षेत्र में पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से नक्सली हिंसा का सिलसिला भी बना हुआ है। इससे नक्सली घटनाओं में कुछ कमी तो दर्ज की गई, मगर अपराधियों और लेवी-रंगदारी वसूलने वाले बड़े गिरोह भी सक्रिय हुए। विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या शिक्षा के साधनों को लेकर है। विधानसभा क्षेत्र में एक भी कॉलेज नहीं है। डिग्री लेवल की पढ़ाई के लिए भी यहां कॉलेज नहीं है। प्राइमरी से लेकर इंटर तक के सरकारी स्कूलों की दशा भी खराब है। पानी और सड़क की अहम समस्या है। निवासियों को प्रखंड मुख्यालय पहुंचने में पसीने छूट जाते हैं। यही हाल पीने की पानी की है।

कब कौन किस पार्टी से जीता
1957-अम्बिका प्रसाद सिंह (निर्दलीय)
1962-अम्बिका प्रसाद सिंह (स्वतंत्र पार्टी)
1967-डी. राम (कांग्रेस)
1969-ईश्वर दास (संसोपा)
1972- अवधेश्वर राम (कांग्रेस)
1977-ईश्वर दास (जनता पार्टी)
1980-श्रीचंद सिंह (कांग्रेस)
1985-श्रीचंद सिंह (कांग्रेस)
1990-उदय नारायण चौधरी (जनता दल)
1995-रामस्वरूप पासवान (समता पार्टी)
2000-उदय नारायण चौधरी (समता पार्टी)
2005- फरवरी-उदय नारायण चौधरी (जदयू)
2005- अक्टूबर-उदय नारायण चौधरी (जदयू)
2010- उदय नारायण चौधरी (जदयू)
2015- जीतन राम मांझी (हम)

Related Posts