Bihar election 2020: सालों साल बढ़ता गया BJP का वोट शेयर, बिहार चुनाव ने पार्टी को दिलाई कामयाबी

Bihar election bjp vote share: कांग्रेस ने 2015 में 41 सीटों पर लड़कर 6.56 फीसद वोट पाया, जबकि पिछले दो चुनावों में क्रमशः 51 और 243 सीटों पर लड़कर उसे 6 और 8 फीसद से कुछ ही ज्यादा वोट मिल पाए. इसलिए सीटें बढ़ने के साथ वोट शेयर में फायदा सिर्फ बीजेपी के साथ देखा गया.

प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार चुनावों में अगर किसी पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है तो वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) है. बीजेपी का वोट शेयर लगभग दहाई अंक में बढ़ गया है. बीजेपी ने अक्टूबर 2005 में 102 सीटों पर चुनाव लड़ी और उसे 15.65 फीसद वोट मिले. 2010 में भी बीजेपी इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ी लेकिन उसके वोट शेयर में हलका इजाफा दर्ज किया गया. पिछले चुनाव में यह 15.65 फीसद था लेकिन 5 साल बाद 2010 में 16.49 फीसद हो गया. वोट शेयर में सबसे बड़ा उछाल 2015 के विधानसभा चुनावों में देखने को मिला जो 24.42 फीसद पर पहुंच गया. पिछले चुनाव की तुलना में यह 9 फीसद से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई.

देश की 6 राष्ट्रीय पार्टियों बीजेपी, कांग्रेस, बीएसपी, सीपीआई, सीपीएम और एनसीपी का वोट शेयर देखें तो सबसे कुछ न कुछ इजाफा हुआ लेकिन बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ. इसकी एक वजह ये है कि बीजेपी ने पहले की तुलना में अपने ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे. 2005 और 2010 में पार्टी ने 102-103 प्रत्याशी उतारे तो 2015 में यह संख्या बढ़कर 157 हो गई. सीटें बढ़ने से बीजेपी के वोट शेयर में उछाल देखा गया. लेकिन क्या ये सभी पार्टियों के साथ हुआ? ऐसा अगर होता तो कांग्रेस ने 2015 में 41 सीटों पर लड़कर 6.56 फीसद वोट पाया, जबकि पिछले दो चुनावों में क्रमशः 51 और 243 सीटों पर लड़कर उसे 6 और 8 फीसद से कुछ ही ज्यादा वोट मिल पाए. इसलिए सीटें बढ़ने के साथ वोट शेयर में फायदा सिर्फ बीजेपी के साथ देखा गया.

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2015 का चुनाव छोड़कर बीजेपी ने जेडीयू के साथ चुनाव लड़ा और उसके वोट शेयर में बढ़ोतरी देखी गई. इन्हीं चुनावों में अन्य पार्टियां के वोट शेयर में गिरावट देखी गई है. सबसे ज्यादा घाटा कांग्रेस को हुआ है. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, कांग्रेस ने 2015 में सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा और सबसे कम 2015 में 41 सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन उसके वोट शेयर 5 फीसद से 8.37 फीसद के बीच फंसे रहे. सबसे बुरा हाल बीएसपी का रहा जिसने हर चुनाव में 200 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे लेकिन उसका वोट शेयर 4.41 फीसद से गिरकर 2.07 परसेंट पर पहुंच गया.

राष्ट्रीय पार्टियों की तुलना में बिहार की तीन मुख्य क्षेत्रीय पार्टियों की भी यही हालत रही और उनके वोट शेयर में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. अक्टूबर 2005 के चुनाव में एलजेपी को 11.10 फीसद, आरजेडी को 23.45 परसेंट और जेडीयू को 20.46 फीसद वोट मिले. उस चुनाव में एलजेपी ने 203, आरजेडी ने 175 और जेडीयू ने 139 सीटों पर चुनाव लड़ा था. 2015 के चुनाव में एलजेपी, आरजेडी और जेडीयू को क्रमशः 4.83, 18.35 और 16.83 फीसद वोट मिले थे. एलजेपी ने 42, आरजेडी ने 101 और जेडीयू ने भी 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. पिछले चार चुनावों में निर्दलीय पार्टी के प्रत्याशियों के वोट शेयर में भी बड़ी गिरावट देखी गई है.

 

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