Bihar election 2020: बिहार के चुनाव में क्यों गूंजने लगा सत्तर के दशक के बाहुबली कामदेव सिंह का नाम

Bihar election 2020 matihani assembly seat: राजकुमार सिंह कामदेव सिंह के पुत्र हैं और उनके चुनाव मैदान में उतर आने से एक बार फिर कामदेव सिंह का नाम सुर्खियों में है. कामदेव सिंह को लोग कंपनी और मालिक कहकर संबोधित करते थे जबकि वहीं एक वर्ग तस्कर सम्राट कह कर उन्हें बुलाता है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 5:58 pm, Fri, 16 October 20
राजकुमार सिंह

बिहार का मटिहानी विधानसभा क्षेत्र इन दिनों खासे चर्चा में है और वजह है सत्तर और अस्सी के दशक के बाहुबली कामदेव सिंह के सुपुत्र राजकुमार सिंह द्वारा चुनाव मैदान में उतरकर जेडीयू (JDU) से तीन दफे विधायक रहे बोगो सिंह को ललकारना. राजकुमार सिंह कांग्रेस छोड़ एलजेपी (LJP) के टिकट पर मैदान में हैं जबकि उनके पिता कामदेव सिंह सत्तर और अस्सी के दशक में दर्जनों लोकसभा और विधानसभा सीट से कांग्रेस को जिताने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

कौन हैं कामदेव सिंह और उनका नाम सुर्खियों में फिर क्यों है?
राजकुमार सिंह कामदेव सिंह के पुत्र हैं और उनके चुनाव मैदान में उतर आने से एक बार फिर कामदेव सिंह का नाम सुर्खियों में है. कामदेव सिंह को लोग कंपनी कहकर संबोधित करते थे जबकि वहीं एक वर्ग तस्कर सम्राट से लेकर बिहार में चढ़कर बोल रहे अपराध का कर्ताधर्ता बताने से गुरेज नहीं करता है. कहा जाता है कि स्वतंत्र भारत में पहली बार बूथ लूटने के काम में कामदेव सिंह ही शामिल थे, जबकि उनके प्रशंसक उन्हें गरीबों के मसीहा के रूप में उद्धृत करने से पीछे नहीं हटते हैं.

बीजेपी के मिथिलेश कुमार सिंह कहते हैं कि राजकुमार सिंह को उनकी विरासत का जोरदार फायदा मिलेगा क्यूंकि उनके पिता का व्यवहार आम लोगों खासकर गरीबों के साथ बेहद ही भावनात्मक था. वैसे कामदेव सिंह की एक छवि आपराधिक भी है परंतु वो सही नहीं है क्योंकि वो अपराधियों के साथ लड़ते थे और आम आदमी विशेषकर गरीबों के साथ वो बेहद लगाव रखते थे. वहीं बलिया के पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह कहते हैं कि कामदेव सिंह का इस्तेमाल उन दिनों सत्ताधारी दल द्वारा सत्ता में कायम रहने के लिए किया जाता था और इसके लिए कामदेव सिंह को कांग्रेस का परश्रय भी मिलता था. दरअसल साल 1971 के लोकसभा चुनाव में कम्युनिस्ट के उम्मीदवार योगेंदर शर्मा के खिलाफ कामदेव सिंह पर 34 बूथों पर जोर जबर्दस्ती करने का आरोप लगा था जब कांग्रेस पार्टी से उम्मीदवार श्यामनंदन मिश्र खड़े थे. इतना ही नहीं कामदेव सिंह की नजदीकी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी सर्वविदित है जिसको लेकर बेगूसराय और आसपास के इलाके में कई किस्से सुने जा सकते हैं. ऐसे में कांग्रेस से गहरा नाता रखने वाले पिता के पुत्र राजकुमार सिंह द्वारा एलजेपी का दामन थामना सबके लिए चौंकाने वाला है.

कांग्रेस छोड़ने के पीछे की असली कहानी
दरअसल बिहार के बेगूसराय जिले की मटिहानी विधानसभा सीट महागठबंधन के कोटे से कांग्रेस को न जाकर सीपीएम के खाते में चला गई है. वहां से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सीपीएम (CPM) के टिकट पर महागठबंधन के उम्मीदवार हैं. जाहिर है मटिहानी विधानसभा सीट कांग्रेस के खाते में नहीं दिए जाने को लेकर राजकुमार सिंह के समर्थकों में काफी नाराजगी थी और इसी दबाव में राजकुमार सिंह को एलजेपी का दामन थामना पड़ा. वैसे एलजेपी के पूर्व सांसद सूरजभान सिंह शुरुआत से ही राजकुमार सिंह पर नजर डाले हुए थे और वो चाहते थे कि तीन बार से विधायक रहे बोगो सिंह के खिलाफ राजकुमार सिंह को ही एलजेपी (LJP) से मैदान में उतारा जाए ताकि मटिहानी विधानसभा सीट पर एलजेपी (LJP) जेडीयू (JDU) को पटखनी देकर बाजी मार सके. एलजेपी (LJP) से पूर्व सांसद सूरजभान सिंह कहते हैं कि राजकुमार सिंह पढ़े लिखे और सुयोग्य उम्मीदवार हैं वहीं इनके पिता कामदेव सिंह के प्रति लोगों में गहरी आस्था है. जाहिर है इसका लाभ पार्टी को मिलेगा और मटिहानी सीट पर एलजेपी का परचम लहराएगा.

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कांग्रेस के अंदर गुटबाजी बनी एलजेपी में जाने की वजह?
दरअसल राजकुमार सिंह की पहली प्राथमिकता कांग्रेस (CONGRESS) पार्टी ही थी लेकिन कांग्रेस हाईकमान द्वारा गठबंधन की मजबूरी का हवाला देकर सीट छोड़ दिया जाना उनके एलजेपी में जाने का रास्ता प्रशस्त करता चला गया. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस पार्टी के महासचिव तारिक अनवर उन्हें कांग्रेस से प्रत्याशी बनाने के लिए अंतिम समय तक प्रयासरत रहे लेकिन उनकी पुरजोर कोशिशों के बावजूद कांग्रेस ने मटिहानी विधानसभा सीट को अपने घटक दल की झोली में डाल कर कांग्रेस प्रत्याशी के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए. कहा जाता है कि बिहार के पुराने कांग्रेस नेता श्याम सुंदर सिंह धीरज और कांग्रेस के महासचिव तारिक अनवर हर हालत में राजकुमार सिंह को कांग्रेस से टिकट दिलाने के पक्षधर थे. वहीं कांग्रेस का दूसरा खेमा जो कि शक्ति सिंह गोहिल और अखिलेश सिंह का बताया जाता है, वह स्थानीय कांग्रेसी नेता सार्जन सिंह का पक्षधर था. इस सीट को लेकर बंटे दो धड़ों के बीच पार्टी ने घटक दल के खाते में सीट देना ही मुनासिब समझा.

बिहार में कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल समेत कई नेता टिकट बांटने को लेकर पार्टी कार्यकर्ता द्वारा जोरदार विरोध झेल चुके हैं. इसी बीच मौके को भांप एलजेपी ने राजकुमार सिंह को टिकट थमा जेडीयू के खिलाफ दमदार उम्मीदवार उतारकर एक तीर से कई निशाना साधने में कामयाबी हासिल कर ली है. एलजेपी प्रत्याशी राजकुमार सिंह कहते हैं कि उनकी प्राथमिकताओं में जनता की सेवा है, इसलिए वो मटिहानी विधानसभा की सेवा एक सेवक की तरह नहीं बल्कि एक बेटे की तरह करना चाहते हैं.