Bihar election 2020: जिस कृषि कानून पर घिरे जेडीयू और BJP, उसी मुद्दे को तेजस्वी ने बनाया चुनावी हथियार

Bihar election mahagathbandhan manifesto: महागठबंधन के संकल्प पत्र में दो बातें बड़ी निकल कर सामने आई हैं. एक किसान कर्जमाफी और दूसरा 10 लाख बेरोजगारों को नौकरी. संकल्प पत्र के मुताबिक, बिहार में महागठबंधन की सरकार बनती है तो पहले कैबिनेट फैसले में 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा तेजस्वी यादव की अगुवाई में किया गया है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 2:36 pm, Sat, 17 October 20
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव

बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नीत महागठबंधन ने शनिवार को अपना साझा 25 सूत्रीय कार्यक्रम “संकल्प बदलाव का” जारी कर दिया. संकल्प पत्र में कई बड़े और अहम वादे किए गए हैं. महागठबंधन के मुताबिक, बिहार में 10 लाख सरकारी नौकरियां, सभी सरकारी बहाली आवेदन फॉर्म को निःशुल्क करना, मनरेगा कार्य दिवस को 100 से 200 दिन करना, किसानों के लिए कर्ज़माफ़ी, कर्पूरी श्रमवीर सहायता केंद्र जैसे कुल 25 वादों का महागठबंधन ने प्रण लिया है. संकल्प पत्र में सबसे महत्वपूर्ण बात किसानों के लिए कर्जमाफी है. कह सकते हैं कि हर चुनाव में और हर प्रदेश में कर्जमाफी की बात होती है और इस पर राजनीति भी खूब होती है, लेकिन बिहार के परिदृश्य में इसे अलग मान कर चलना होगा. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जब से कृषि कानून पारित किए हैं, तब से इस पर पुरजोर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. इन विरोध प्रदर्शनों के बीच आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने किसान कर्जमाफी का हथियार चुन कर बीजेपी-जेडीयू को करारा जवाब देने की रणनीति बनाई है.

महागठबंधन के संकल्प पत्र में दो बातें बड़ी निकल कर सामने आई हैं. एक किसान कर्जमाफी और दूसरा 10 लाख बेरोजगारों को नौकरी. संकल्प पत्र के मुताबिक, बिहार में महागठबंधन की सरकार बनती है तो पहले कैबिनेट फैसले में 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा तेजस्वी यादव की अगुवाई में किया गया है. इसके साथ ही पहले विधानसभा सत्र में नया किसान बिल भी वापस लेने का वादा किया गया है. ये दोनों मुद्दे एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं क्योंकि केंद्र की एनडीए सरकार इस पर बुरी तरह से घिरी हुई है. कृषि बिल पास होने के बाद से ही सड़कों पर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जिन्हें महागठबंधन की सभी पार्टियों का समर्थन मिला है. इन पार्टियों में आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां प्रमुख हैं.

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खेती-किसानी के मुद्दे पर तेजस्वी का हमला
संकल्प पत्र के दौरान तेजस्वी यादव ने खेती-किसानी के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए बीजेपी और जेडीयू पर हमला बोला. तेजस्वी यादव के लिए यह वक्त काफी मुफीद है क्योंकि कृषि कानूनों को लेकर चल रहा बवाल अभी थमा नहीं है और विपक्ष ने इसे अपना ‘ट्रंप कार्ड’ मान लिया है. तेजस्वी ने कहा, किसानों का लोन माफ करेंगे. बिहार को अब तक विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिला. बिहार में जूट, शुगर, राइस मील सब ठप पड़ा है. यहां फूड प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है. जो लोग रोजगार करते थे उनका रोजगार भी ठप पड़ गया है. तेजस्वी यादव ने इन सबको दुरुस्त करने का वादा किया. तेजस्वी यादव ने कहा, प्रधानमंत्री बिहार चुनाव में मोतिहारी आए थे तो कहे थे मोतिहारी चीनी मिल को चालू करूंगा और अगली बार इसी चीन मील की चीनी की चाय पीएंगे. लेकिन क्या हुआ, क्या चीनी मील चालू हुई?

तेजस्वी की इन बातों से साफ है कि उन्होंने कृषि से जुड़े उन्हीं मुद्दों को उठाया है जिन पर बीजेपी के साथ जेडीयू भी घिरी है. जेडीयू ने कृषि कानूनों पर बीजेपी का साथ दिया है जिसे लेकर विपक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ शुरू से हमलावर है. एक मुद्दा बिहार को विशेष राज्य दिलाने का है जिसकी मांग आरजेडी समेत सभी पार्टियां वर्षों से करती रही हैं. केंद्र की तरफ से इसका आश्वासन नहीं मिला है लेकिन पूर्व में बीजेपी की सरकार स्पेशल पैकेज देने की बात करती रही है. विशेष राज्य के दर्जे को लेकर नीतीश कुमार भी कई बार केंद्र को घेर चुके हैं. अब फिर चुनाव से पहले तेजस्वी ने इसे अपना हथियार बनाते हुए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है.

कृषि लोन पर राजनीति
जब-जब चुनाव आते हैं, किसान कर्जमाफी का मुद्दा जोर पकड़ लेता है. यह बात सिर्फ बिहार चुनाव के साथ ही नहीं है. लगभग हर राज्य चुनाव में जाने से पूर्व ऐसी घोषणा करते हैं. मध्यप्रदेश और राजस्थान को देख सकते हैं. ये दोनों सरकारें कर्जमाफी के मुद्दे पर वोटर्स का समर्थन जुटा पाईं. कमलनाथ और गहलोत सरकार का दावा है कि किसानों को कई प्रकार के छूट दिए गए लेकिन विपक्ष इस पर हमेशा से सवाल उठाता रहा है. दूसरी ओर विपक्ष बीजेपी नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधती है कि बड़े-बड़े कॉरपोरेट के टैक्स माफ किए जाते हैं लेकिन किसानों के लिए कुछ नहीं होता. बिहार में भी नीतीश कुमार से सवाल पूछे जाते हैं कि वे किसानों का कर्ज कब माफ करेंगे. अब तेजस्वी यादव ने अपने पहले वादे में इस बात को जोड़ा है कि सरकार बनते ही किसान कर्जमाफी की जाएगी.

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यूपी की तर्ज पर मांग तेज
बिहार पर किसान कर्जमाफी का दबाव बनाने का एक बड़ा कारण यूपी है. यूपी में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी की सरकार है जहां सरकार बनते ही किसानों के लिए बड़ा फैसला हुआ था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में लघु और सीमांत किसानों को कर्जमाफी की सौगात देते हुए किसानों का एक लाख रुपये तक का फसली ऋण माफ कर दिया. इसके साथ ही उन किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया, जिन्हें बैंकों ने एनपीए घोषित कर दिया था. सरकार ने फसली ऋण के लिए 30,729 करोड़ और एनपीए ऋण के लिए 5630 करोड़ यानी कुल 36,359 करोड़ रुपये की व्यवस्था की. यूपी की तर्ज पर बिहार में भी कुछ ऐसे ही प्रबंध करने की मांग लगातार उठती रही है.

कृषि कानून और उसका विरोध
संसद ने कृषि से जुड़े तीन कानून बनाए हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन कानूनों को ऐतिहासिक बताते हुए किसानों की आजादी की संज्ञा देते रहे हैं. इसमें एक बड़ा प्रावधान यह है कि किसान अब मंडियों के बाहर भी अपनी उपज बेच सकेंगे. अब तक ऐसा नहीं था लेकिन अब किसान अपनी उपज किस रेट पर बेचेगा, इसके लिए वह आजाद है. सरकार ने इस बात की छूट दी है कि किसान निजी कंपनियों को अपनी उपज बेचकर बेहतर दाम पा सकते हैं. सरकार जहां इसे किसानों की आजादी बता रही है तो विपक्ष का कहना है कि इससे कॉरपोरेट को खुली छूट दी गई है क्योंकि वे किसानों पर दबाव बनाकर अपनी मनचाही कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर करेंगे. पहले जो गारंटी सरकार की ओर से मिलती थी, अब उसे खत्म कर दिया गया है. यह गारंटी एमएसपी के नाम पर है.

विपक्ष का कहना है कि सरकार ने कानून में से एमएसपी हटा दिया है. लिहाजा किसानों को पहले जो समर्थन मूल्य मिलने की गारंटी थी, वह अब खत्म हो गई है. बड़ा विरोध इसी बात को लेकर हो रहा है. विपक्ष बिहार का हवाला देते हुए इस कानून का विरोध कर रहा है. बिहार में मंडी व्यवस्था 2006 में ही खत्म कर दी गई थी. विपक्ष का सवाल है कि मंडी व्यवस्था खत्म होने और कॉरपोरेट की एंट्री से बिहार के कृषि क्षेत्र में कितना निवेश आया. आज किसानों को कम दाम पर उपज बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इस साल बिहार में गेहूं का बंपर पैदावार होने के बावजूद महज 1 प्रतिशत ही सरकारी खरीद हो पाई है.