Bihar elections 2020: भोजपुर का बाहुबली नेता सुनील पांडेय जिसने मुख्तार अंसारी को मारने की ली थी सुपारी

Bihar elections 2020 sunil pandey profile: 5 मई 1966 को जन्मे सुनील पांडेय की आधी जिंदगी जेल में और आधी फरारी में बीती है. अपराध की दुनिया में उनका बड़ा नाम है और कई तरह के मामले उनके खिलाफ दर्ज हैं. यहां तक कि उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को मारने के लिए उन्होंने 50 लाख की सुपारी तक ली थी.

सुनील पांडेय

बिहार के बाहुबली नेताओं में एक नाम है सुनील पांडेय का. वे भोजपुर जिले चार बार विधायक रह चुके हैं. सुनील पांडेय लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) से चुनाव लड़ते रहे थे लेकिन इस बार उन्होंने निर्दलीय खड़ा होने का फैसला किया है. इसकी वजह ये है कि एलजेपी तरारी सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारना चाहती और वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए खुला मैदान छोड़ना चाहती है. ऐसे में इस सीट से एलजेपी का कोई उम्मीदवार नहीं उतरेगा. इस सूरत में सुनील पांडेय का टिकट कट गया और उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया. सुनील पांडेय का दूसरा नाम नरेंद्र पांडेय भी है.

चिराग पासवान की हालिया राजनीति के बाद एलजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील पांडेय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय मैदान में ताल ठोंकने का ऐलान कर दिया. एलजेपी ने ऐलान किया है कि वह बीजेपी के खिलाफ इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारेगी. इसके बाद सुनील पांडेय ने भी ठान लिया कि वे या उनके परिवार के लोग तरारी से चुनाव लड़ेंगे. चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी को हराने के लिए खुद या परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारने की तैयारी शुरू कर दी है. तरारी सीट पर फिलहाल लेफ्ट पार्टी का कब्जा है और सीपीआई एमएल के सुदामा प्रसाद इस सीट से विधायक हैं. पिछले चुनाव में सुनील पांडेय की पत्नी गीता पांडेय इस सीट से चुनाव हार गई थीं. इस बार सुनील पांडेय ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर इस सीट की लड़ाई को काफी रोचक बना दिया है.

राजनीतिक सफर
5 मई 1966 को जन्मे सुनील पांडेय की आधी जिंदगी जेल में और आधी फरारी में बीती है. अपराध की दुनिया में उनका बड़ा नाम है और कई तरह के मामले उनके खिलाफ दर्ज हैं. यहां तक कि उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को मारने के लिए उन्होंने 50 लाख की सुपारी तक ली थी. सुनील पांडेय की छवि दबंग और बाहुबली वाली रही है. सुनील पांडेय चार बार विधायक रह चुके हैं. सुनील पांडेय के छोटे भाई हुलास पांडेय भी फिलहाल एलजेपी में हैं. वो पहले एमएलसी रह चुके हैं. तरारी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनावी ताल ठोंक कर सुनील पांडेय ने बीजेपी के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस सीट से पहली बार पार्टी ने कौशल विद्यार्थी को चुनावी मैदान में उतारा है. अब देखने वाली बात है कि तरारी के लोग जीत का सेहरा किसे पहनाते हैं. क्या वे बीजेपी के विद्यार्थी को पसंद करेंगे या अपने पुराने नेता सुनील पांडेय को.

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साल 2000 के विधानसभा चुनाव में समता पार्टी ने सुनील पांडेय को रोहतास के पीरो से टिकट दिया. इस चुनाव में सुनील पांडेय ने आरजेडी प्रत्याशी काशीनाथ को हराया और विधायक बन गए. उस चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. तब समता पार्टी और बीजेपी का आपस में गठबंधन था. सरकार किसकी बने, इसे लेकर भारी दुविधा थी. ऐसे में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को कहा. ऐसा कहा जाता है कि इस सरकार को बनवाने में सुनील पांडेय की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही. विधायकों की संख्या पूरी करने के लिए सुनील पांडेय ने राजन तिवारी, मुन्ना शुक्ला, रामा सिंह, अनंत सिंह, धूमल सिंह और मोकामा के सूरजभान जैसे निर्दलीय बाहुबलियों की फौज नीतीश कुमार के समर्थन में खड़ी कर दी और सरकार बन गई. इसे देखते हुए सरकार में सुनील पांडेय का कद पहले की तुलना में बड़ा हो गया.

सुनील पांडेय का अपराध जगत
अपराध की दुनिया में सुनील पांडेय का नाम चर्चित है. 2012 में रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या का उन पर आरोप लगा था. उन्हें उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित डॉन मुख्तार अंसारी की हत्या के मामले में भी गिरफ्तार किया गया था. एनआईए ने कथित तौर पर एके-47 रखने के आरोप में उनके खिलाफ जांच भी की थी. सुनील पांडेय ने मुख्तार अंसारी की हत्या के लिए 50 लाख का सुपारी लेकर सनसनी फैला दी थी. इनके खिलाफ कई मुकदमे हैं जिनमें बड़हरा थाना कांड संख्या 188/2011, काराकाट थाना कांड संख्या 09/1999, बिक्रमगंज थाना कांड संख्या 70/ 1998 शामिल हैं. 1 जून 2012 को रणवीर सेना के मुखिया ब्रह्मेश्वर सिंह की हत्या हुई. इसका आरोप सुनील पांडेय पर लगा. पुलिस ने छापा मारकर उनके ड्राइवर को गिरफ्तार किया. इसके साथ ही उनके भाई और तत्कालीन विधान परिषद के निर्दलीय सदस्य हुलास पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई लेकिन बाद में रिहा कर दिया गया. 23 जनवरी 2015 को आरा के सिविल कोर्ट में धमाका हुआ जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. इस घटना में भी सुनील पांडेय का नाम उछला क्योंकि जिस आरोपी की गिरफ्तारी हुई उसने कबूल किया कि साजिश में सुनील पांडेय ने मदद की थी.

तरारी विधानसभा क्षेत्र से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार परचा दाखिल करने वाले नरेंद्र पांडेय उर्फ सुनील पांडेय वहां के सभी उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा पढे़ लिखे हैं. उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है. यह उपाधि उन्होंने जल में रहते हासिल की है. रोहतास के नावाडीह गांव के रहने वाले सुनील पांडेय ने इंजीनियरिंग की भी डिग्री ली है. बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उनका किसी छात्र के साथ झगड़ा हुआ था जिसमें उन्होंने छात्र को चाकू मार दिया और भागकर गांव लौट गए. उसके बाद वे बेंगलुरु नहीं गए और राजनीति में उतर गए. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी राजनीति चमकाई और कई बार विधायक भी रहे.

 

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