Bihar election 2020: बिहार के श्रम मंत्री के इलाके में ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ के नारों का जोर

bihar election no road no vote: बिहार का एक इलाका ऐसा भी है जहां रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा जोर पकड़ने लगा है. आजादी के बाद से ही यहां सड़क नदारद है, इसलिए वोट नहीं देने पर लोग आमादा हो गए हैं. दरअसल यह सड़क 3 साल पहले ग्रामीण कार्य विभाग से किसी तरह बनाई गई थी जो वर्तमान में पूरी तरह बदहाली की कगार पर पहुंच चुकी है. 22 गांव के लोगों के लिए बरसात के मौसम में आवाजाही बेहद मुश्किल भरा साबित हुआ है.

जगह-जगह लगे पोस्टर

बिहार में चुनावी पारा चढ़ने लगा है और प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने में लग गए हैं लेकिन राज्य में एक इलाका ऐसा भी है जहां मतदाताओं की नाराजगी की वजह से कोई प्रत्याशी इलाके में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. ये इलाका है लखीसराय और शेखपुरा के बीच का जहां तकरीबन एक लाख लोगों ने इस बार मतदान नहीं करने का फैसला किया है. लखीसराय और शेखपुरा जिले को जोड़ने वाली सड़क जिसे पचना पथ के नाम से भी जाना जाता है, उसकी बदहाली की वजह से तकरीबन 22 गांव के लोगों ने मतदान की प्रक्रिया से नहीं जुड़ने का एलान कर दिया है. इसलिए पचना पथ पर बसे गांवों में “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा पूरी तरह जोर पकड़ चुका है.

वैसे पचना पथ की बदहाली की कहानी काफी पुरानी है और इस पथ पर बसे गांव के लोग सालों से एक पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं. लेकिन हर चुनाव में इन्हें कोरे आश्वासन के सिवा कुछ खास मयस्सर नहीं हो सका है. हालात से तंग आकर इस इलाके के लोगों ने दो महीने पहले 22 किलोमीटर की टूटी-फूटी सड़क पर मानव शृंखला बनाकर सरकार का ध्यान खींचने का काम किया था. वैसे इस इलाके का प्रतिनिधित्व दो कद्दावर नेता कर रहे हैं जिनका रसूख प्रदेश की सरकार में किसी से कम नहीं है. इसलिए यहां के स्थानीय लोग अब मानने लगे हैं कि चाहे वर्तमान मंत्री विजय सिन्हा हों या फिर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, दोनों ने यहां पर पीडब्लूडी की सड़क बनाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए हैं.

दरअसल वर्तमान सरकार में विजय सिन्हा श्रम मंत्री हैं और लखीसराय विधानसभा से विधायक. वहीं मुंगेर संसदीय क्षेत्र से साल 2019 में चुने गए सांसद हैं राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह. विजय सिन्हा बीजेपी के कद्दावर नेता सुशील मोदी के खास बताए जाते हैं, वहीं ललन सिंह प्रदेश के सीएम नीतीश कुमार के बेहद खास माने जाते हैं. ऐसे में पचना पथ का निर्माण नहीं होना लोगों के गले नहीं उतर रहा है. जौनी सिंह जो पचना पथ पर बसे कछियाना गांव के रहने वाले हैं, वे कहते हैं कि विजय सिन्हा का कार्यक्रम मंगलवार को इस इलाके में था लेकिन गांव के लोगों का विरोध देखकर उन्हें अपना कार्यक्रम टालना पड़ गया है.
1 लाख आबादी प्रभावित
दरअसल यह सड़क 3 साल पहले ग्रामीण कार्य विभाग से किसी तरह बनाई गई थी जो वर्तमान में पूरी तरह बदहली की कगार पर पहुंच चुकी है. 22 गांव के लोगों के लिए बरसात के मौसम में आवाजाही बेहद मुश्किल भरा साबित हुआ है. बेमौसम बरसात और सड़क के अभाव के चलते किसान, मज़दूर और छोटे व्यापारी सभी का खूब नुकसान हुआ है. ऐसे में लोगों ने तय कर लिया है कि मतदान का बहिष्कार कर वे चुनाव में दिल्ली की सरकार तक अपनी आवाज को पहुंचाएंगे. इस सड़क में पड़ने वाले लखीसराय विधान सभा के 22 गांव और शेखपुरा विधानसभा के एक दर्जन गांव की लगभग 1 लाख की आबादी है जो सीधे तौर पर रोजमर्रा की जिंदगी में प्रभावित होती है. इन गांवों में प्रमुख हैं पतनेर, मोरमा, डीहा, चकताही, तिलोखर, कछियाना, बिक्कम, दोगाय, जोकमैला, करौता, पचौता, जयमंगला, महसार, भदौस और खिरहो.

ये भी पढ़ें: Bihar Elections 2020: बिहार में गरीबी की ‘बहार’, सरकारें बदलती रहीं लेकिन नहीं बदली लोगों की दशा

सीएम को चिट्ठी लिखकर गुहार
इन गांवों के लोगों ने इलाके के तमाम कद्दावर नेताओं से कई बार मिन्नतें की हैं जिनमें बीजेपी बिधायक और श्रम मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सांसद ललन सिंह के अलावा शेखपुरा के जदयू विधायक रणधीर कुमार सोनी, एम एल सी संजय सिंह और सांसद चिराग पासवान तक शामिल हैं. इतना ही नहीं लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक को चिट्ठी लिखकर, अपनी समस्याओं से अवगत कराया लेकिन हालात में सुधार नहीं होने की वजह से लोगों ने लोकतंत्र के महापर्व से दूरी बनाए रखने का एलान कर दिया है. इस इलाके के पतनेर गांव के निवासी डॉ नीरज सिंह कहते हैं कि उन्होंने पिछले 3 दशक से इस सड़क को बनते नहीं देखा है. इसलिए हर वर्ग के लोगों की जिंदगी सालों से प्रभावित रही है. आलम यह है गांव के किसानों के लिए उनके पैदावार को बाजार पहुंचाना हो या फिर किसी बीमार या लाचार को अस्पताल, इन सभी हालातों का सामना करना बेहद कष्टकर होता है.
सड़क बनने से ये होंगे फायदे
वैसे साल 2019 के लोकसभा चुनाव में लोगों की उम्मीदें तब बढ़ गई थीं जब मुंगेर लोकसभा चुनाव लड़ रहे सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने चुनाव जीतने के 3 महीने के भीतर पचना पथ के निर्माण का वादा किया था. उनके प्रयास से गड्ढों को तात्कालिक रूप से भरवाया तो गया लेकिन इस 22 किलोमीटर लंबी सड़क को पीडब्लूडी के हवाले करा पाने में वो कामयाब नहीं हो पाए. स्थानीय पत्रकार श्रीनिवास कहते हैं कि शेखपुरा -लखीसराय पचना रोड का निर्माण सही तरीके से करा देने पर यह दो जिले के लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हो सकता है. इससे शेखपुरा और लखीसराय के बीच व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, साथ ही शेखपुरा के लोगों के लिए मेन रूट की ट्रेन पकड़ना (हावड़ा से नई दिल्ली) बेहद आसान हो जाएगा.
सड़क बनाने में असफल सरकार
दरअसल, पचना पथ की लंबाई 22 किलोमीटर है और इसके चलायमान हो जाने से शेखपुरा जिले से लखीसराय की दूरी 12 किलोमीटर कम हो जाती है, जिसे महज आधे घंटे यानी 30 मिनट में तय करना आसान हो जाता है.
लखीसराय के सामाजिक कार्यकर्ता नवीन कुमार सिंह कहते हैं कि रोड के लिए 15 वर्ष पूर्व वोट के बहिष्कार की बातें आम थीं पर आज यह देखकर बेहद आश्चर्य होता है. लेकिन जमीनी हकीकत यही है यहां सरकार सालों से सड़क का निर्माण कराने में असफल रही है. वहीं लखीसराय के सिविल एसडीओ संजय कुमार का कहना है कि मतदान में हिस्सा नहीं लेने की खबर जहां से भी आती है, प्रशासन उन्हें समझाने बुझाने में जुट जाता है. जहां तक पचना पथ का सवाल है तो वहां के लोगों को मतदान में हिस्सा लेने के लिए समझाने बुझाने का काम लखीसराय प्रशासन जरूर करेगा.

 

Related Posts