Bihar elections 2020: नीतीश के 6 ‘रत्नों’ में एक हैं वशिष्ठ नारायण जिन्हें JDU ने दी बड़ी जिम्मेदारी

Bihar elections 2020 vashistha Narain profile: जेडीयू में वशिष्ठ नारायण सिंह की बेहद खास पहचान है और वे पार्टी कार्यकर्ताओं से हर वक्त जुड़े रहते हैं. मददगार और मिलनसार स्वभाव को देखते हुए कार्यकर्ता उन्हें दादा बोलकर पुकारते हैं. वे नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं जिन पर मुख्यमंत्री हर स्थिति में भरोसा करते हैं.

वशिष्ठ नारायण सिंह

वशिष्ठ नारायण सिंह जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रमुख नेता हैं. राज्यसभा सदस्य वशिष्ठ नारायण सिंह बिहार जेडीयू के अध्यक्ष हैं. बिहार में अभी एनडीए की सरकार है जिसमें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जेडीयू प्रमुख घटक दल हैं. वशिष्ठ नारायण सिंह पूर्व में समता पार्टी के सदस्य थे. बाद में यह पार्टी जनता दल यूनाइटेड या जेडीयू हो गई. साल 2010 से वशिष्ठ नारायण सिंह जेडीयू के अध्यक्ष बने हुए हैं.

जेडीयू में वशिष्ठ नारायण सिंह की बेहद खास पहचान है और वे पार्टी कार्यकर्ताओं से हर वक्त जुड़े रहते हैं. मददगार और मिलनसार स्वभाव को देखते हुए कार्यकर्ता उन्हें दादा बोलकर पुकारते हैं. वे नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं जिन पर मुख्यमंत्री हर स्थिति में भरोसा करते हैं. उन्हें संगठन चलाने का काफी अनुभव है, इसलिए पार्टी ने उन्हें कई साल से अध्यक्ष बनाए रखा है. वशिष्ठ नारायण सिंह राजपूत जाति से आते हैं जिसका बिहार में बड़ा वोटबैंक है. वशिष्ठ नारायण सिंह बक्सर जिले से आते हैं जहां जेडीयू और बीजेपी दोनों के बड़ी संख्या में समर्थक हैं.

राजनीतिक सफर
वशिष्ठ नारायण सिंह का राजनीतिक सफर देखें तो वे 1998 में बिहार की विक्रमगंज लोकसभा सीट से समता पार्टी के सांसद बने थे. 1995 से 1998 तक बिहार में वे तत्कालीन समता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे. 2002 से राज्यसभा के सांसद हैं. मूल रूप से बक्सर के रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह पटना यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट तक की पढ़ाई की है. विशिष्ठ नारायण सिंह ने 30 नवंबर 2010 को पहली बार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाली थी. विजय चौधरी के स्पीकर बनने के बाद वशिष्ठ नारायण सिंह को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई. जेडीयू में उन्हें सवर्णों का चेहरा माना जाता है. आरजेडी में जैसे रघुवंश प्रसाद सिंह का स्थान था, वैसी ही बात वशिष्ठ नारायण सिंह के साथ है. सवर्ण वोट बैंक को देखते हुए जेडीयू हमेशा से वशिष्ठ नारायण सिंह को उच्च प्राथमिकता देती रही है.

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अहम कड़ी हैं वशिष्ठ नारायण सिंह
वशिष्ठ नारायण सिंह जेडीयू के छोटे-बड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं और नीतीश कुमार के बीच कड़ी माने जाते हैं. कहा जाता है कि जेडीयू के जो नेता-कार्यकर्ता मुलाकात कर नीतीश कुमार तक अपनी बात नहीं पहुंचा पाते, वे वशिष्‍ठ नारायण सिंह के माध्‍यम से ही अपनी बात रखते हैं. विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने जिन खास लोगों को जिम्मेदारी सौंपी है उनमें वशिष्ठ नारायण भी एक हैं. पिछले चुनावों में नीतीश कुमार ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को यह जिम्मेदारी दी थी, लेकिन इस बार वे चुनावी तैयारियों से बाहर हैं. इस बार नीतीश कुमार ने जिन लोगों को चुनाव की जिम्मेदारी दी है उनमें ललन सिंह, आरसीपी सिंह, विजय चौधरी, वशिष्ठ नारायण सिंह, अशोक चौधरी और संजय झा शामिल हैं.

इसलिए बनाए गए प्रदेश अध्यक्ष
जेडीयू नेतृत्व जिस तरह का काम चाहती है, वशिष्ठ नारायण सिंह उसी तरह के काम को अंजाम देते रहे हैं. इसी हिसाब से वे कार्यकर्ताओं को भी पार्टी से जोड़ते रहे हैं. पिछली बार जब वे अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुने गए तभी साफ हो गया कि पार्टी उनमें आंख मूंद कर भरोसा करती है. पिछले साल जब वे अध्यक्ष बनाए जा रहे थे, उससे पहले ऐसी बात सामने आई थी कि वशिष्ठ नारायण सिंह की तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए वे अध्यक्ष पद संभालना नहीं चाहते. फिर इस पद पर अशोक चौधरी को चुने जाने के कयास लगाए जाने लगे. लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसे को देखते हुए वशिष्ठ नारायण सिंह के नाम पर आम सहमति बनी और उन्हें निर्विरोध चुन लिया गया. वशिष्ठ नारायण सिंह का 4 दशक का राजनीतिक अनुभव रहा है, तीसरी बार राज्यसभा से सदस्य हैं और कार्यकर्ताओं के साथ उनके सहयोग को देखते हुए पार्टी ने बेहिचक अध्यक्ष पद पर उन्हें तीसरी बार बिठाया.

विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने वशिष्ठ नारायण सिंह को अध्यक्ष बनाया. नीतीश कुमार ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते थे कि अध्यक्ष पद पर कोई ऐसा व्यक्ति बैठे जिससे चुनावी माहौल में कोई दिक्कत पैदा हो. वशिष्ठ नारायण सिंह की कार्य कुशलता, कार्यशैली और राजनीति में दशकों के अनुभव को देखते हुए जेडीयू किसी भी सूरत में जोखिम उठाना नहीं चाह रही थी, लिहाजा पार्टी में एक सुर में उनके नाम पर सहमति बनी और उन्हें अध्यक्ष पद से नवाजा गया.

 

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