Bihar elections 2020: कौन हैं बिहार के ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह जिन पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं वोटर्स

Bihar elections 2020 Anant singh profile: अनंत सिंह ने 2005 विधानसभा चुनाव से अपनी राजनीति की शुरुआत की. फरवरी 2005, अक्टूबर 2005, 2010 का चुनाव उन्होंने जेडीयू से जीता. इसके बाद 2015 में वे निर्दलीय लड़े और जीत भी मिली. बाहुबली विधायक अनंत सिंह का शुरू से आपराधिक इतिहास रहा है. कई मामलों में उनके नाम जुड़ चुके हैं.

अनंत सिंह

बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का खासा प्रभाव रहा है. जेल में बंद बाहुबली भी आसानी से चुनाव जीत जाते हैं. इन्ही नेताओं में एक हैं अनंत सिंह जो पटना जिले के मोकामा के हैं. अनंत सिंह मोकामा विधानसभा से चार बार लगातार जीत हासिल करने के बाद पांचवीं बार फिर किस्मत आजमा रहें हैं. इससे पहले वे तीन बार जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से और चौथी बार निर्दलीय उम्मीदवार बने. आपराधिक छवि का होने के बावजूद मोकामा की जनता ने इनपर भरोसा जताकर हर बार जीत दिलाया. अबकी वे बार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उम्मीदवार बने हैं.

अपराध की दुनिया में जाना पहचाना नाम

बाहुबली विधायक अनंत सिंह का शुरू से आपराधिक इतिहास रहा है. कई मामलों में उनके नाम जुड़ चुके हैं. खुद अपने शपथ पत्र में अनंत सिंह ने बयां किया है कि 1979 में पहली बार हत्या के मामले में आरोपी बने थे. उनके खिलाफ हत्या का पहला मामला पटना जिले के बाढ़ थाने में दर्ज हुआ था. अबतक का उनका आपराधिक रिकॉर्ड देखें तो प्रदेश के अलग-अलग जिलों में उनके खिलाफ कुल 38 मामले दर्ज हैं. जिलावार मामलों की बात करें तो पटना जिले में 34, लखीसराय में 2, गया और मुंगेर में एक-एक मामले दर्ज हैं. इनमें हत्या के 6 मामले भी शामिल हैं. हालांकि कई मामले ऐसे हैं जिनमें उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं. विधायक बनने के पहले वे 12 आपराधिक मामलों में आरोपी बनाए गए थे. अनंत सिंह के खिलाफ हत्या के अलावा हत्या का प्रयास, धमकी, अपहरण, यूएपीए एक्ट सहित अन्य संगीन मामले दर्ज हैं. अनंत सिंह के खिलाफ कुल 38 मामले दर्ज हैं.

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छोटे सरकार के नाम से मशहूर अनंत सिंह की तूती पूरे इलाके में बोलती है. उनके बड़े भाई दिलीप सिंह भी विधायक रह चुके हैं. इस बार उनकी पत्नी ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर परचा भरा है. अनंत सिंह के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए इस डर बना हुआ है कि अनंत सिंह की उम्मीदवारी कहीं खारिज न हो जाए. ऐसी सूरत में उनकी पत्नी चुनाव मैदान में रहेंगी और उन्हें जिताना आसान रहेगा. अनंत सिंह फिलहाल जेल में बंद हैं और वे जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं. आपसी रंजिश में अनंत सिंह के परिवार-रिश्तेदारी में कई लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं जिसके बाद अनंत सिंह अपराध की दुनिया में उतर गए. उनके बहनोई सहित भाई और परिवार के कई करीबियों की हत्याएं हो चुकी हैं.

राजनीतिक सफर

अनंत सिंह ने 2005 विधानसभा चुनाव से अपनी राजनीति की शुरुआत की. फरवरी 2005, अक्टूबर 2005, 2010 का चुनाव उन्होंने जेडीयू से जीता. इसके बाद 2015 में वे निर्दलीय लड़े और जीत भी मिली. अनंत सिंह किसी जमाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी थे लेकिन बाद में संबंधों में खटास आ गई. इस बार वे आरजेडी से चुनाव लड़ रहे हैं. अनंत सिंह भूमिहार हैं और उन्हें इस नाते मोकामा में अपनी जाति का पूरा समर्थन मिलता है. मोकामा आसपास के इलाके में भूमिहार जाति के लोग बहुतायत में हैं. इसका फायदा अनंत सिंह को हमेशा मिलता रहा है. अनंत सिंह आज भले ही आरजेडी में हों लेकिन जब तक लालू यादव सक्रिय राजनीति में रहे, उन्होंने कभी अनंत सिंह को पसंद नहीं किया. आज जब लालू यादव चारा घोटाले में जेल में बंद हैं तो आरजेडी ने अनंत सिंह को अपना लिया है.

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अनंत सिंह का हाल में नीतीश कुमार से मतभेद हो गया और उन्होंने जेडीयू से दूरी बना ली. मोकामा में आरजेडी को एक ऐसे उम्मीदवार की जरूरत थी जो भूमिहारों का थोक वोट पा सके. इस लिहाज से अनंत सिंह फिट बैठ रहे थे जिसे देखते हुए आरजेडी ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है. हालांकि ऐसी खबरें हैं कि अनंत सिंह का आरजेडी में जाना मोकामा के लोगों को पसंद नहीं है. ऐसे में अनंत सिंह अगर जीतते हैं तो यह पूरी तरह से उनकी जीत होगी न कि आरजेडी की. अनंत सिंह का बाहुबल ऐसा है कि उनके खिलाफ कई मामले ऐसे हैं जिनमें गवाह अंतिम समय में पलट गए. ऐसे में कई मामलों में उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हो सके.

भूमिहारों के दम पर राजनीति

अनंत सिंह भूमिहार जाति से हैं और अपनी इस जाति का वे पूरा खयाल रखते हैं. मोकामा इलाके में किसी भी शादी-ब्याह में वे पहुंच जाते हैं और तन-मन-धन से लोगों की मदद करते हैं. न्योता मिलते ही अनंत सिंह शादी वाले घर पहुंच जाते हैं और वर-वधु को आशीर्वाद देते हैं. इस इलाके में लोगों को ‘छोटे सरकार’ का आशीर्वाद मिलना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी अनंत सिंह की इस खूबी से वाकिफ थे लेकिन बाद में दोनों के बीच तल्खियां बढ़ गईं. अनंत सिंह को जेल हो गई और यही से नीतीश कुमार के खिलाफ उनका सियासी अभियान शुरू हुआ. अनंत सिंह जब आखिरी बार जेल जा रहे थे, तब उन्होंने नीतीश कुमार को चुनाव में मजा चखाने की धमकी दी थी. आरजेडी ने इस तल्खी का फायदा उठाया और तेजस्वी यादव ने जाति की परवाह किए बगैर अनंत सिंह को अपने पाले में कर लिया. अब वे मोकामा विधानसभा से आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

 

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