Bihar elections 2020: कौन हैं सुभाषिनी यादव जो अचानक बिहार चुनाव में चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं?

Bihar elections 2020 shubhashini yadav:शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव ने राजनीति में कदम रखा है और वे कांग्रेस का दामन थामने जा रही हैं. उन्हें बिहारीगंज सीट से टिकट दिया जा सकता है. कांग्रेस को उम्मीद है कि शरद यादव की बेटी सुभाषिनी अपने पिता की राजनीति का फायदा लेते हुए विधानसभा सीट निकाल सकती हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:39 pm, Wed, 14 October 20
सुभाषिनी यादव

देश की राजनीति में शरद यादव का नाम जाना-पहचाना है. लोकसभा में 7 बार और राज्यसभा में 3 बार अपना राजनीतिक दमखम दिखा चुके शरद यादव वैसे तो जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के शीर्ष नेताओं में रहे हैं लेकिन 2016 में उनका संबंध विच्छेद हुआ और उन्होंने अपनी नई पार्टी बना ली. वे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे लेकिन नीतीश कुमार के साथ सियासी अनबन में उन्होंने खुद की अलग राह चुनी और लोकतांत्रिक जनता दल नाम से पार्टी बनाई. इस पार्टी का कोई गंभीर अस्तित्व नहीं रहा है और लोग इसे शायद ही जानते हैं. अब शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव ने राजनीति में कदम रखा है और वे कांग्रेस का दामन थामने जा रही हैं. उन्हें बिहारीगंज सीट से टिकट दिया जा सकता है.

सुभाषिनी यादव का पूरा नाम सुभाषिनी राज राव है. सुभाषिनी का मधेपुरा की बिहारीगंज सीट से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है. कांग्रेस को उम्मीद है कि शरद यादव की बेटी अपने पिता की राजनीति का फायदा लेते हुए विधानसभा सीट निकाल सकती हैं. इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए कांग्रेस ने सुभाषिनी यादव पर दांव लगाने की तैयारी की है. उधर शरद यादव का सियासी करियर उतार पर है और वे अब बीमार भी रहते हैं. पिछले लोकसभा में उन्होंने मधेपुरा से चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए. ऐसे में देखने वाली बात होगी कि उनकी बेटी अपने पिता की विरासत का कहां तक वहन कर पाती हैं.

51 सीटों पर लड़ेगी एलजेडी

बिहार विधानसभा की 243 में 51 सीटों पर शरद यादव-सुभाषिनी यादव की पार्टी एलजेडी चुनाव लड़ेगी. एलजेडी की बात कांग्रेस और आरजेडी से हुई थी लेकिन गठबंधन को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका. इसके बाद सुभाषिनी ने कांग्रेस जॉइन करने का निर्णय लिया. महागठबंधन का हिस्सा नहीं बनाए जाने से नाराज शरद यादव ने खुद की पार्टी को 51 सीटों पर उतारने का फैसला किया है. चुनाव के पहले फेज में एलजेडी महज एक सीट कुर्था पर लड़ेगी और बाकी के उम्मीदवार दूसरे और तीसरे फेज में मैदान में उतरेंगे.

ये भी पढ़ें: Bihar Election 2020: छात्र राजनीति से सत्ता तक, बिहार का वो नेता जिसके पद में हमेशा ‘डिप्टी’ लगा रहा

एलजेडी बिहार में कितनी सीटों और कहां से लड़ेगी इस पर फैसला होने में देरी हुई क्योंकि शरद यादव अब बीमार रहते हैं और उनकी राजनीतिक सक्रियता काफी घट गई है. एलजेडी पहले फेज के उम्मीदवारों का नाम तय नहीं कर पाई क्योंकि शरद यादव बीमार चल रहे थे. एलजेडी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक शरद यादव की राजनीतिक पहचान को देखते हुए उनके उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर रहे हैं. मध्य प्रदेश के रहने वाले शरद यादव ने आजीवन बिहार से राजनीति की है और मंडल आयोग के आंदोलन के दौरान वे लालू यादव और नीतीश कुमार के साथ खड़े रहे. कई बार संसद का सफर तय किया लेकिन 2019 में मधेपुरा से चुनाव हार गए.

सुभाषिनी यादव की शादी हरियाणा के एक राजनीतिक परिवार में हुई है. सुभाषिनी यादव ने पिछले साल लोकसभा चुनावों के दौरान मधेपुरा का दौरा किया था और उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के खिलाफ प्रचार किया था. सुभाषिनी ने नीतीश कुमार के खिलाफ एक बयान में कहा था कि वे पूरा बिहार छोड़कर मधेपुरा में डेरा जमाए बैठे हैं, इसका मतलब कि वो डरे हुए हैं. सुभाषिनी ने ये बयान तब दिया था जब उनके पिता शरद मधेपुरा से चुनाव लड़ रहे थे. हालांकि शरद यादव इस चुनाव में हार गए. बाद में ऐसी अटकलें थीं कि शरद यादव दोबारा जेडीयू में आ सकते हैं लेकिन बात नहीं बनी. अब उनकी पार्टी अकेले बिहार चुनाव में उतर रही है.