Bihar elections 2020: बिहार की राजनीति का दलित चेहरा हैं श्याम रजक, RJD-JDU सरकार में रहे मंत्री

Bihar elections shyam rajak profile: श्याम रजक पहले भी आरजेडी में थे और राबड़ी देवी की कैबिनेट में मंत्री थे, लेकिन 2009 में आरजेडी के फुलवारी शरीफ से विधायक पद से इस्तीफा देकर श्याम रजक जेडीयू से जुड़ गए थे. हालांकि वे उप चुनाव हार गए, लेकिन 2010 में विधायक बने और इन्हें मंत्री पद मिला.

श्याम रजक बिहार की राजनीति में कई वर्षों से बने हुए हैं. यह अलग बात है कि समय के साथ उन्होंने पार्टियां बदलीं और उन पार्टियों से जुड़ते रहे जहां उन्हें अपना भविष्य ‘उज्ज्वल’ दिखा. श्याम रजक फिलहाल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में हैं लेकिन इससे पहले वे जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में थे और नीतीश कुमार की बिहार सरकार में उद्योग मंत्री थे. उन्होंने आरजेडी का साथ छोड़कर जेडीयू का दामन थामा था. उस वक्त श्याम रजक आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के प्रिय नेताओं में एक थे लेकिन तब उन्हें आरजेडी का भविष्य सही नहीं दिखा और जेडीयू में चले गए. उनका राजनीतिक सफर बताता है कि वे आरजेडी से जेडीयू और फिर जेडीयू से आरजेडी से जुड़े और जब भी जुड़े उन्हें मंत्री बनाया गया. उनकी इस सियासी काबिलियत की हमेशा दाद दी जाती है. श्याम रजक 2010-15 तक जेडीयू सरकार में खाद्य मंत्री रहे. इससे पहले उन्होंने राबड़ी देवी की सरकार में ऊर्जा, जनसंपर्क और कानून मंत्रालय का जिम्मा संभाला है.

साल 2009 में उन्होंने आरजेडी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था. वे जेडीयू से जुड़ गए और इस दौरान उन्होंने अखिल भारतीय धोबी महासंघ का अध्यक्ष पद संभाला. श्याम रजक फुलवारी शरीफ से विधायक हैं. पहले लालू यादव और आरजेडी के खास नेता रहे श्याम रजक ने जेडीयू जॉइन की थी लेकिन इस साल अगस्त में फिर आरजेडी में चले गए. रजक दलित जाति से आते हैं, इसलिए पार्टियों ने इनके महत्व को समझते हुए हमेशा मंत्री पद से नवाजा है. आरजेडी हो या जेडीयू, श्याम रजक को उनके समाज (धोबी समुदाय) का महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता रहा है. इस जाति का बिहार में अच्छा-खासा वोट बैंक है जिसका फायदा पार्टियों को श्याम रजक के माध्यम से मिलता रहा है. श्याम रजक बिहार में दलित नेताओं में अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

राजनीतिक सफर

श्याम रजक पहले भी आरजेडी में थे और राबड़ी देवी की कैबिनेट में मंत्री थे, लेकिन 2009 में आरजेडी के फुलवारी शरीफ से विधायक पद से इस्तीफा देकर श्याम रजक जेडीयू से जुड़ गए थे. हालांकि वे उप चुनाव हार गए, लेकिन 2010 में विधायक बने और इन्हें मंत्री पद मिला. श्याम रजक 2015 में महागठबंधन से विधायक बने थे, लेकिन तब उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया. बाद में बीजेपी के साथ बने गठबंधन में नीतीश कुमार ने उन्हें फिर से मंत्री बनाया था. बिहार में तकरीबन 16 फीसद आबादी दलित समुदाय की है और श्याम रजक इसी समुदाय से आते हैं. इसे देखते हुए उन्हें बिहार का अहम दलित चेहरा माना जाता है. श्याम रजक कभी लालू यादव के बहुत खास हुआ करते थे. उनके अलावा रामकृपाल यादव भी लालू के करीबी नेताओं में एक थे. इसीलिए बिहार में कभी राम-श्याम की जोड़ी की चर्चा खूब होती थी. राम कृपाल यादव अब बीजेपी के साथ हैं. श्याम रजक भी आरजेडी छोड़ जेडीयू में गए थे लेकिन फिर उनकी घर वापसी हो गई है.

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बिहार के कई अन्य नेताओं की तरह श्याम रजक की राजनीतिक पारी भी छात्र राजनीति से हुई. उन्होंने 1974 में जेपी आंदोलन से जुड़ कर अपनी सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी. इसके बाद 1995 में वे आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत कर विधायक बने. फुलवारी शरीफ विधानसभा सीट श्याम रजक का सियासी गढ़ रहा है. श्याम रजक 1995 के बाद 2000, फरवरी 2005 और नवंबर 2005 में आरजेडी से विधायक बने. इस दौरान लालू यादव से लेकर राबड़ी देवी की सरकार में अलग-अलग कैबिनेट मंत्री का पद संभाला. बाद में उन्होंने 2009 में आरजेडी छोड़कर जेडीयू का दामन थाम लिया. 2010 और 2015 के चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी के तौर पर विधायक बने और नीतीश कुमार सरकार में मंत्री बनाए गए.

फुलवारी शरीफ सीट से पत्ता साफ

फुलवारी शरीफ सीट से श्याम रजक कई बार विधायक रहे हैं. जेडीयू छोड़ आरजेडी में आए रजक को लग रहा था कि उन्हें फिर से फुलवारी शरीफ सीट से लड़ने का मौका मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. महागठबंधन के तहत सीट शेयरिंग में यह सीट सीपीआई माले के खाते में चली गई है. श्याम रजक आगे किस सीट से लड़ेंगे, अभी यह तय नहीं है. हालांकि आरजेडी ने उन्हें यह आश्वासन जरूर दिया है कि जरूरत पड़ी तो एमएलसी बनाकर उन्हें मंत्री पद दिया जाएगा. इतना ही नहीं, आरजेडी ने स्टार प्रचारकों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें भी श्याम रजक का नाम नहीं है.

श्याम रजक ने क्यों छोड़ा जेडीयू

कांग्रेस के दलित चेहरा रहे अशोक चौधरी ने जब जेडीयू का दामन थामा तभी कयास लगाए जाने लगे कि श्याम रजक का अब आगे क्या होगा. श्याम रजक को लगा कि अशोक चौधरी के जेडीयू में शामिल होने के बाद वे पिछड़ सकते हैं. इसके बाद जेडीयू को लेकर उनके मन बदलते गए. उसी दौरान श्याम रजक का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई फैसलों पर एतराज जताते दिखे. इस वीडियो के बाद श्याम रजक को नीतीश कुमार ने अलग करना शुरू किया और अशोक चौधरी मुख्यमंत्री के काफी करीब आते चले गए. बिहार चुनाव को लेकर नीतीश कुमार की वर्चुअल रैलियों में या कार्यकर्ता सम्मेलन में श्याम रजक को नहीं देखा गया बल्कि उनकी जगह पर अशोक चौधरी दिखे. यही वजह रही कि श्याम रजक को लगा कि नीतीश कुमार उन्हें दरकिनार कर रहे हैं. नीतीश कुमार ने एक तरह से उन्हें दरकिनार कर भी दिया था. नीतीश कुमार ने स्याम रजक की भरपाई के लिए अशोक चौधरी को पार्टी में पूरी तरह से खड़ा कर लिया है. यह बात श्याम रजक भलीभांति समझ चुके थे और तभी उन्होंने राबड़ी देवी से संपर्क साधना शुरू किया और उनकी घर वापसी हुई.

 

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