Bihar Election 2020: छात्र राजनीति से सत्ता तक, बिहार का वो नेता जिसके पद में हमेशा ‘डिप्टी’ लगा रहा

Bihar elections 2020 sushil modi profile: साल 2004 में वे 14वीं लोकसभा के सदस्य बने. उस चुनाव सुशील मोदी ने भागलपुर सीट पर प्रख्यात वामपंथी (सीपीएम) नेता सुबोध राय को हराया और संसद पहुंचे. इसके बाद 2005 में एनडीए की सरकार बनी. सुशील मोदी ने उस साल लोकसभा से इस्तीफा दिया और बिहार में डिप्टी सीएम का पद संभाला.

सुशील कुमार मोदी

सुशील कुमार मोदी बिहार सरकार में उप-मुख्यमंत्री हैं. वे बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का चेहरा भी हैं. बिहार में एनडीए के दो प्रमुख घटक दल बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में जिन दो चेहरों की बात होती है उनमें नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी हैं. शासन चलाने में इन दोनों नेताओं की केमेस्ट्री सराहनीय है. यही कारण है कि बीजेपी वर्षों से सुशील कुमार मोदी के कद और प्रभार में कोई बदलाव नहीं करती. मौजूदा सरकार की बात करें तो 2017 से सुशील कुमार मोदी बिहार सरकार में डिप्टी सीएम के पद पर बने हुए हैं. सुशील मोदी 2005 लेकर 2013 तक बिहार के डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री रहे हैं.

सुशील कुमार मोदी बीजेपी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आजीवन सदस्य हैं. उन्होंने बिहार की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और बीजेपी को बिहार में बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका रही है. 5 जनवरी 1952 को पटना में जन्मे सुशील कुमार मोदी पेशे से राजनेता हैं और उनकी पढ़ाई-लिखाई पोस्ट ग्रेजुएट तक हुई है. सुशील मोदी के बारे में एक दिलचस्प किस्सा यह है कि उन्होंने 1962 चीन युद्ध के दौरान स्कूलों छात्रों को एकजुट करने की बड़ी मुहिम चुलाई थी. उस वक्त उन्हें सिविल डिफेंस का कमांडर बनाया गया था जिनका काम छात्रों को शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए ट्रैनिंग देना था.

राजनीतिक सफर

सुशील कुमार मोदी आरएसएस में सक्रिय भूमिका निभाते हुए बीजेपी की राजनीति में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते रहे. जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और बीजेपी की बात जन-जन तक पहुंचाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. इसका प्रतिफल उन्हें मिला और वे विधानसभा से लेकर संसद तक पहुंचे. पार्टी ने उन्हें समय के साथ पदों से नवाजा जिसकी जिम्मेदारी उन्होंने गंभीरता से निभाई.

सुशील मोदी ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी बड़ी भूमिका निभाई है और आपातकाल के दौरान वे 5 बार गिरफ्तार किए गए थे. गिरफ्तारी के बावजूद वे अपने इरादों से नहीं डिगे मीसा कानून के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहे. इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा.

सुशील कुमार मोदी 1990 में सक्रिय राजनीति में शामिल हुए और सफलतापूर्वक पटना केंद्रीय विधानसभा (कुम्हरार विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र) से चुनाव लड़ा. इसी साल उन्हें बीजेपी बिहार विधानसभा दल का मुख्य सचेतक बनाया गया. 1996 से 2004 तक वे राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे. सुशील मोदी ने ही पटना हाईकोर्ट में आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी, जिसे बाद में चारा घोटाले के रूप में जाना गया. 2004 में वे भागलपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए लोकसभा के सदस्य बने.

सांसद से डिप्टी सीएम तक का सफर

साल 2004 में वे 14वीं लोकसभा के सदस्य बने. उस चुनाव में सुशील मोदी ने भागलपुर सीट पर प्रख्यात वामपंथी (सीपीएम) नेता सुबोध राय को हराया और संसद पहुंचे. इसके बाद 2005 में एनडीए की सरकार बनी. सुशील मोदी ने उस साल लोकसभा से इस्तीफा दिया और बिहार में डिप्टी सीएम का पद संभाला. साल 2006 में सुशील मोदी को बिहार का वित्त मंत्री बनाया गया. 2010 के बिहार चुनाव में वे किसी सीट से नहीं उतरे और बीजेपी का कैंपेन संभालने का जिम्मा लिया. 2017 में वे फिर डिप्टी सीएम बनाए गए, इस पद पर उनकी यह पांचवीं बार जिम्मेदारी थी. 2017 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जेडीयू का गठबंधन टूटा और इसमें सुशील मोदी की बड़ी भूमिका थी. जेडीयू और बीजेपी में गठबंधन हुआ और सरकार बनी. पिछले चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं था लेकिन बाद में दोनों पार्टियां एक बार फिर साथ आईं.

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सुशील मोदी शुरू से आरएसएस के सदस्य रहे हैं और उनकी यह यात्रा 1962 में शुरू हुई थी. आरएसएस में ऑफिशर्स ट्रेनिंग कोर्स (ओटीसी) को उच्च स्तरीय ट्रेनिंग माना जाता है जो तीन साल का होता है. सुशील मोदी ने यह कोर्स पूरा किया है. सुशील कुमार मोदी मैट्रिक की पढ़ाई के बाद ही आरएसएस से जुड़ गए थे और इस दौरान उन्होंने दानापुर, खगौल आदि जगहों पर विस्तार की जिम्मेदारी निभाई. उन्होंने आरएसएस के अलग-अलग पदों पर काम किया है. बाद में वे आरएसएस पटना की सांध्य शाखा के प्रभारी बनाए गए.

कब तक डिप्टी सीएम?

एक सवाल हमेशा से उठते रहे हैं कि बिहार बीजेपी के सबसे बड़े नेता और राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी क्या हमेशा डिप्टी ही बने रहेंगे? वे बरसों से डिप्टी सीएम हैं. जब वे छात्र राजनीति में थे तब भी डिप्टी ही थे. लालू प्रसाद यादव पटना छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए थे और सुशील मोदी महासचिव बने थे. लालू हमेशा यह बात कहते हैं कि सुशील मोदी उनके डिप्टी थे, छात्र संघ की राजनीति में. मुख्य धारा की राजनीति में सुशील मोदी बीजेपी के सबसे बड़े नेता हैं पर सरकार में हमेशा डिप्टी ही रहे. नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के समय वे उप मुख्यमंत्री बने थे और पिछले 15 साल में से करीब 11 साल सिर्फ डिप्टी CM ही रहे हैं.

 

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