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Bihar Election 2020: ‘भूरा बाल साफ करो’ का दाग धोना चाहती है RJD, जानें कितना मददगार साबित होंगे रामा सिंह

राघोपुर में राजपूतों का वोट बीजेपी को जाता रहा है. तेजस्वी यादव इस वोटबैंक में सेंधमारी करना चाहते हैं. इसी तैयारी में उन्होंने रामा सिंह के माध्यम से राजपूत समुदाय में एक संदेश देना चाहा है. एक तरह से बीणा देवी को टिकट देकर लोगों को यह संदेश दिया जा चुका है. बीजेपी ने भी यहां तेजस्वी को मात देने के लिए बड़ी तैयारी की है. आने वाले वक्त में पता चल पाएगा कि तेजस्वी या बीजेपी, सियासी मैदान में कौन भारी पड़ता है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:37 pm, Thu, 15 October 20
रामा सिंह और उनकी पत्नी बीणा देवी

बिहार के बाहुबली नेताओं में एक नाम रामा सिंह का भी है. इनका पूरा नाम रामा किशोर सिंह है जो वैशाली जिले से आते हैं. रामा सिंह की राजनीतिक कर्मभूमि वैशाली रही है और वहां से वे सांसदी निभा कर चुके हैं. 2014 में रामा सिंह ने वैशाली संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. रामा सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह को इसी सीट पर तकरीबन 1 लाख से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी. रामा सिंह बाहुबली होने और आपराधिक छवि का होने के बावजूद वैशाली के लोगों में काफी लोकप्रिय हैं और लोग उन्हें जबर्दस्त समर्थन देते रहे हैं. रामा सिंह खुद राजपूत जाति से आते हैं, इस लिहाज से वैशाली जिले के राजपूत समुदाय के लोग उनका बढ़-चढ़ कर सहयोग करते हैं.

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू यादव के ना-नुकुर के बावजूद उनके बेटे तेजस्वी यादव ने रामा सिंह को अपनी पार्टी में शामिल करने का प्रयास किया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका. रामा सिंह की एंट्री का विरोध लालू यादव इसलिए भी करते रहे क्योंकि वैशाली के ही आरजेडी के कद्दावर नेता स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह नहीं चाहते थे कि आरजेडी में उन्हें शामिल किया जाए. इसके लिए उन्होंने जेल में बंद लालू यादव को पत्र भी लिखा था. बाद में रघुवंश प्रसाद को जब लगा कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो उन्होंने आरजेडी से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा के कुछ दिन बाद ही दिल्ली के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया. ऐसी खबरें थीं कि रघुवंश प्रसाद सिंह आरजेडी छोड़ नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हो सकते हैं लेकिन ऐसा होने से पहले ही वे चल बसे. कुछ दिन बाद रघुवंश सिंह के बेटे सत्यप्रकाश को जेडीयू में शामिल किया गया.

रामा सिंह की पत्नी को टिकट
रामा सिंह आरजेडी में शामिल नहीं हो सके लेकिन उनकी पत्नी को आरजेडी ने टिकट देकर एक तरह से पिछले दरवाजे से रामा सिंह की एंट्री करा ली है. तेजस्वी यादव की अर्से से वैशाली के राजपूत वोटों पर नजर है. इससे पहले रघुवंश सिंह राजपूत नेता थे लेकिन वे अब नहीं रहे. उनके बेटे आगे चलकर उनकी छाप हो सकते हैं लेकिन जेडीयू ने उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है. ऐसे में आरजेडी के सामने एक ही विकल्प था कि रामा सिंह को शामिल कराया जाए. अब रघुवंश सिंह इस दुनिया में नहीं रहे, इसे देखते हुए रामा सिंह की एंट्री आरजेडी के लिए भारी पड़ सकती थी. रघुवंश सिंह के समर्थन में बना माहौल आरजेडी के लिए उलटा पड़ सकता था, इसलिए रामा सिंह को शामिल नहीं कर उनकी पत्नी को टिकट दिया गया है.

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आरजेडी ने अभी हाल में रामा सिंह को टिकट न देकर उनकी पत्नी बीणा सिंह को महनार विधानसभा सीट से उतारा है. वैशाली जिले में रामा सिंह की गिनती एलजेपी के बड़े नेताओं में की जाती है और सवर्णों के बीच उनका बड़ा वोट बैंक है. 2014 में रामा सिंह ने रघुवंश को हराया, वो भी भारी मतों से. इस साल अगस्त महीने में रामा सिंह को आरजेडी में शामिल कराने की अटकलें थीं लेकिन दिल्ली एम्स में भर्ती रघुवंश सिंह ने इसके विरोध में अस्पताल से ही लालू यादव के नाम अपना इस्तीफा भेज दिया. बाद में रामा सिंह की एंट्री पर विराम लग गया लेकिन उनकी पत्नी बीणा देवी शामिल हो चुकी है. लोग इसे एक तरह से रामा सिंह की एंट्री ही बता रहे हैं.

दाग धोना चाहती है आरजेडी
कभी लालू यादव का एक जुमला ‘भूरा बाल साफ करो’ काफी चर्चित हुआ था. इसमें लालू यादव ने खुलेआम भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ जातियों को चुनौती देने का आह्वान किया था. आरजेडी पर यह दाग शुरू से था कि उसे चार सवर्ण जातियां पसंद नहीं हैं. इस दाग को धोने के लिए आरजेडी शुरू से प्रयासरत थी. इसी का नतीजा था कि रघुवंश सिंह को पार्टी ने हमेशा बड़े ओहदे पर रखा और समय के साथ राजपूत-भूमिहार नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के प्रयास चलते रहे. वैशाली जिले में इसी कोशिश के तहत रामा सिंह को पार्टी में लाने की तैयारी थी जिस पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. खुद तेजस्वी यादव बोल चुके हैं कि उनकी पार्टी पर सवर्ण विरोधी होने का आरोप लगता रहा है जबकि उनकी पार्टी कई सवर्ण नेताओं को तरजीह देती रही है.

रामा सिंह को इतनी तवज्जो क्यों
रामा सिंह या उनकी पत्नी को आरजेडी में लेने की इतनी जल्दी क्यों? यह सवाल काफी अहम है क्योंकि लोग पूछ रहे हैं कि रघुवंश प्रसाद सिंह जीते जी रामा सिंह का विरोध करते रहे तो इन्हें पार्टी में शामिल कराने की इतनी जल्दी क्यों दिख रही है. इसका जवाब राघोपुर विधानसभा सीट है जहां से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव खड़ा होते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में 40-45 हजार राजपूत वोटर्स हैं जिन पर तेजस्वी यादव की नजर है. सर्वण खासकर राजपूत शुरू से आरजेडी से खफा रहे हैं. इस स्थिति को रघुवंश सिंह ने कुछ हलका किया था लेकिन अब वे नहीं रहे. ऐसी स्थिति में आरजेडी को ऐसे किसी नेता की दरकार है जो राजपूतों में अच्छी पकड़ रखता हो. इस लिहाज से रामा सिंह अहम भूमिका निभा सकते हैं. राघोपुर में राजपूतों का वोटबैंक बीजेपी को जाता रहा है. तेजस्वी यादव इस वोटबैंक में सेंधमारी करना चाहते हैं. इसी तैयारी में उन्होंने रामा सिंह के माध्यम से राजपूत समुदाय में एक संदेश देना चाहा है. एक तरह से बीणा देवी को टिकट देकर लोगों को यह संदेश दिया जा चुका है. बीजेपी ने भी यहां तेजस्वी को मात देने के लिए बड़ी तैयारी की है. आने वाले वक्त में पता चल पाएगा कि तेजस्वी या बीजेपी, सियासी मैदान में कौन भारी पड़ता है.