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Bihar election 2020: ‘वोट कटवा’ साबित हो सकते हैं छोटे राजनीतिक दल

राजनीतिक विश्लेषक (Political Analyst) संतोष सिंह का कहना है कि चुनाव में छोटे राजनीतिक दल (Small Political Parties) अपनी संभावना भले ही नहीं बना सकें, लेकिन दूसरों की संभावनाओं को कमजोर जरूर कर सकते हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 1:23 pm, Thu, 15 October 20
बिहार चुनाव में छोटे दल सिर्फ वोट कटवा ही साबित हो सकते हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के मद्देनजर इस बार राज्य की राजनीति में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं. छोटे-छोटे राजनीतिक दल (Small Political Parties) सत्ता तक पहुंचने के लिए चुनाव में जोर आजमाइश कर रहे हैं. इसी वजह से कई नए गठबंधनों (New Alliance) का उदय हुआ है, और सभी गठबंधनों ने अपने-अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार भी तय कर लिए हैं. हालांकि चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए और आरजेडी (NDA-RJD) के बीच होना है. छोटे दल सिर्फ वोट कटवा ही साबित हो सकते हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (Maha Gathbandhan) को छोड़कर एनडीए के साथ आए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) का प्रभाव कुछ इलाकों को छोड़कर दूसरे इलाकों में न के बराबर है. कहा जा रहा है कि छोटे दल (Small Parties) भले ही गठबंधन बनाकर चुनावी मैदान में उतर आए हों, लेकिन उनकी क्षमता वोट कटवा से बहुत ज्यादा नहीं है.

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‘बिहार चुनाव में वोट कटवा का काम करेंगे छोटे दल’

पटना के वरिष्ठ पत्रकार और बिहार की राजनीति को करीब से जानने वाले मनोज चौरसिया ने कहा कि छोटे दलों की भूमिका इस चुनाव में कहीं नजर नहीं आ रही है, उन्होंने यह भी माना कि एनडीए से अलग हटकर बिहार में चुनाव लड़ रही एलजेपी कई इलाकों में चुनाव को प्रभावित जरूर करेगी. उन्होंने कहा कि छोटे दल गठबंधन के जरिए भले ही चुनावी मैदान में हैं, लेकिन कई ऐसे दल भी हैं, जिनकी बिहार में कोई पहचान नहीं है.

बतादें कि एनडीए में शामिल वीआईपी पार्टी 11 सीटों पर, जबकि ‘हम’ सात सीटों पर चुनाव लड़ रही है. दोनों पार्टियां लोकसभा चुनाव में तीन सीटों पर चुनाव लड़ी थी, और सभी सीटों पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. वीआईपी को दो फीसदी से भी कम वोट मिले थे.

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी महागठबंधन से अलग होकर बीएसपी, एआईएमआईएम समेत छह राजनीतिक दलों के साथ मिलकर ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट के तहत चुनाव लड़ रही है.

कुछ इलाकों में जाप-AIMIM की अच्छी पकड़

वहीं पूर्व सांसद पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी भी आजाद समाज पार्टी समेत कई दलों के साथ प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में है, जबकि लोकसभा चुनाव में पप्पू यादव भी अपनी लोकसभा सीट नहीं बचा सके थे.

राजनीतिक विश्लेषक संतोष सिंह का कहना है कि चुनाव में छोटे दल अपनी संभावना भले ही नहीं बना सकें, लेकिन दूसरों की संभावनाओं को क्षीण जरूर कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी और ओवैसी की एआईएमआईएम की कुछ इलाकों में पकड़ है, इललिए कुछ हद तक यह दूसरों को प्रभावित जरूर कर सकती हैं.

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एलजेपी ने भी बिहार चुनाव में 143 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. वहीं दूसरे राज्यों में सत्ता का स्वाद चखने वाली क्षेत्रीय पार्टियों का कभी भी बिहार की राजनीति में ज्यादा दखल नहीं रहा है, इस चुनाव भी स्थिति ज्यादा बदलने की उम्मीद नहीं है.