बिहार विधानसभा चुनाव 2020: नीतीश कुमार क्यों नहीं लड़ते चुनाव?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने साल 2004 के बाद से कभी भी चुनाव नहीं लड़ा. वह हमेशा विधान परिषद की सदस्यता के जरिए ही मुख्यमंत्री बनते रहे हैं.
Bihar ssembly election 2020: LJP targets nitish kumar, बिहार विधानसभा चुनाव 2020: नीतीश कुमार क्यों नहीं लड़ते चुनाव?

15 साल से बिहार (Bihar) की सत्ता पर काबिज जेडीयू (JDU) के मुखिया नीतीश कुमार इन दिनों थोड़ी मुश्किल का सामना कर रहे हैं. पहले नीतीश कुमार के नाम पर विरोधी दल ही आवाज बुलंद करते थे, लेकिन इस बार एनडीए का घटक दल एलजेपी भी उनके विरोध में उतर आया है. एलजेपी लगातार नीतीश सरकार के कामकाज के तरीकों से लेकर उनके नेतृत्व और बिहार में सीएम फेस होने पर सवाल उठा रही है. हालांकि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व साफ कर चुका है कि वो बिहार का चुनाव नीतीश कुमार को आगे रखकर ही लड़ेंगा. लेकिन एलजेपी लगातार उन पर हमले कर रही है. एलजेपी ने प्रधानमंत्री मोदी (Modi) से एक सर्वे का हवाला देकर नीतीश की लोकप्रियता में कमी आने की शिकायत की है.

15 साल के शासन के बाद भी अगर एनडीए नीतीश कुमार को आगे रखकर चुनाव लड़ने जा रहा है तो ये एक कद्दावर राजनेता के तौर पर नीतीश कुमार की व्यक्तिगत उपलब्धि है. लेकिन सवाल यह उठता है कि, अगर नीतीश इतने ही दमदार राजनेता हैं, तो वे चुनाव क्यों नहीं लड़ते. नीतीश कुमार 6 बार बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं, लेकिन 2005 से लगातार वो विधानपरिषद की सदस्यता लेकर ही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठते रहे हैं.

नीतीश कुमार ने 2004 में आखिरी बार लड़ा चुनाव

नीतीश कुमार (nitish Kumar) ने चुनाव में 2004 में आखिरी बार अपनी किस्मत आजमाई थी. 2004 के चुनाव में उन्होंने नालंदा लोकसभा सीट से जीत भी हासिल की थी. 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद बनी बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की सरकार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, उन्होंने विधानपरिषद की सदस्यता ली. इसके बाद नीतीश लगातार विधान परिषद की सदस्यता के जरिए मुख्यमंत्री बनते रहे.

बिहार में सुशासन बाबू की छवि लिए हर चुनाव में जेडीयू को सत्ता दिलवाने वाले नीतीश कुमार खुद चुनावी राजनीति से क्यों दूर रहते हैं. नीतीश कुमार ने सियासत में अपनी पारी छात्र राजनीति से शुरू की थी. हालांकि उस वक्त से लेकर आज तक नीतीश कुमार को व्यक्तिगत तौर पर चुनाव में उतनी कामयाबी नहीं मिली, जितनी उनके दौर के दूसरे नेताओं को मिली.

पहले लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार को मिली हार

1977 के जेपी आंदोलन में नीतीश कुमार ने सक्रीय राजनीति में एंट्री की. 1977 में लालू यादव ने अपने पहले ही लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की, लेकिन नीतीश कुमार को हार का सामना करना पड़ा. 1985 में वह पहली बार विधायक चुने गए. नीतीश ने अपने गृहजिले नालंदा के हरनौत विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. इसके बाद नीतीश कुमार राजनीति में कामयाबी की सीढ़ियां तेजी से चढ़ते गए.

नीतीश कुमार  ने 1989 के लोकसभा चुनाव में बाढ़ लोकसभा सीट से जीत हासिल की. इसके बाद नीतीश कुमार लगातार 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव जीतते गए. 2004 लोकसभा चुनाव में उन्हें अपनी जीत को लेकर थोड़ा संशय था, जिसकी वजह से उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट बाढ़ के साथ ही नालंदा लोकसभा सीट से भी नामांकन भरा. उनकी आशंका सही साबित हुई. नीतीश नालंदा सीट से तो जीत गए, लेकिन बाढ़ लोकसभा सीट से उन्हें हार मिली. इसके बाद उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा.

साल 2000 में सात दिन के लिए मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार

नीतीश,कुमार साल 2000 में सात दिनों के लिए बिहार के मुख्यमंत्री बने. 2004 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha) में एनडीए की हार के बाद नीतीश कुमार ने अपना पूरा ध्यान राज्य की राजनीति पर लगा दिया. भ्रष्टाचार के भीषण आरोपों और कानून व्यवस्था के मामले में गर्त में जा चुके बिहार के लालू राज से जनता त्रस्त थी, इस दौरान नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति में एंट्री को अवसर की तरह देखा.

2005 में नीतीश कुमार ने संसद की सदस्यता से दिया इस्तीफा

साल 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को जीत हासिल हुई और नीतीश कुमार सीएम की कुर्सी पर काबिज हुए. इसके बाद उन्होंने संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता का रास्ता अख्तियार किया, इसके बाद से लगातार वो विधान परिषद के सदस्य ही रहे हैं, और लगातार मुख्यमंत्री बनते रहे हैं.

नीतीश कुमार लगातार 15 सालों से बिहार की सत्ता पर काबिज जरूर हैं, लेकिन ये भी देखना होगा कि वो लगातार गठबंधन की सरकार का नेतृत्व करते रहेंगे या नहीं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक मुख्यमंत्री को विधानसभा चुनाव लड़कर आना चाहिए. लेकिन बिहार में न मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा का चुनाव लड़ते हैं और न ही डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी.

Related Posts