Bihar election 2020: घोसी सीट पर 34 सालों तक रहा एक परिवार का कब्जा, जिसने खत्म किया वो मंत्री बना

घोसी विधानसभा ( ghosi assembly seat) को बिहार के सबसे चर्चित विधानसभा में से एक बनाने के पीछे 2 कारण हैं, पहला ये है कि प्रदेश के शिक्षामंत्री (krishna nandan prasad verma) का यहां से चुनकर आए हैं, दूसरा ये कि विधानसभा 38 साल तक एक ही परिवार को वोट देता रहा है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:36 pm, Wed, 30 September 20

बिहार विधानसभा चुनावों के लिए पहले चरण में जिन महत्वपूर्ण सीटों पर चुनाव होना है उसमें से एक है जहानाबाद जिले का घोसी विधानसभा क्षेत्र. घोसी विधानसभा को बिहार के सबसे चर्चित विधानसभा में से एक बनाने के पीछे 2 कारण हैं, पहला ये है कि प्रदेश के शिक्षामंत्री का यहां से चुनकर आए हैं, दूसरा ये कि विधानसभा 34 साल तक एक ही परिवार को वोट देता रहा है। चार दशकों तक एक ही परिवार को वोट देने वाली जनता और नेतृत्व करने वाला परिवार दोनों ही कुछ खास हैं इसलिए ये विधानसभा सीट 2020 के चुनावों में भी हॉट रहेगा.

जहानाबाद के मैप में यह विधानसभा जिले के पूर्वी हिस्से में है। इस विधानसभा की सीमाएं गया, नालंदा, और पटना जिले से जुड़ी हुई हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में शहरी आबादी बहुत कम संख्या में है, अधिकतर आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में ही निवास करती है.

नक्सल प्रभावित जहानाबाद जिले का हिस्सा होने का बावजूद यहां अन्य क्षेत्रों के मुकाबले शांति है. उद्योग धंधे के नाम पर यहां कुछ नहीं है. खेती – किसानी ही मुख्य पेशा है. फल्गु नदी से निकली नहरों से सिंचाई होने के चलते धान और गेहूं दोनों फसलों का उत्पादन बढ़िया होता है.

इस विधानसभा सीट पर किसी खास राजनीतिक दल की पकड़ हो या रही हो ऐसा कभी नहीं रहा. 1977 से 2010 तक यहां पर जगदीश शर्मा का कुनबा ही राज करता रहा है. शर्मा परिवार जिस पार्टी के साथ रहा विजय उसी को मिली। 2009 में जद यू से जगदीश शर्मा जहानाबाद के सांसद भी चुने गए उसके बाद घोसी विधानसभा सीट पर उन्होंने अपनी पत्नी को नीतीश कुमार के विरोध के बावजूद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी जिता लिया. बाद में उन्होंने अपने बेटे राहुल कुमार को भी इसी सीट से विधायक बनाया. पर 2015 के चुनाव में राहुल कुमार हिंदुस्तानी अवाम पार्टी से विधायक नहीं बन सके. इस चुनाव में वे महागठबंधन के जदयू प्रत्याशी कृष्ण नंदन वर्मा से चुनाव हार गए थे. इस भारी सफलता के बाद कृष्णनंदन वर्मा को सरकार में शिक्षा मंत्री बना दिया गया था.

2000 से 2015 तक का राजनीतिक परिदृश्य

2000 के चुनावों में जगदीश शर्मा निर्दलीय चुनाव जीते. उन्होंने माले के मिथलेश यादव को हराया

2005 में जगदीश शर्मा जदयू से चुनाव लड़े और कांग्रेस के अजय सिंह को हराया

2009 के मध्यावधि चुनाव में जगदीश शर्मा की पत्नी शांति र्मा निर्दलीय चुवाव जीता और राजद के दिनेश यादव को चुनाव हराया

2010 में जगदीश शर्मा के पुत्र राहुल कुमार जदयू से चुनाव लड़ा और लोजपा के जगदीश प्रसाद को चुनाव हराया

2015 में जद यू के कृष्णनंदन वर्मा ने हिंदुस्तानी अवाम के राहुल कुमार को हराया