गुप्तेश्वर पांडेः महीनों पुरानी है राजनीति में एंट्री की स्क्रिप्ट, पर वर्षों पुरानी कसक क्या पूरी हो पाएगी ?

सुशांत (sushant singh rajput) के परिवार को न्याय दिलाने के लिए डीजीपी (DGP) पद पर होते हुए गुप्तेश्वर पांडे (gupteshwar pandey) ने जिस तरह इस मामले में अपनी रुचि दिखाई उस समय ही यह लगने लगा था कि वो अपनी वर्षों पुरानी कसक को इस बार के विधानसभा चुनावों में पूरी करना चाहते हैं.

इस साल 14 जून को सुशांत (sushant singh rajput) की मौत के बाद गुप्तेश्वर पांडे (gupteshwar pandey )का नाम किसी के लिए अनजान नहीं है. बिहार के डीजीपी ( DGP) पद से उन्हें मंगलवार को वीआरएस ( VRS) की स्वीकृति मिल गई. अपने रिटायरमेंट के 5 महीने पहले ही स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से ये बात उठ रही है कि क्या वो बिहार विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने जा रहे है? सुशांत के परिवार को न्याय दिलाने के लिए डीजीपी पद पर होते हुए जिस तरह उन्होंने इस मामले में अपनी रुचि दिखाई उस समय ही यह लगने लगा था कि गुप्तेश्वर पांडे अपनी वर्षों पुरानी कसक को इस बार के विधानसभा चुनावों में पूरी करना चाहते हैं। पर बिहार के स्थानीय लोगों की मानें तो इसकी स्क्रिप्ट आज से 6 महीने पहले ही लिखी जा चुकी थी। हालांकि बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने जैसै किसी भी विचार को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे अपने शुभचिंतकों से इस मुद्दे पर बात करने की बाद ही कोई फैसला लेंगे.

रिया और सुशांत मामले में उनकी दिलचस्पी और नीतीश कुमार पर बयान
बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले गुप्तेश्वर पांडे ने डीजीपी रहते हुए सुशांत के लिए न्याय को बिहार की अस्मिता से जोड़ दिया था. उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से रिया, सुशांत, मुंबई पुलिस के बारे में जैसे ट्वीट किए उससे लगने लगा था कि उन्होंने बिहार की जनता के बीच जाने का मन बना लिया है. सुशांत मामले में न केवल बिहार पुलिस ने मामला दर्ज किया बल्कि एक पुलिस टीम को मुंबई भी भेजा. जब पुलिस टीम को मुंबई पुलिस का सहयोग नहीं मिला तो गुप्तेश्ववर पांडे ने एक आईपीएस अफसर को भी मुंबई भेजा । बीएमसी ने जब उक्त आईपीएस को क्वैरंटाइन कर लिया उस समय डीजीपी साहब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। अपने ट्वीटर हैंडल पर रिया चक्रवर्ती द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ सवाल उठाए जाने पर उन्होंने रिया की औकात को लेकर सवाल खड़ा कर दिया था। इस घटना के बाद शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने गुप्तेश्वर पांडे पर शाहपुर विधानसभा ने चुनाव लड़ने की तैयारी करने का आरोप लगाया था.

कम से कम 3 महीने पहले वीआरएस के लिए किया होगा आवेदन
मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के बेहद करीबी गुप्तेश्वर पांडे की राजनीति में एन्ट्री इसलिए भी स्क्रिप्टेड लगती है क्योंकि वीआरएस के लिए कम से कम 3 महीने पहले आवेदन दिया होगा. गुप्तेश्वर पांडे 31 जनवरी 2019 को बिहार के डीजीपी बने थे, उनका कार्यकाल 28 फरवरी 2021 तक के लिए था. इसका मतलब कि वे 5 महीने पहले वीआरएस ले रहे हैं. आखिर 5 महीने बाद रिटायर होने वाला शख्स वीआरएस क्यों लेगा?

पहले भी चुनाव लड़ने के लिए ले चुके हैं वीआरएस
2009 में भी गुप्तेश्वर पांडेय ने एक बार वीआरएस लेकर राजनीति में आने की पूरी तैयारी कर ली थी. पर बीजेपी से चुनाव लड़ने की मंशा पर उस समय विराम लग गया जब उन्हें टिकट नहीं मिला. बक्सर लोकसभा से गुप्तेश्वर पांडे को उम्मीद थी कि लालमुनि चौबे का टिकट कट जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ. बाद में उन्होंने राज्य सरकार को अर्जी दी कि वो फिर से पुलिस सेवा में आना चाहते हैं और तत्कालीन नीतीश सरकार ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली.

विवादों से भी रहा है नाता
2012 में जब गुप्तेश्वर पांडेय मुजफ्फरपुर में आईजी थे तो एक बच्ची का अपहरण हो गया था. बच्ची के परिवार का कहना था कि उसका अपहरण भूमाफिया ने किया है जो उनका घर कब्जा करना चाहते हैं. नवरुणा चक्रवर्ती नाम की यह बच्ची कभी वापस अपने घर नहीं आ सकी. अगवा होने के एक महीने बाद नवरुणा का कंकाल एक नाले में मिला. बाद में डीएनए टेस्ट से पता चला कि कंकाल नवरुणा का ही था. पर परिवार वालों ने अपनी बेटी के वापस आने की उम्मीद नहीं छोड़ी. इस मामले में 2014 में गुप्तेश्वर पांडेय और बिहार पुलिस के 2 कर्मियों के खिलाफ सीबीआई ने जांच भी की थी. सीबीआई के पास 5 सालों से ये केस है और अब भी ये केस बंद नहीं हुआ है. गुप्तेश्वर पांडे के डीजीपी बनने पर नवरुणा के पिता ने कहा कि मेरी बेटी के अपहरण मामले का अभियुक्त ही बिहार का डीजीपी बन गया तो अब क्या न्याय का क्या उम्मीद रखी जाए.

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