कोरोना और बाढ़ के बाद बिहार में जापानी बुखार की दस्तक, मार्च से अब तक 11 बच्चों की गई जान

मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल प्रशासन ने बताया कि 27 मार्च से अब तक, एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से पीड़ित 76 बच्चे यहां भर्ती हुए, जिनमें से 11 बच्चों की मौत हो गई है.

कोरोना और बाढ़ की मार झेल रहे बिहार में एक बार फिर से एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी जापानी इंसेफेलाइटिस ने दस्तक दे दी है. इस बीमारी के सबसे ज्यादा मामले मुजफ्फरपुर जिले से आते हैं. जिले श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने बताया कि 27 मार्च से अब तक 11 बच्चों की जान जा चुकी ही.

मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल प्रशासन ने बताया, “27 मार्च से अब तक, एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम / जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित 76 बच्चे यहां भर्ती हुए, जिनमें से 11 बच्चों की मौत हो गई है. दो बच्चे पीआईसीयू वार्ड में भर्ती हैं और 60 बच्चों की छुट्टी दे दी गई है.

मालूम हो कि बिहार में जापानी बुखार से हर साल कई बच्चों की जान जाती है. खासतौर से मुजफ्फपुर में इसका प्रकोप ज्यादा देखने को मिलता है. इससे पहले जून 2019 में जापानी बुखार ने 161 बच्चों की जान ले ली थी.

यह बीमारी 15 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादा होती है. इसमें बच्चे को बुखार, उलटी और सिरदर्द होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इस बीमारी का पहला मामला साल 1871 में सामने आया था. वहीं मुजफ्फरपुर जिले में इसका पहला केस साल 1995 में आया था.

किस साल कितने बच्चों की गई जान?

  • 2013- 143 मौत
  • 2014- 355 मौत
  • 2015- 11 मौत
  • 2016- 04 मौत
  • 2017- 11 मौत
  • 2018- 07 मौत

पूर्वी चंपारण के दो बच्चों में AES की पुष्टि

वहीं बुधवार को पूर्वी चंपारण के दो बच्चों में भी जापानी बुखार की पुष्टि हुई है. इस साल अब तक 56 बच्चों में ज्ञात और 20 बच्चों में अज्ञात AES की पुष्टि हुई है.

एसकेएमसीएच के शिशु विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी ने बताया है कि पैथोलॉजिकल जांच रिपोर्ट के आधार पर दो बच्चों में एईएस की पुष्टि हुई है. दोनों बच्चे पूर्वी चंपारण से रेफर होकर एसकेएमसीएच पहुंचे थे.

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