केसरिया विधानसभा सीट: यहां देखें प्रत्याशी, वोटर्स, जातिगत आंकड़े और इस सीट का पूरा डेटा

Kesaria Vidhan Sabha constituency: केसरिया विधानसभा सीट पर मुस्लिम और यादव बड़ी संख्या में हैं. इसलिए यहां एमवाई समीकरण का जादू चलता रहा रहा है और ये आरजेडी (RJD) के पाले में गिरता है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:55 pm, Sat, 17 October 20
केसरिया विधानसभा सीट पर मुस्लिम और यादव बड़ी संख्या में हैं. इसलिए यहां एमवाई समीकरण का जादू चलता रहा रहा और ये आरजेडी (RJD) के पाले में गिरता है.

बिहार एक बार फिर से अपना मुख्यमंत्री चुनने के लिए तैयार है. दूसरे चरण के मतदान के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. राज्य की केसरिया विधानसभा सीट एनडीए के धड़े से जेडीयू (JDU) के खाते में गई है और उसने यहां से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद रहे कमला मिश्रा मधुकर की बेटी शालिनी मिश्रा को टिकट दिया है. वहीं, आरजेडी (RJD) के टिकट पर संतोष कुशवाहा इस सीट से महागठबंधन के प्रत्याशी है. इस सीट से एलजेपी (LJP) ने रामशरण यादव को चुनावी मैदान में उतारा है. दूसरे चरण में 94 विधानसभा क्षेत्रों में तीन नवंबर को मतदान होना है.

सीट का इतिहास
एक समय सीपीआई का मजबूत किला रही पूर्वी चंपारण जिले की केसरिया विधानसभा सीट पर वर्तमान में राजद का कब्जा है. 2015 के विधानसभा चुनाव में राजद के राजेश कुमार ने भाजपा के राजेंद्र गुप्ता को करीब 16 हजार वोट से हराया था. अक्टूबर 2005 में भी राजेश कुमार राजद के टिकट पर यहां से विधायक चुने गए थे.

2010 में पहली बार भाजपा के टिकट पर यहां से सचींद्र सिंह ने जीत दर्ज की थी. 2000 और फरवरी 2005 के चुनावों में अब्दुल्ला जीते थे. 2000 में समता पार्टी के टिकट पर और 2005 में जदयू के टिकट उन्होंने चुनाव लड़ा था. केसरिया सीट से सीपीआई के पीतांबर सिंह लगातार चार बार और यमुना यादव लगातार दो बार चुनकर विधानसभा पहुंचे थे.

1952 के उप-चुनाव समेत अब तक इस विधानसभा सीट पर 17 बार वोट डाले गए हैं. इन चुनावों में 6 बार सीपीआई, पांच बार कांग्रेस, दो बार राजद, एक-एक बार भाजपा, जदयू, समता पार्टी और जनता पार्टी को जीत मिली है. सबसे अधिक बार इस सीट पर जीत हासिल करने वाली सीपीआई यहां आखिरी बार 1995 में जीती थी.

जातीय समीकरण
इस सीट पर मुस्लिम और यादव बड़ी संख्या में हैं. इसलिए यहां एमवाई समीकरण का जादू चलता रहा रहा और ये आरजेडी के पाले में गिरता है. इसके अलावा कोइरी, राजपूत और ब्राह्मण भी निर्णायक भूमिका में हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां 55% वोटिंग हुई थी, जो 2010 से 5% ज्यादा थी. पिछले चुनाव में यहां महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले 12% ज्यादा रहा था.

कुल वोटरः 2.58 लाख

पुरुष वोटरः 1.38 लाख (53.4%)
महिला वोटरः 1.20 लाख (46.5%)
ट्रांसजेंडर वोटरः 3 (0.001%)