मुजफ्फरपुर: चमकी बुखार ने मार्च से अब तक ली 11 बच्चों की जान, 66 हुए ठीक एक का इलाज जारी

चमकी बुखार एक वायरल (Viral) की तरह फैलता है, जिसमें में मरीज को तेज बुखार (High fever) और कुछ मामलों में उल्टियों की भी शिकायत होती है और दिमाग काम करना बंद कर देता है, वहीं दिल और किडनी पर सूजन आ जाती है.

मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच हॉस्पिटल में इस साल 11 बच्चों ने चमकी बुखार से दम तोड़ दिया.

बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (SKMCH Hospital) में इस साल 27 मार्च से अब तक 11 बच्चों ने एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम, मतलब जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis) से दम तोड़ दिया. अस्पताल के मुताबिक बीमारी से पीड़ित 77 बच्चे यहां भर्ती हुए थे, जिनमें 11 बच्चों की मौत (Death) हो गई. इस बीमारी को स्थानीय भाषा में चमकी बुखार (Chamki Fever) भी कहा जाता है.

रिपोर्ट के मुताबिक (According to Report) एक बच्चा अभी भी वॉर्ड नंबर दो में भर्ती है, जिसका इलाज(Treatment) किया जा रहा है, वहीं 62 बच्चों को ठीक होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज (Discharge) किया जा चुका है. पिछले साल चमकी बुखार की वजह से जिले में 140 बच्चों की मौत हो गई थी.

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वायरल की तरह फैलता है चमकी बुखार

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम या चमकी बुखार एक वायरल की तरह फैलता है, जिसमें मरीज को तेज बुखार और कुछ मामलों में उल्टियों की भी शिकायत होती है और दिमाग काम करना बंद कर देता है, वहीं दिल और किडनी पर सूजन आ जाती है.

चमकी बुखार को दिमागी बुखार भी कहा जाता है, यह एक खतरनाक और रहस्यमयी बीमारी है, अभी तक इसकी सही वजह का पता नहीं लगाया जा सका है. इस बीमारी के दौरान बच्चों के खून में सुगर और सोडियम की कमी हो जाती है.

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पिछले साल भी मार्च से जून के बीच मुजफ्फरपुर और बिहार के आसपास के लीची उत्पादक जिलों में एईएस के मामले देखने को मिले थे. कहा ये भी जाता है कि ज्यादा तादाद में खाली पेट लीची खाने की वजह से यह बीमारी होती है. साल 2019 में मुजफ्फरपुर में ये बीमारी एक महामारी की तरह फैली थी, जिसमें आसपास के इलाकों समेत 140 बच्चों की मौत हो गई थी.

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