नौतन विधानसभा सीटः यहां देखें प्रत्याशी, वोटर्स, जातिगत आंकड़े और इस सीट का पूरा डेटा

Chakai Vidhan Sabha constituency: नौतन विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम-यादव वोटरों का दबदबा है. कोइरी, रविदास और कुर्मी भी यहां निर्णायक भूमिका में हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 10:41 am, Sat, 17 October 20
नौतन विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम-यादव वोटरों का दबदबा है. कोइरी, रविदास और कुर्मी भी यहां निर्णायक भूमिका में हैं.

बिहार एक बार फिर अपना मुख्यमंत्री चुनने के लिए तैयार है. राज्य में चुनावी बयार बह रही है और दूसरे चरण की विधानसभा सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे सभी सियासी दलों के उम्मीदवारों ने अपनी जीत के लिए पूरा जोर लगा दिया है. राज्य की नौतन विधानसभा सीट महागठबंधन के धड़े से कांग्रेस (Congress) के खाते में गई है और उसने यहां से शेख कमरान को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं, बीजेपी (BJP) के टिकट पर श्री नारायण प्रसाद इस सीट से एनडीए के प्रत्याशी हैं.

सीट का इतिहास

नौतन विधानसभा क्षेत्र बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता केदार पांडेय का चुनावी गढ़ था. पिछले चुनाव में पहली बार यहां बीजेपी का खाता खुला था. 2015 के विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा के उम्मीदवार नारायण प्रसाद ने जेडीयू (JDU) के बद्रीनाथ प्रसाद महतो को 14 हजार से ज्यादा वोट से हराया था. 1951 में हुए पहले चुनाव से लेकर साल 1985 तक इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा.

कांग्रेस के टिकट पर पहली बार यहां से परबती देवी विधायक बनी थीं. 1990 में पहली बार कांग्रेस को इस सीट पर हार झेलनी पड़ी और सीपीआई के रवाकांत द्विवेदी नौतन से पहले गैर कांग्रेसी विधायक बने थे. पूर्व मुख्यमंत्री केदार पांडेय यहां से 1967, 1969, 1972 और 1977 में यहां से जीते थे. साल 2000 से बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी की मजबूत पकड़ है.

पिछले छह चुनावों में से चार बार यहां जेडीयू और उसकी मूल पार्टी समता पार्टी ने जीत का परचम लहराया है. 2009 और 2015 में उसे हार का सामना करना पड़ा था. नौतन से वर्तमान में विधायक नारायण प्रसाद साल 2010 में एलजेपी (LJP) के टिकट पर यहां से चुनाव लड़े थे. तब उन्हें जेडीयू प्रत्याशी मनोरमा प्रसाद ने हरा दिया था. लेकिन पांच साल बाद नारायण प्रसाद बीजेपी के टिकट पर यहां से चुनावी मैदान में उतरे और जीत हासिल की.

जातीय समीकरण

नौतन विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम-यादव वोटरों का दबदबा है. कोइरी, रविदास और कुर्मी भी यहां निर्णायक भूमिका में हैं. खास बात यह है कि यादव और मुस्लिम वोटरों के दबदबे के बावजूद भी आरजेडी को यहां जीत नहीं मिली है, जबकि ये उसके कोर वोटर माने जाते हैं.

1951 से अब तक हुए 15 चुनावों में सात बार कांग्रेस, तीन बार जेडीयू, एक-एक बार सीपीआई, समता पार्टी, बसपा, भाजपा और निर्दलीय जीतने में सफल रहे हैं. इस सीट पर सबसे ज्यादा 2015 में यहां 61.8% वोटिंग हुई थी. 2010 में यहां 55.9% वोटिंग हुई थी.

कुल वोटर: 2.67 लाख
पुरुष वोटर: 1.45 लाख (54.3%)
महिला वोटर: 1.22 लाख (45.6%)
ट्रांसजेंडर वोटर: 20 (0.007%)