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IMA के कोविड शहीदों की लिस्ट में तीसरे स्थान पर गुजरात, कोरोना से जंग में 38 डॉक्टरों की गई जान

देश में कोरोना (Corona) से मरने वाले लोगों की संख्या में गुजरात (Gujarat) आठवें स्थान पर है, राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,286 हैं. वहीं संक्रमित मामलों की संख्या में राज्य 12वें स्थान पर है, जहां संक्रमितों की कुल संख्या 1.22 लाख है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:33 pm, Sun, 20 September 20
प्रतीकात्मक

इंडियन मेडिकल एसोशिएशन (IMA) के आंकड़ों के अनुसार देश में कोरोना (Corona) से मरने वाले डॉक्टरों की संख्या में गुजरात तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. इस लिस्ट में पहले नंबर पर तामिलनाडु और दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश है. 10 सितंबर तक गुजरात में कोविड-19 की वजह से 38 डॉक्टरों की मौत हो गई है. शुक्रवार को वापी में 34 वर्षीय पीडियाट्रिशियन (Paediatrician) की इस बीमारी के चपेट में आने से मौत हो गई.

देश में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या में गुजरात आठवें स्थान पर है, राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 3,286 हैं. वहीं संक्रमित मामलों की संख्या में राज्य 12वें स्थान पर है, जहां संक्रमितों की कुल संख्या 1.22 लाख है.

आईएमए ने 16 सितंबर को कोविड मार्टियर्स (Covid Martyrs) की लिस्ट पेश की है. इस लिस्ट के अनुसार गुजरात में कोविड-19 से मौत के शिकार हुए डॉक्टरों की उम्र 34 से 82 वर्ष के बीच थी. 38 में से 29 डॉक्टरों की उम्र 50 से 70 के बीच थी. लिस्ट के मुताबिक अहमदाबाद के 15 डॉक्टरों की मौत हुई है. सूरत में संक्रमण के कारण 5 डॉक्टरों ने दम तोड़ दिया.

कोविड शहीदों में ज्यादातर प्राइवेट डॉक्टर

इस लिस्ट में ज्यादातर डॉक्टर निजी चिकित्सक हैं. उनमे से एक अमरेली के डॉक्टर पंकज जाधव (Pankaj Jhadhav) जो एक सरकारी चिकित्सा अधिकारी थे. 49 वर्षीय डॉक्टर जाधव पिछले 20 सालों से अमरेली सिविल अस्पताल में सेवा कर रहे थे. कोविड-19 (Covid-19) के कारण उनकी मां की मृत्यु हो गई थी. इसके एक हफ्ते बाद 22 जून को संक्रमण के कारण उन्होंने भी दम तोड़ दिया. आत्महत्या (Suicide) करने वाले अधिकांश डॉक्टर या तो सामान्य चिकित्सक या बाल रोग विशेषज्ञ थे.

एसिम्टोमैटिक कोरोना कैरियर बने बच्चे

सूरत में एमडी पीडियाट्रिशियन डॉ. केतन शाह ने कहा, ‘हम शुरू में इस राय पर कायम थे कि इस वायरस (Virus) से केवल बड़े लोग प्रभावित हो रहे हैं. लेकिन एक महीने बाद हमें एहसास हुआ कि बच्चे भी वायरस से संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन उन में लक्ष्ण बहुत कम दिखते है. मई और जून के महीने में हमने महसूस किया कि बच्चे एसिम्टोमैटिक कैरियर (asymptomatic carriers) हैं.’