हाथरस कांड: ‘हम नार्को टेस्ट के लिए तैयार’, सीबीआई की पूछताछ में बोले आरोपियों के परिजन

आरोपी संदीप (Sandeep) के पिता नरेंद्र सिंह ने कहा, "हमें यहीं के एक शख्स से यह बात पता चली थी कि लड़की घायल हुई है. मैं नार्को टेस्ट के लिए तैयार हूं. हमने कुछ भी नहीं छिपाया है. दो परिवारों के बीच लंबे समय से झगड़ा चलता आ रहा है."

हाथरस मामले (Hathras Case) में पीड़ित परिवार से दो दिनों तक पूछताछ करने के बाद 15-सदस्यीय सीबीआई टीम (CBI Team) ने गुरुवार को चार आरोपियों के घरवालों से सवाल-जवाब किया. चार घंटे तक पूछताछ करने के बाद सीबीआई टीम कुछ कागजों और सबूतों के साथ उनके घरों से बाहर निकली. आरोपी संदीप के पिता नरेंद्र सिंह ने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है. उन्होंने कहा, “मैं उस वक्त अपने बेटे के साथ था जब लड़की ने बलात्कार होने का दावा किया है.”

नरेंद्र सिंह ने कहा, “हमें यहीं के एक शख्स से यह बात पता चली थी कि लड़की घायल हुई है. मैं नार्को टेस्ट के लिए तैयार हूं. हमने कुछ भी नहीं छिपाया है. दो परिवारों के बीच लंबे समय से झगड़ा चलता आ रहा है. साल 2001 में हमें जेल जाना पड़ा था क्योंकि लड़की के दादा जी ने हमारे खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी.”

हाथरस केस: करीब 4 घंटे बूलगढ़ी गांव में रुकी CBI ने क्या-क्या किया, जानें पूरा घटनाक्रम

मोबाइल और कागजात लेकर निकली सीबीआई

सीबीआई टीम उनके घर से संदीप का मोबाइल फोन और मार्कशीट लेकर बाहर निकली. गुरुवार को सुबह 11 बजे सीबीआई गांव पहुंची थी. गांव जाने से पहले सीबीआई चंद्पा पुलिस थाने गई जहां पर इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी. तीन आरोपियों (संदीप, रवि और रामू) के परिवारवाले एक ही अहाते में बने घरों में रहते हैं. लवकुश का घर इससे थोड़ा आगे है.

आरोपियों से भी पूछताछ कर सकती है सीबीआई

रवि के पिता अत्तार सिंह ने बताया कि सीबीआई यहां से बेटे के कुछ कागजात लेकर गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई जल्द ही आरोपियों से पूछताछ करने की इजाजत मांग सकती है. चारों आरोपी फिलहाल अलीगढ़ जिला जेल में बंद हैं. संदीप 20 सितंबर को, लवकुश 23 सितंबर को, रवि 25 सितंबर को और रामू 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था.

तीन आरोपियों ने नहीं की घरवालों से बात

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद से अबतक संदीप, रामू और लवकुश ने अपने परिजनों से बात नहीं की है. हालांकि, रवि अबतक दो बार अपने घरवालों से बातचीत कर चुका है. अलीगढ़ जिला जेल के जेलर प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि कोरोनावायरस महामारी के चलते परिजनों को कैदियों से मिलने की इजाजत नहीं है, हालांकि हफ्ते में दो बार वो फोन पर बात कर सकते हैं.

हाथरस कांड: ‘पीड़िता की चप्पल, गंगाजल की बोतल और बड़े भाई को ले गई CBI’

Related Posts