मध्य प्रदेश सरकार के आदेश से खफा हुए संविदाकर्मी, कहा-हमें भी कोरोना से ख़तरा

स्वास्थ्य विभाग (Health Department) द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी और उनके परिजनों को प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज का भुगतान किया जाएगा.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सरकार और संविदा कर्मचारियों के बीच एक बार फिर से टकराव की स्थिति बन गई है. इस टकराव की वजह है सरकार का ताजा आदेश, जिसमें स्वास्थ विभाग ने सभी सरकारी कर्मचारियों के और उनके परिवार वालों के कोविड-19 (COVID 19) के इलाज की व्यवस्था की है. स्वास्थ्य विभाग (Health Department) द्वारा जारी इस आदेश में कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी और उनके परिजनों को प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज का भुगतान किया जाएगा.

आदेश में सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार वालों को प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा दी जा रही है, जिसका संविदा कर्मचारी पुरजोर विरोध कर रहे हैं. संविदा कर्मचारियों के संगठन अब इस मुद्दे पर आंदोलन की तैयारी भी कर रहे हैं. संविदा वालों का कहना है कि इस आदेश में संविदा कर्मचारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि हर मोर्चे पर संविदा कर्मचारी ही कोरोना वॉरियर के तौर पर ड्यूटी निभा रहे हैं.

अंग्रेजों जैसा व्यवहार कर रही सरकार

संविदा कर्मचारी अधिकारी संघ के अध्यक्ष रमेश राठौर के मुताबिक चाहे वह सैंपल कलेक्शन का काम हो या वह एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर स्क्रीनिंग का काम. हर जगह पर संविदा कर्मचारियों की और आउटसोर्स कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है. जब मोर्चे पर हम लड़ रहे हैं तो सरकार को हमारा भी ध्यान रखना चाहिए. इससे पहले भी हमने देखा है कि संविदा कर्मचारियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता रहा है. कर्मचारी संगठनों का कहना है आईएएस अधिकारी अंग्रेजों की तरह व्यवहार कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश में 1.5 लाख संविदाकर्मी

बता दें कि मध्य प्रदेश में करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी हैं, जिसमें से 19 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे हैं. यह संविदा कर्मचारी सैंपल कलेक्शन का काम, डोर टू डोर सर्वे का काम स्क्रीनिंग का काम कर रहे हैं. साथ ही अस्पतालों में भी इनकी सेवाएं ली जा रही हैं.

कोरोना इंफेक्शन फर्क नहीं करता

संविदा कर्मचारियों का कहना है कि क्या कोरोना संविदा कर्मचारी और सरकारी कर्मचारी में फर्क करता है. अगर नहीं करता तो सरकार को भी इस तरह का फर्क नहीं करना चाहिए. इस विरोध पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा सरकारी कर्मचारियों और उनके परिजनों को सरकार हर तरह की सुविधा और सुरक्षा उपलब्ध करा रही है. जहां तक संविदा कर्मचारियों का सवाल है तो सरकार ने मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदेश भर के कई अस्पतालों में कर रखी है और सरकार ने ये आश्वासन भी दिया है कि किसी भी व्यक्ति को कोरोना से संबंधित समस्या नहीं होने दी जाएगी.

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