मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव: ‘सुरखी’ से बदलेगा बुंदेलखंड का सियासी गणित

BJP भी सुरखी विधानसभा क्षेत्र को लेकर गंभीर है. यही वजह है कि पार्टी जहां घर-घर तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajput) BJP कार्यकर्ताओं से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 6:51 pm, Fri, 25 September 20

मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव (MP Assembly by Election) सियासी तौर पर अहम हैं, लेकिन बुंदेलखंड के सागर जिले की सुरखी (Surkhi) विधानसभा सीट ऐसी है जिसके नतीजे इस इलाके की सियासत पर बड़ा असर डालने वाले होंगे.

सागर जिले का सुरखी (Surkhi, Sagar) विधानसभा क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिवराज सिंह चौहान सरकार के परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajput) का BJP के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरना तय है. राजपूत की गिनती पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) की करीबियों में होती है. गोविंद सिंह उन नेताओं में है जिन्होंने कांग्रेस छोड़कर BJP का हाथ थामा है.

गोविंद सिंह के खिलाफ खड़े हो सकते हैं पारुल साहू

राजपूत के BJP में जाने से कई नेता कांग्रेस की तरफ रुख कर रहे हैं. उन्हीं में से एक पूर्व विधायक पारुल साहू (Parul Sahu) ने भी कांग्रेस की सदस्यता ली है. पारुल साहू ने साल 2013 के विधानसभा चुनाव में वर्तमान के BJP के संभावित उम्मीदवार गोविंद सिंह राजपूत को शिकस्त (पराजय) दी थी.

अब संभावना इस बात की है कि कांग्रेस गोविंद सिंह के खिलाफ पारुल साहू को मैदान में उतार सकती है. एक तरफ जहां पारुल साहू ने कांग्रेस की सदस्यता ली है तो कुछ और नेता BJP से कांग्रेस की तरफ रुख कर रहे हैं.

BJP भी सुरखी विधानसभा क्षेत्र को लेकर गंभीर

कांग्रेस (Congress) छोड़कर आए गोविंद सिंह के लिए व्यक्तिगत तौर पर यह चुनाव अहमियत वाला है तो वहीं इस चुनाव के नतीजों का बुंदेलखंड की राजनीति पर असर होना तय है. इसकी वजह यह है कि सागर जिले से शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में गोपाल भार्गव भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत मंत्री हैं.

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BJP भी सुरखी विधानसभा क्षेत्र को लेकर गंभीर है. यही वजह है कि पार्टी जहां घर-घर तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर गोविंद सिंह ने मतदाताओं का दिल जीतने के लिए रामशिला पूजन यात्रा (Ramshila Pujan Yatra) निकाली और BJP कार्यकर्ताओं से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

पारुल साहू की वजह से गोविंद सिंह के सामने मुश्किलें

एक तरफ जहां गोविंद सिंह BJP के नेताओं और कार्यकर्ताओं में अपनी पैठ बढ़ाने में लगे हैं तो वहीं दूसरी ओर BJP के असंतुष्ट कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं. पारुल साहू के कांग्रेस में आने से गोविंद सिंह के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि पारुल के पिता संतोष साहू भी कांग्रेस से सागर जिले से विधायक रह चुके हैं.

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अब एक बार फिर गोविंद सिंह और पारुल के बीच सियासी मुकाबला हो सकता है, अगर ऐसा होता है तो चुनाव रोचक और कड़ा होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं. दोनों ही जनाधार और आर्थिक तौर पर मजबूत हैं, इसलिए यहां का चुनाव चर्चाओं में रहेगा, इसकी संभावनाएं बनी हुई हैं.

पूरे इलाके को प्रभावित करेगा सुरखी विधानसभा क्षेत्र

राजनीतिक विश्लेषक (Political Analyst) विनोद आर्य का कहना है कि, “सुरखी विधानसभा क्षेत्र (Surkhi Assembly Seat) का उप-चुनाव केवल एक विधानसभा क्षेत्र का चुनाव नहीं बल्कि पूरे इलाके को प्रभावित करने वाला होगा, ऐसा इसलिए क्योंकि गोविंद सिंह की गिनती सिंधिया के करीबियों में होती है. उनकी जीत से जहां नया सियासी ध्रुवीकरण होगा तो उनकी हार से BJP के पुराने संबंध मजबूत बने रहेंगे. वहीं पारुल साहू के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ताकत मिलेगी.”

गोविंद सिंह की जीत-हार से होगा सियासी गणित में बदलाव

बुंदेलखंड का सागर (Sagar) वह जिला है जहां से शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) सरकार में गोविंद सिंह राजपूत के अलावा भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव मंत्री हैं. ये तीनों सत्ता के केंद्र हैं. गोविंद सिंह के जीतने और हारने से सियासी गणित में बदलाव तय है. यही कारण है कि BJP में एक वर्ग गोविंद सिंह के जरिए अपनी संभावनाएं तलाश रहा है तो राजपूत के BJP में आने से अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे नेता नई राह की खोज में लगे है. (IANS)

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