मध्य प्रदेश: बालाघाट एनकाउंटर पर घिरी पुलिस, अब सीआईडी करेगी जांच

मध्यप्रदेश के बालाघाट में 6-7 सितंबर की दरमियानी रात को हुए एनकाउंटर में मारे गए शख्स की मौत अब मध्यप्रदेश पुलिस के गले की फांस बन रही है.

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  • Publish Date - 11:47 am, Sun, 20 September 20

मध्य प्रदेश के बालाघाट में 6-7 सितंबर की दरमियानी रात को हुए एनकाउंटर में मारे गए शख्स की मौत अब मध्य प्रदेश पुलिस के गले की फांस बन रही है. मामला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच आदिवासी अस्मिता और राजनीति का केंद्र बनता दिख रहा है. दरअसल मध्य प्रदेश के बालाघाट पुलिस पर एनकाउंटर के नाम पर एक ग्रामीण की हत्या का आरोप लगा है. आरोप ये है कि पुलिस ने ग्रामीण की मौत को नक्सली एनकाउंटर दिखाने की कोशिश की. मामला जब 2 राज्यों में तूल पकड़ता दिखा तो MP सरकार ने सीआईडी जांच के निर्देश दिए.

6-7 सितंबर की दरमियानी रात को हुए कथित पुलिस-नक्सली एनकाउंटर में मरने वाले इस शख्स का नाम झाम सिंह धुर्वे है. इस शख्स का नक्सलियों से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है. लेकिन पुलिस नक्सल मुठभेड़ में इस शख्स की मौत कैसे हो गई ये बड़ा सवाल है. पुलिस का दावा है कि 6 सितंबर को देर रात बालाघाट के गढी थाना इलाके में उमरझोला गांव में उनका नक्सलियों के साथ एनकाउंटर हुआ, जिसमें दोनों ओर से फायरिंग हुई.

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पुलिस ने 20 राउंड और नक्सलियों ने करीब 40 राउंड फायर किए. 7 सितंबर को जब सुबह पुलिस सर्चिंग के लिए निकली तो एक अज्ञात शख्स का शव मिला. पुलिस ने शुरुआती जानकारी दी कि संभावना हो सकती है कि ये शख्स नक्सलियों का कुरियर हो या उनके दल का सदस्य हो.

मछली का शिकार करने गया था शख्स

हालांकि जब सच्चाई सामने आई तो सबके होश उड़ गए. मरने वाले शख्स की पहचान छत्तीसगढ़ के कवर्धा के रहने वाले झाम सिंह के तौर पर हुई. पहले पुलिस को आशंका थी कि ये नक्सलियों का साथी है लेकिन हुलिया जब सार्वजनिक किया गया तो पता चला कि उस शख्स का नक्सलियों से दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं था. बेचारा झाम सिंह तो मछली का शिकार करने गया था उसे क्या पता था कि वो खुद ही गोली का शिकार हो जाएगा.

मामले ने तब तूल पकड़ा जब झाम सिंह के एक साथी नेम सिंह ने छत्तीसगढ़ पहुंचकर सारी कहानी बताई. इस बयान के आधार पर छत्तीसगढ़ सरकार के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को चिट्ठी लिखकर जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ के रहने वाले 2 आदिवासियों नेम सिंह धुर्वे और झाम सिंह पर मध्य प्रदेश पुलिस ने बिना बात गोलियां चलाईं जिसमें झाम सिंह की मौत हो गई और नेम सिंह बच गए. इसे लेकर आदिवासी समाज नाराज है और कार्रवाई की मांग कर रहा है.

इसके बाद आग मध्य प्रदेश तक पहुंची और आदिवासियों ने 2 दिन पहले बालाघाट में बड़ा आंदोलन किया. प्रदर्शन में शामिल होने वाले विधायकों में संजय उइके, अर्जुन काकोडिया, अशोक मर्सकोले, नारायण पट्टा और भूपेंद्र मरावी शामिल थे. विधायकों ने सेवानिवृत्त जज द्वारा मामले की जांच कराने की मांग की.

दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में वन मंत्री मोहम्मद अकबर पीड़ित परिवार से मुलाकात करने पहुंचे और परिवार को 1 लाख की आर्थिक सहायता भी दी. मृतक के परिवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें अपने पिता के लिए न्याय चाहिए.

मामला बढ़ता देख सरकार ने सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं. जांच टीम में 1 एआईजी, 1 डीएसपी, 1 टीआई और एसआई शामिल हैं. इस टीम को कुछ जरूरी प्राथमिकताएं पूरी करनी हैं.
1- केस डायरी अपने पॉजेशन में लेना
2- फॉरेंसिक रिपोर्ट, मृतक की पीएम रिपोर्ट पॉजेशन में लेना
3- मजिस्ट्रियल जांच का स्टेटस चेक करना
4- घटनास्थल का मुआयना
5- मृतक के परिजनों और चश्मदीदों के बयान
6- जरूरत पड़ने पर पुलिसपार्टी से पूछताछ के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी की टीम को जांच की ज़िम्मेदारी दी गई है. हालांकि नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि मौत कैसे हुई है ये देखना जरूरी है कि मृतक नक्सलियों की गोली से मरा है या पुलिस की गोली से.