मध्य प्रदेश उपचुनाव: डबरा सीट पर चुनावी बिसात, आमने सामने हैं समधी समधन!

डबरा में भी बीजेपी कांग्रेस का गणित अलग जान पड़ता है. चूंकि डबरा एससी यानि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है और पहले से ही इमरती देवी का वोट बैंक दमदार रहा है, ऐसे में यहां बीएसपी का भी फिक्स वोटर है, जो प्रत्याशी बदलने पर ज्यादा नहीं बदलता पार्टी से जुड़ा रहता है.

ग्वालियर की डबरा सीट से बीजेपी के टिकट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे की नेता इमरती देवी चुनाव लड़ रही हैं.  इमरती देवी मध्य प्रदेश सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं. इमरती देवी राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की काफी करीबी नेता हैं. चूंकि इमरती महिला हैं और अनुसूचित जाति वर्ग से आती हैं तो क्षेत्र में अच्छी छवि है. माना जाता है कि उन्होंने अनुसूचित वर्ग के लिए काफी काम किया है.

हालांकि वो अपने बयानों और व्यवहार को लेकर ट्रोल होती रही हैं. इससे स्थानीय वोट पर असर पड़ेगा इसकी संभावना कम है. वैसे दलबदल को लेकर वोटर्स में चर्चा है, लेकिन महिला होने के नाते इन्हें एक सॉफ्ट कॉर्नर मिलता है. गौरतलब है कि इमरती देवी के करीबी मोहन सिंह की मनमानी से क्षेत्र की जनता काफी नाराज है.

कांग्रेस के टिकट पर सुरेश राजे चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश राजे पूर्व में बीजेपी में थे. 2013 में सुरेश राजे बीजेपी से इमरती देवी के सामने ही चुनाव लड़े थे. दोनों प्रत्याशियों की छवि इलाके में साफ सुथरी और ठेठ है. इससे पहले बीएसपी से कांग्रेस में आईं सत्यप्रकाशी परसेड़िया को टिकट मिलने की संभावना थी, लेकिन आखिरी वक्त पर राजे को टिकट मिला. सुरेश राजे इमरती देवी के दूर के रिश्तेदार बताए जाते हैं.

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डबरा में इमरती देवी ने पिछले चुनाव में बीजेपी के कप्तान सिंह कहसारी को 57,446 वोटों से हराया था. मुख्य लड़ाई कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. नरोत्तम मिश्रा यहां के चुनाव की मुख्य धुरी कहे जाते हैं, क्योंकि डबरा नरोत्तम मिश्रा का गृह जिला है. पहले नरोत्तम मिश्रा यहीं से चुनाव लड़ते थे, लेकिन सीट के एससी के लिए आरक्षित घोषित होने के बाद वो अब दतिया से चुनाव लड़ते हैं. इमरती देवी कांग्रेस सरकार में भी महिला एवं बाल विकास मंत्री रही हैं.

प्रमुख फैक्टर्स की बात करें तो बीएसपी से कांग्रेस में आईं सत्यप्रकाशी परसेड़िया नगर पालिका अध्यक्ष रही हैं. क्षेत्र में काफी दबदबा है, दबंग महिला हैं साथ ही कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया की करीबी रही हैं. नरोत्तम मिश्रा और सत्यप्रकाशी परसेड़िया धुर विरोधी नेता माने जाते हैं. एक वक्त पर सत्यप्रकाशी परसेड़िया कांग्रेस से नाराज होकर बीएसपी में शामिल हो गई थीं, लेकिन अब वो कांग्रेस में वापसी कर चुकी हैं. इसका फायदा चुनावों में मिल सकता है. हालांकि टिकट नहीं मिलने से परसेड़िया नाराज हैं.

पिछले चुनावों पर एक नजर

  • 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस से इमरती देवी ने बीजेपी के कप्तान सिंह को 57,446 वोटों से हराया. बीएसपी के उम्मीदवार को 13 हजार वोट मिले.
  • 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की इमरती देवी ने बीजेपी के सुरेश राजे को करीब 33 हजार वोटों से हराया. यहां बीएसपी को 19 हजार वोट मिले थे.
  • 2008 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की इमरती देवी ने बीएसपी के हरगोविंद जौहरी को करीब 10,500 वोटों से हराया था. बीएसपी को चुनाव में 18 हजार वोट मिले थे. इस चुनाव में बीजेपी तीसरे नंबर पर रही, जिसे 16 हजार 277 वोट मिले. करीब 18 हजार वोट फूलसिंह बरैया और बृजमोहन परिहार ले गए जो अनुसूचित जाति वर्ग के बडे़ नेता थे.

डबरा में भी बीजेपी कांग्रेस का गणित अलग जान पड़ता है. चूंकि डबरा एससी यानि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है और पहले से ही इमरती देवी का वोट बैंक दमदार रहा है, ऐसे में यहां बीएसपी का भी फिक्स वोटर है, जो प्रत्याशी बदलने पर ज्यादा नहीं बदलता पार्टी से जुड़ा रहता है. हालांकि इमरती का वोट लगातार बढ़ा है. नरोत्तम मिश्रा भी इस क्षेत्र में बड़ा फैक्टर हैं.

कुल वोटर – 2,28,153
पुरुष– 1,21,050
महिला – 1,07,098

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