इंदौर: MYH में लापरवाही का एक और मामला, 6 दिन से पोस्टमार्टम के इंतजार में मासूम का शव

इस मासूम को 6 जुलाई को चाइल्ड हेल्पलाइन (Child Helpline) की टीम ने एमवायएच (MYH) में भर्ती करवाया था. ढाई महीने जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष के बाद 11 सितंबर को वह जिंदगी की जंग हार गया.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच (Government Hospital MYH) के पोस्टमार्टम (Post Mortem) रूम से इन दिनों शर्मसार करने वाले मामले सामने आ रहे हैं. कुछ दिनों पहले एक पुरुष का शव नरकंकाल में तब्दील मिला और अब मासूम के शव को लेकर फिर एक बार अस्पताल सुर्खियों में है. अस्पताल की मर्च्यूरी के फ्रिजर में 6 दिन से नवजात का शव अंत्येष्ठी का इंतजार कर रहा है. दरअसल, अस्पताल के कर्मचारियों ने मासूम के शव को खुले में रखने के बजाय फ्रीजर में रखवा दिया. वहीं, पुलिस इतना समय नहीं निकाल पाई कि उसका पोस्टमार्टम करवा दिया जाए.

मासूम के शव और नरकंकाल मामले में एसआईजी ने पोस्टमार्टम रूम की पड़ताल शुरू कर दी है. एसआईजी ने माना है कि बच्चे के पोस्टमार्टम में देरी के चलते शव को पोस्टमार्टम रूम में पटक कर रखा गया था. मानवता को शर्मशार कर देने वाले मामले में एमवायएच अस्पताल की बड़ी लापरवाही का खुलासा उस वक्त हुआ, जब मीडिया को उस शव की जानकारी मिली.

6 जुलाई को अस्पताल में हुआ भर्ती

इस मासूम को 6 जुलाई को चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने इंदौर के एमवायएच में भर्ती करवा था. ढाई महीने जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष के बाद 11 सितंबर को वह जिंदगी की जंग हार गया. रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर को सीएमओ ने इसकी सूचना एमवायएच चौकी पर हेड कांस्टेबल को दी थी. लेकिन इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया.

मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

मीडिया से बात करते हुए असिस्टेंट कमिश्नर रजनी सिंह ने कहा कि तीन माह के नवजात शिशु का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया. स्टाफ की लापरवाही के चलते पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी गई. वहीं, मानवाधिकार आयोग ने भी 4 सप्ताह के भीतर इस मामले में जवाब मांगा है. लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों पर गाज गिरने की उम्मीद की जा रही है.

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