MP उपचुनाव: बीजेपी के सूबेदार सिंह को कांग्रेसी ‘दोस्‍त’ के सहारे जीत की आस, पढ़ें जौरा सीट का ब्‍योरा

बीजेपी के सूबेदार सिंह और कांग्रेस के दिवंगत विधायक बनवारी लाल मित्र थे. दोनों के समर्थकों के बीच भी व्यवहार हमेशा दोस्ताना ही रहा है. सिर्फ दलगत राजनीति के चलते दोनों एक दूसरे के विरोधी कहलाते थे.

सूबेदार सिंह सिकरवार और बनवारी लाल शर्मा (FILE)

मुरैना जिले की जौरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा के निधन के बाद उपचुनाव होने जा रहा है. इस सीट पर बीजेपी की तरफ से सूबेदार सिंह सिकरवार, पुराने प्रत्याषी रहे हैं, जो बीते चुनाव में बनवारी शर्मा से हार गए थे. नहर की पट्टी ठाकुर बाहुल्य है.

सूबेदार सिंह और बनवारी लाल मित्र थे. दोनों के समर्थकों के बीच भी व्यवहार हमेशा दोस्ताना ही रहा है. सिर्फ दलगत राजनीति के चलते दोनों एक दूसरे के विरोधी कहलाते थे. बनवारी लाल शर्मा सिंधिया समर्थक थे, लेकिन सिंधिया अब बीजेपी में हैं और सूबेदार भी, इसलिए माना जा रहा है कि बनवारी लाल शर्मा के वोट काफी हद तक सूबेदार के खाते में ही शिफ्ट होंगे.

वहीं अब कांग्रेस की तरफ से पंकज उपाध्याय इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. पंकज मूलत: इंदौर के नेता हैं. इनपर विरोधियों की तरफ से भू-माफिया होने का आरोप लगाया जाता है, अगर जौरा में कांग्रेस ने ताकत लगाई और बीजेपी के वोटों में सेंधमारी की, तो इसका सीधा फायदा बीएसपी को हो सकता है.

इधर बीएसपी से सोनेराम कुशवाह (ओबीसी) हैं. माना जा रहा है कि बीएसपी की गिनती 40 हजार से शुरू होगी, क्योंकि यहां दलित वोट बैंक अच्छा खासा है और वो सारा बीएसपी के पाले में जाता है. बीते चुनावों में भी बीएसपी को 41 हजार वोट मिले थे. लिहाजा कांग्रेस की मेहनत का फायदा बीएसपी को मिल जाएगा. उत्तर प्रदेश से लगा हुआ क्षेत्र होने के चलते यहां बीएसपी का काफी वर्चस्व भी है.

एक नजर जौरा के पिछले चुनावों पर…

  • 2018 चुनावों में कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा ने बीएसपी के मनीराम धाकड़ को 15137 वोटों से हराया था. कांग्रेस को 55 हजार वोट थे, जबकि बीएसपी को 41 हजार वोट मिले थे. बीजेपी के सूबेदार सिंह तीसरे नंबर पर रहे, इन्हें 37 हजार वोट मिले थे.
  • 2013 में बीजेपी के सूबेदार सिंह ने कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा को लगभग 2500 वोटों से हराया था. यहां बीएसपी के मनीराम धाकड़ को 30 हजार वोट मिले थे.
  • वहीं 2008 में बीएसपी के मनीराम धाकड़ ने कांग्रेस के वृंदावन सिंह को लगभग 9 हजार वोटों से हराया था. यहां बीएसपी को 36 हजार वोट मिले थे.

कुल वोटर- 244065
महिला- 111837
पुरुष- 132214

इलाके में ब्राह्मण, राजपूत के अलावा सबसे ज्यादा दलित वोट है. अमूमन ब्राह्मण और राजपूतों में वोट बंट जाता है और इसी वजह से दलित वोट बीएसपी के पाले में जाता है.

क्षेत्र के जरूरी मुद्दे…

इलाके में सबसे बड़ा मुद्दा किसानों और युवाओं के रोजगार का है. रोजगार के लिए कैलारस में शुगर फैक्ट्री थी, जो कि बंद पड़ी है. हर बार चुनाव में मुद्दा उठता है, लेकिन कुछ नहीं होता.

आचार संहिता लगने से ठीक पहले मुरैना के जौरा विकासखंड में शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट ने आसान बैराज सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी है. इसे लेकर इलाके के लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे. इसमें 392 करोड़ रुपए की लागत आनी है.

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